13 अगस्त 2026
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कुम्की हाथियों से आंध्र प्रदेश में मानव मृत्यु दर 70% घटी: उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण

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कुम्की हाथियों से आंध्र प्रदेश में मानव मृत्यु दर 70% घटी: उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण

सारांश

आंध्र प्रदेश में कुम्की हाथियों की तैनाती ने जंगल-सीमावर्ती इलाकों में इंसानी मौतें 70% तक घटा दी हैं। 15 सफल अभियान, 'हनुमान प्रोजेक्ट' के तहत 93 रिस्पॉन्स गाड़ियाँ और 200 से अधिक जानवर बचाए गए — पवन कल्याण ने विश्व हाथी दिवस पर यह जानकारी दी।

मुख्य बातें

कुम्की हाथियों की तैनाती से आंध्र प्रदेश के जंगल-सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव मृत्यु के मामलों में 70 प्रतिशत की कमी आई।
कर्नाटक सरकार की सहायता से लाए गए 4 कुम्की हाथियों ने 15 अभियानों में भाग लिया।
'जयंत' नामक स्वयं-प्रशिक्षित हाथी पार्वतीपुरम मन्यम में तैनात; राज्य का लक्ष्य प्रतिवर्ष 2 कुम्की प्रशिक्षित करना।
मार्च 2026 में शुरू 'हनुमान प्रोजेक्ट' के तहत 93 रिस्पॉन्स गाड़ियाँ , 7 वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस तैनात; 200+ जानवर बचाए गए।
2014 से देश में हाथी संरक्षण केंद्रों की संख्या 26 से बढ़कर 33 हुई।
चित्तूर और पार्वतीपुरम मन्यम में 132–142 हाथियों के झुंड पहले भारी नुकसान पहुँचाते थे।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वन व पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने 13 अगस्त 2026 को विशाखापत्तनम में आयोजित विश्व हाथी दिवस के राष्ट्रीय समारोह में घोषणा की कि प्रशिक्षित 'कुम्की' हाथियों की तैनाती से जंगल-सीमावर्ती क्षेत्रों में इंसानों की मौत के मामलों में 70 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। साथ ही, हाथी-मानव टकराव के प्रबंधन से फसल नुकसान में भी महत्वपूर्ण गिरावट आई है।

कुम्की हाथियों की भूमिका और उनकी तैनाती

कर्नाटक सरकार के सहयोग से लाए गए चार कुम्की हाथियों को विशेष रूप से मानव-वन्यजीव टकराव रोकने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। पवन कल्याण ने बताया कि इन हाथियों ने उपद्रवी जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए अब तक 15 अभियानों में भाग लिया है, जिनके परिणाम संबंधित क्षेत्रों में सकारात्मक रहे हैं।

उन्होंने कर्नाटक सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, "यह सिर्फ दो राज्यों के बीच सहयोग नहीं है, यह लोगों, प्रकृति और वन्यजीवों की भलाई के लिए मिलकर किया गया प्रयास है।"

समस्या की गंभीरता: चित्तूर और पार्वतीपुरम में तबाही

पवन कल्याण ने बताया कि चित्तूर जिले के पलमनेर क्षेत्र और पार्वतीपुरम मन्यम जिले में 132 से 142 हाथियों के झुंड भारी तबाही मचाते थे। ये झुंड फसलों को बर्बाद करते और रास्ते में आने वाले लोगों पर हमला करते थे, जिससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल था। उन्होंने स्वीकार किया कि वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी प्राथमिकता इन्हीं समस्याओं का समाधान करना था।

आंध्र प्रदेश की स्वयं की कुम्की तैयारी

राज्य सरकार ने अब अपने स्वयं के कुम्की हाथियों को प्रशिक्षित करने की पहल शुरू कर दी है। 'जयंत' नामक एक प्रशिक्षित हाथी पहले से ही पार्वतीपुरम मन्यम क्षेत्र में तैनात है। राज्य की योजना प्रतिवर्ष दो कुम्की हाथियों को प्रशिक्षित करने की है, जिससे दीर्घकालिक क्षमता निर्माण हो सके।

