अभिषेक बनर्जी पर हमला: केजरीवाल बोले — 'BJP सत्ता में आते ही विपक्ष पर हमले शुरू'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 31 मई को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। जहाँ विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने इसके लिए TMC को ही जिम्मेदार ठहराया।
केजरीवाल का BJP पर हमला
अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'हम इस घटना की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। अभिषेक बनर्जी पर एक बहुत ही गंभीर और शर्मनाक हमला किया गया — यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।' उन्होंने आगे कहा, 'उनकी सरकार को सत्ता में आए अभी कुछ दिन भी पूरे नहीं हुए हैं, और उन्होंने विपक्ष में बैठे लोगों पर ऐसे हमलों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। अगर अभी ऐसा हो रहा है, तो अगले पाँच सालों में वे क्या करेंगे? क्या इसीलिए उन्हें सत्ता सौंपी गई थी?'
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भी इस घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार के इशारे पर ऐसी घटनाएँ की जा रही हैं, जिनमें सांसदों को भी शामिल किया जा रहा है। यह सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।'
उपेंद्र कुशवाहा का संतुलित बयान
दिल्ली में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी पर भी हमला करना — चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का — उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में ऐसे हमलों के लिए कोई जगह नहीं है। अगर किसी को कुछ कहना है, तो उसके लिए उचित मंच और तरीके मौजूद हैं।'
शिवसेना ने TMC पर डाली जिम्मेदारी
महाराष्ट्र से शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने इस घटना को अलग नज़रिए से देखा। उनके अनुसार, 'यह एक अचानक हुआ हमला था। लोग अवैध गतिविधियों, गुंडागर्दी और ऐसी ही हरकतों के कारण नाराज़ थे, जिन्हें अब रोक दिया गया है। उनका गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा और लोगों ने अभिषेक बनर्जी पर अंडे फेंके।' गौरतलब है कि यह बयान सत्ता पक्ष से जुड़े दल की ओर से घटना को जनता के स्वतःस्फूर्त आक्रोश के रूप में पेश करने की कोशिश है।
आगे क्या होगा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नई सरकार के गठन के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव अपने शुरुआती दौर में है। विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ स्पष्ट करती हैं कि संसद के भीतर और बाहर यह टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है। मामले की जाँच और राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।