त्रिपुरा में हाथी के हमले का शिकार हुई बुजुर्ग महिला, मुख्यमंत्री ने परिवार को सहायता का दिया आश्वासन
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री मणिक साहा ने परिवार को सहायता का आश्वासन दिया।
- 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला हाथी के हमले का शिकार हुई।
- प्रशासन ने 4 लाख रुपये की सहायता दी।
- स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़का और वन विभाग के कार्यालय पर हमला किया गया।
- इस क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की समस्या बढ़ती जा रही है।
अगरतला, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा ने शनिवार को खोवाई जिले के तेलियामुरा उपखंड के जुंबारी गांव में एक हाथी के हमले में मारी गई एक बुजुर्ग महिला के परिवार से मुलाकात की और हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
यह दुखद घटना शनिवार तड़के तब हुई, जब 70 वर्षीय मणिमाला देबबर्मा अपने घर के आंगन में थीं। अचानक एक जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
मुख्यमंत्री माणिक साहा चुनावी रैली के लिए चकमाघाट जाने से पहले पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से बातचीत की और संवेदना प्रकट करते हुए कहा, “यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मैं स्थिति का जायजा लेने स्वयं आया हूँ। सरकार की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी।”
प्रशासन ने पीड़ित परिवार को राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से 4 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता प्रदान की है, जबकि वन विभाग ने अतिरिक्त 1 लाख रुपये की मदद की है।
इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ संबित पात्रा और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मृतका के बेटे अजीत देबबर्मा के अनुसार, हाथी ने अचानक हमला कर उनकी मां को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद क्षेत्र में गुस्सा भड़क गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग के कार्यालय पर हमला कर दिया। इस दौरान सब-डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (एसडीएफओ) घायल हो गए, जबकि सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को मौके से भागना पड़ा। एक पत्रकार पर भी हमला किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी स्थिति को संभालने में निष्क्रिय रहे।
अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में केवल खोवाई जिले में ही हाथियों के हमलों में कम से कम पांच लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी तथा मानव द्वारा अतिक्रमण के कारण हाथी अक्सर जनसंख्या वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते हैं।