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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की 5 दिवसीय पिकनिक शुरू, गन्ना-गुड़ और मालिश से हो रही खातिरदारी

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की 5 दिवसीय पिकनिक शुरू, गन्ना-गुड़ और मालिश से हो रही खातिरदारी

सारांश

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पालतू हाथी इस बार असली 'शाही छुट्टी' पर हैं — गन्ना, गुड़, नारियल और अरंडी तेल की मालिश के साथ। 80 वर्षीय गौतम से लेकर बरखा तक, 6 हाथियों की यह 5 दिवसीय पिकनिक जंगल की सुरक्षा में वर्षों की मेहनत का सुखद इनाम है।

मुख्य बातें

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 24 सितंबर 2026 से पालतू हाथियों की 5 दिवसीय पिकनिक शुरू हुई।
पिकनिक धमोखर बफर जोन के जंगल में आयोजित हो रही है; हाथियों को हर काम से पूर्ण विश्राम दिया गया है।
गौतम (जन्म 1946) और अनारकली (जन्म 1964) सहित बांधवी, कृष्णगज, पूनम और बरखा पिकनिक में शामिल हैं।
हाथियों को गन्ना, गुड़, सेब और नारियल खिलाए जा रहे हैं; अरंडी और नीम के तेल से मालिश की जा रही है।
पिकनिक के दौरान यूरिन व ब्लड टेस्ट समेत स्वास्थ्य परीक्षण भी किए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 24 सितंबर 2026 (गुरुवार) से पालतू हाथियों की पाँच दिवसीय पिकनिक आरंभ हो गई है। इस विशेष आयोजन में जंगल की सुरक्षा और निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में वन विभाग का सहयोग करने वाले इन हाथियों को पाँच दिनों के लिए हर काम से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। धमोखर बफर जोन के जंगल में आयोजित यह पिकनिक पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

पिकनिक में क्या हो रहा है खास

पिकनिक के दौरान हाथियों की देखभाल की पूरी व्यवस्था की गई है। सुबह उन्हें नहलाने के बाद अरंडी के तेल और नीम के तेल से उनके पैरों की मालिश की जाती है। इसके बाद चंदन-वंदन से उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें सजाया जाता है। भोजन में उनके पसंदीदा गन्ना, गुड़, सेब और नारियल परोसे जा रहे हैं।

महावत नारायण सोनी ने बताया कि पिकनिक के दौरान हाथियों से किसी भी तरह का काम नहीं लिया जाता और उन्हें पूरी तरह आराम दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी होता है, जिसमें यूरिन और ब्लड टेस्ट जैसी जाँचें शामिल हैं।

गौतम और अनारकली बने आकर्षण का केंद्र

इस पिकनिक में बांधवगढ़ के सबसे वरिष्ठ हाथी खास चर्चा में हैं। गौतम, जिनका जन्म 1946 में हुआ था, और अनारकली, जिनका जन्म 1964 में हुआ था, सबसे उम्रदराज होने के कारण सबकी नज़रों में हैं। इनके साथ बांधवी, कृष्णगज, पूनम और बरखा भी इस शाही आयोजन का आनंद लेते नज़र आ रहे हैं।

गौरतलब है कि गौतम 80 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं और वर्षों से बांधवगढ़ के जंगलों में सेवाएँ दे रहे हैं। इन हाथियों की ऐतिहासिक उपस्थिति इस पिकनिक को और भी भावनात्मक बनाती है।

बांधवगढ़ में हाथियों की भूमिका

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में ये पालतू हाथी वन अमले के साथ मिलकर गश्त, निगरानी और अवैध शिकार रोकने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ रही है और जंगलों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी बढ़ गई है — ऐसे में इन हाथियों का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

यह पाँच दिनों का विश्राम इन हाथियों की शारीरिक और मानसिक थकान दूर करने के लिए वन विभाग का एक संवेदनशील कदम माना जाता है। स्थानीय वन अधिकारियों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

आम जनता और पर्यटकों पर असर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हर साल हज़ारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। पिकनिक के दौरान हाथियों को नज़दीक से देखने और उनकी देखभाल की इस अनूठी परंपरा को जानने का मौका पर्यटकों के लिए एक विशेष अनुभव बनता जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की देखभाल हाथियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

क्या होगा आगे

पाँच दिनों की पिकनिक समाप्त होने के बाद ये हाथी फिर से अपनी नियमित ड्यूटी पर लौटेंगे। इस दौरान किए गए स्वास्थ्य परीक्षणों के आधार पर उनकी दिनचर्या और देखभाल में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। बांधवगढ़ वन विभाग की यह पहल वन्यजीव संरक्षण में मानवीय दृष्टिकोण की एक सराहनीय मिसाल बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी चर्चा अक्सर बाघ संरक्षण के शोर में दब जाती है। 80 वर्षीय गौतम जैसे हाथियों को जब स्वास्थ्य जाँच और शाही भोजन मिलता है, तो यह संकेत देता है कि मध्य प्रदेश वन विभाग ने 'कामकाजी जानवर' की अवधारणा से आगे बढ़कर सोचना शुरू किया है। हालाँकि यह परंपरा वर्षों पुरानी है, इसे संस्थागत नीति का दर्जा मिलना अभी भी एक अनुत्तरित सवाल है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की पिकनिक क्या है?
यह एक 5 दिवसीय विशेष आयोजन है जिसमें बांधवगढ़ के पालतू हाथियों को उनके नियमित वन-कार्यों से पूरी तरह मुक्त कर आराम दिया जाता है। इस दौरान उन्हें पसंदीदा भोजन, मालिश और स्वास्थ्य जाँच की सुविधा मिलती है।
इस पिकनिक में कौन-कौन से हाथी शामिल हैं?
पिकनिक में गौतम (जन्म 1946), अनारकली (जन्म 1964), बांधवी, कृष्णगज, पूनम और बरखा — कुल 6 पालतू हाथी शामिल हैं। गौतम और अनारकली अपनी उम्र के कारण सबसे अधिक चर्चा में हैं।
हाथियों की देखभाल कैसे की जा रही है?
महावत नारायण सोनी के अनुसार सुबह नहलाने के बाद हाथियों के पैरों में नीम का तेल और अरंडी का तेल लगाया जाता है। फिर चंदन-वंदन से उनका सम्मान किया जाता है और गन्ना, गुड़, सेब, नारियल जैसा पसंदीदा खाना खिलाया जाता है।
बांधवगढ़ में ये हाथी आम दिनों में क्या काम करते हैं?
सामान्य दिनों में ये हाथी वन अमले के साथ जंगल में गश्त, निगरानी और अवैध शिकार रोकने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करते हैं। पाँच दिनों की यह पिकनिक उनकी शारीरिक और मानसिक थकान दूर करने का अवसर है।
पिकनिक कहाँ आयोजित हो रही है और कब तक चलेगी?
यह पिकनिक उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर जोन के जंगल में 24 सितंबर 2026 से शुरू होकर 5 दिनों तक चलेगी। इस दौरान हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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