इडुक्की में जंगली हाथी के हमले में बागान श्रमिक की मौत, मानव-वन्यजीव संघर्ष फिर चर्चा में
सारांश
मुख्य बातें
केरल के इडुक्की जिले के पूपपारा स्थित थलक्कुलम एस्टेट में 27 अगस्त को एक जंगली हाथी ने 62 वर्षीय बागान श्रमिक ओचा थेवर पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक तमिलनाडु के बोडिनायकनूर के निवासी थे और एस्टेट के 12 एकड़ क्षेत्र में काम कर रहे थे।
घटनाक्रम
देविकुलम रेंज के वन अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह से ही इलाके में जंगली हाथियों का एक झुंड मौजूद था। हाथी ने ओचा थेवर पर हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनका शव इडुक्की मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया।
डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सहित वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए। वन विभाग की रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से वापस जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास करती है, लेकिन हाथी बार-बार लौट आते हैं।
मुन्नार में भी हाथी से टकराव
यह घटना ऐसे समय में हुई जब पास के मुन्नार क्षेत्र में भी एक अलग घटना सामने आई। बुधवार को मुन्नार शहर के माउंट कार्मेल चर्च के निकट एक युवक का जंगली हाथी से आमना-सामना हो गया। हाथी अचानक उस इलाके में आ गया और युवक सीधे उसके रास्ते में आ गया। हालाँकि, युवक समय रहते भाग निकला और सुरक्षित बच गया।
हाथी ने उस इलाके में फसलों को भी भारी नुकसान पहुँचाया। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
आम जनता और श्रमिकों पर असर
मुन्नार-पूपपारा क्षेत्र में जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय निवासियों और बागान श्रमिकों की चिंताएँ गहरी कर दी हैं। वन क्षेत्रों की सीमा पर काम करने वाले लोग लगातार हमलों और फसल नुकसान के खतरे में जीवन गुजार रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ऊँचाई वाले हाई रेंज क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और मुआवजा नीति
केरल सरकार ने हाल के वर्षों में बार-बार हुई ऐसी घटनाओं के मद्देनजर एक मानक प्रोटोकॉल अपनाया है, जिसके तहत हमले में मारे गए या घायल हुए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाता है। वन विभाग हाथियों को जंगल की ओर लौटाने के प्रयास जारी रखे हुए है, परंतु बार-बार होने वाली घुसपैठ दीर्घकालिक समाधान की माँग को और तीव्र कर रही है।
क्या होगा आगे
विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्रों के सिकुड़ने और हाथियों के प्राकृतिक आवास में बाधा आने से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएँ आगे भी जारी रह सकती हैं। इडुक्की और मुन्नार क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक वन्यजीव प्रबंधन नीति और बागान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदमों की जरूरत बताई जा रही है।