महाराष्ट्र सूखा संकट: 265 तालुकों में 100% फसल पंचनामा, 19 अतिरिक्त तालुकों में सर्वेक्षण के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण उत्पन्न सूखे जैसे हालात के मद्देनज़र राज्य सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं, जिनमें प्रभावित तालुकों में फसल पंचनामा और सर्वेक्षण का काम तत्काल पूरा करने को कहा गया है। कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी इस पत्र के तहत जहाँ 265 तालुकों में शत-प्रतिशत पंचनामा अनिवार्य किया गया है, वहीं 8 जिलों के 19 अतिरिक्त तालुकों में भी फसल क्षति का आकलन शुरू होगा।
मुख्य घटनाक्रम
कृषि आयुक्तालय ने 5 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को एक विस्तृत पत्र भेजा। इसमें स्पष्ट किया गया कि जिन 265 तालुकों में ट्रिगर-1 लागू है, वहाँ 100 प्रतिशत फसल पंचनामा बिना विलंब पूरा किया जाए। यह पंचनामा भौतिक और डिजिटल — दोनों माध्यमों से किया जाएगा।
संबंधित किसानों के हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से लिए जाएँगे और इन पंचनामों को ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति स्तर पर सार्वजनिक भी किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
19 अतिरिक्त तालुकों में विशेष सर्वेक्षण
ट्रिगर-1 सूची के बाहर 8 जिलों के 19 तालुकों में भी सूखे की गंभीरता का आकलन किया जाएगा। इन तालुकों में प्रमुख 5 फसलों का 20 प्रतिशत सर्वेक्षण और जमीनी जाँच की जाएगी। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट कृषि आयुक्तालय के माध्यम से मंत्रिमंडल उपसमिति के सामने प्रस्तुत की जाएगी।
इन 19 तालुकों में शामिल हैं — नांदेड़ जिले के मुदखेड़, मुखेड़ और अर्धापुर; चंद्रपुर के जिवती, ब्रह्मपुरी और बल्लारपुर; गोंदिया के आमगांव, देवरी, सालेकसा और गोंदिया; वर्धा के कारंजा; भंडारा के मोहाड़ी और तुमसर; नासिक के त्र्यंबकेश्वर, चांदवड़ और निफाड; सातारा के पाटण; तथा सांगली के शिराला और वालवा।
आम किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के कई इलाकों में खरीफ फसलें कमज़ोर मानसून की मार झेल रही हैं। पंचनामे के डिजिटलीकरण और ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक प्रदर्शन से किसानों को यह जानने में सुविधा होगी कि उनकी फसल क्षति आधिकारिक रूप से दर्ज हुई या नहीं — जो मुआवज़े के दावों की बुनियाद बनती है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सूखा राहत की प्रक्रिया में विलंब पुरानी शिकायत रही है। पंचनामे में देरी अक्सर मुआवज़े के वितरण को महीनों पीछे धकेल देती है, जिससे ऋणग्रस्त किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
सरकार की कार्रवाई और जवाबदेही
राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का तुरंत और सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं। की गई कार्रवाई की रिपोर्ट कृषि विभाग को ई-मेल के माध्यम से भेजना भी अनिवार्य किया गया है, जिससे निगरानी तंत्र मजबूत होगा।
क्या होगा आगे
19 अतिरिक्त तालुकों के सर्वेक्षण की रिपोर्ट मंत्रिमंडल उपसमिति के सामने रखे जाने के बाद राज्य सरकार यह तय करेगी कि इन्हें भी आधिकारिक सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल किया जाए या नहीं। सर्वेक्षण परिणाम केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत सहायता माँगने में भी निर्णायक भूमिका निभाएँगे।