बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुला, नए सत्र में बाघिन के दीदार से हुई धमाकेदार शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश का सबसे चर्चित वन्यजीव अभयारण्य, 1 अक्टूबर 2026 से पर्यटकों के लिए पुनः खुल गया है। करीब तीन महीने के मानसूनी अवकाश के बाद कोर क्षेत्र में जंगल सफारी फिर से प्रारंभ हुई और पहले ही दिन पर्यटकों को सिद्ध बाबा क्षेत्र के निकट एक बाघिन के दर्शन हुए, जिससे नए पर्यटन सत्र की शुरुआत यादगार बन गई। पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों ने पारंपरिक अंदाज में अतिथियों का स्वागत किया।
उत्सवपूर्ण माहौल में खुले गेट
पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली — तीनों प्रमुख प्रवेश द्वारों को फूलों और सजावटी सामग्री से आकर्षक रूप से सँवारा गया। गेट खोलने से पहले वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना की और वन्यजीवों की सुरक्षा तथा सत्र के सुचारु संचालन की कामना की। यह आयोजन बांधवगढ़ की उस परंपरा का हिस्सा है जो हर वर्ष नए सत्र को एक उत्सव की तरह मनाती है।
पर्यटन सत्र का समय और व्यवस्था
अधिकारियों के अनुसार, कोर क्षेत्र में पर्यटन 1 अक्टूबर से 30 जून तक संचालित होगा, जबकि बफर क्षेत्र में पर्यटन वर्षभर जारी रहता है। पर्यटकों को पार्क के नियमों का पालन करने और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बारे में प्रवेश द्वार पर ही जानकारी दी गई। गौरतलब है कि मानसून के दौरान घने जंगल और उफनती नदियाँ कोर क्षेत्र को दुर्गम बना देती हैं, इसीलिए हर वर्ष यह अनिवार्य विराम रखा जाता है।
इस बार का खास फोकस: सिर्फ बाघ नहीं, पूरा जंगल
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र से पहले सफारी व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस बार पर्यटकों को केवल बाघ दर्शन तक सीमित न रखते हुए जंगल, वन्यजीव, पक्षी, वनस्पतियाँ, इतिहास, पर्यावरण एवं बांधवगढ़ के भौगोलिक महत्व की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह दृष्टिकोण इको-टूरिज्म की उस वैश्विक अवधारणा से मेल खाता है जो पर्यटन को संरक्षण से जोड़ती है।
बांधवगढ़ की विरासत: बाघों से परे
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी उच्च बाघ-घनत्व के लिए विश्वभर में जाना जाता है, लेकिन यह केवल बाघों तक सीमित नहीं है। यहाँ स्थित प्राचीन गुफाएँ, मंदिरों के अवशेष और शेषशय्या जैसे ऐतिहासिक स्थल इसे एक बहुआयामी पर्यटन स्थल बनाते हैं। स्थानीय संस्कृति, जैवविविधता और पुरातात्विक महत्व का यह संगम बांधवगढ़ को मध्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्वों से अलग पहचान देता है।
आम पर्यटकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर से दीपावली और सर्दियों की छुट्टियों के मद्देनजर वन्यजीव पर्यटन की माँग तेज़ी से बढ़ती है। मध्य प्रदेश वन विभाग के लिए बांधवगढ़ राजस्व और पर्यावरण संरक्षण दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। आने वाले हफ्तों में सफारी बुकिंग के आँकड़े यह बताएंगे कि क्या प्रबंधन के नए प्रयोग पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करने में सफल होते हैं।