हनुमान प्रोजेक्ट: टेक्नोलॉजी आधारित समाधान

मार्च 2026 में शुरू किए गए 'हनुमान प्रोजेक्ट' को वन्यजीव सुरक्षा और मानव-वन्यजीव टकराव की रोकथाम के लिए तैयार किया गया है। यह एक व्यापक तकनीक-आधारित प्रणाली है जो त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर निर्भर करती है।

पवन कल्याण के अनुसार, इस परियोजना के तहत 93 रिस्पॉन्स गाड़ियाँ और 7 वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। अब तक 200 से अधिक जंगली जानवरों को बचाया जा चुका है और 30 से अधिक जानवरों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है।

हाथी संरक्षण और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

पवन कल्याण ने कहा कि हाथी पारिस्थितिक संतुलन में सेतु की भूमिका निभाते हैं और देश की वन्यजीव विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से देश में हाथी संरक्षण केंद्रों की संख्या 26 से बढ़कर 33 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी इस अवसर पर संबोधन दिया।

उपमुख्यमंत्री ने समापन में कहा, "हमारा मकसद वन्यजीवों को लोगों से अलग करना नहीं है — असली कामयाबी ऐसे भविष्य को बनाने में है जहाँ लोग और वन्यजीव एक ही जगह पर सुरक्षित रूप से साथ-साथ रह सकें।" यह बयान राज्य की दीर्घकालिक सह-अस्तित्व नीति की दिशा तय करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह स्व-घोषित है — स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। असली सवाल यह है कि क्या चार उधार के हाथियों और एक नवजात प्रोजेक्ट पर टिकी यह रणनीति 132-142 हाथियों के झुंडों के दीर्घकालिक दबाव को झेल पाएगी। 'हनुमान प्रोजेक्ट' की तकनीकी संरचना और 'जयंत' जैसे स्थानीय प्रशिक्षण की पहल सही दिशा में है, पर प्रतिवर्ष केवल दो हाथियों के प्रशिक्षण की गति समस्या की विशालता के सामने अपर्याप्त लग सकती है। जब तक समुदाय-स्तरीय भागीदारी और वन-बफर क्षेत्र प्रबंधन को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, ये उपाय राहत तो देंगे, स्थायी समाधान नहीं।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुम्की हाथी क्या होते हैं और इन्हें क्यों तैनात किया जाता है?
कुम्की हाथी वे प्रशिक्षित पालतू हाथी होते हैं जिन्हें जंगली और उपद्रवी हाथियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है। आंध्र प्रदेश में इन्हें मानव-वन्यजीव टकराव रोकने और फसल सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।
आंध्र प्रदेश में कुम्की हाथियों की तैनाती से क्या नतीजे मिले हैं?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के अनुसार, कुम्की हाथियों ने 15 अभियानों में भाग लिया और जंगल-सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही फसल नुकसान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
हनुमान प्रोजेक्ट क्या है और यह कब शुरू हुआ?
हनुमान प्रोजेक्ट मार्च 2026 में शुरू की गई आंध्र प्रदेश सरकार की तकनीक-आधारित वन्यजीव प्रबंधन प्रणाली है। इसके तहत 93 रिस्पॉन्स गाड़ियाँ और 7 वाइल्डलाइफ एम्बुलेंस तैनात हैं, और अब तक 200 से अधिक जानवर बचाए जा चुके हैं।
आंध्र प्रदेश को कुम्की हाथी कहाँ से मिले और राज्य की आगे की योजना क्या है?
चार कुम्की हाथी कर्नाटक सरकार के सहयोग से लाए गए। अब राज्य अपने स्वयं के हाथी प्रशिक्षित कर रहा है — 'जयंत' नामक हाथी पार्वतीपुरम मन्यम में तैनात है और राज्य की योजना प्रतिवर्ष दो कुम्की हाथी प्रशिक्षित करने की है।
चित्तूर और पार्वतीपुरम में हाथियों की समस्या कितनी गंभीर थी?
पवन कल्याण के अनुसार, चित्तूर के पलमनेर क्षेत्र और पार्वतीपुरम मन्यम जिले में 132 से 142 हाथियों के झुंड फसलें बर्बाद करते और लोगों पर हमला करते थे, जिससे ग्रामीण इलाकों में व्यापक दहशत थी।
राष्ट्र प्रेस
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