19 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार में विकास की बजाय बर्बादी का दौर: एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार में विकास की बजाय बर्बादी का दौर: एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान

सारांश

पटना में एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने बिहार सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की है, यह कहते हुए कि राज्य विकास की बजाय बर्बादी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के संकट की ओर भी इशारा किया।

मुख्य बातें

बिहार में तरक्की की बजाय बर्बादी का दौर जारी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट से जनता प्रभावित हो रही है।
महिला आरक्षण विधेयक का सही समय पर प्रस्ताव नहीं किया गया।
यूसीसी विशेष वर्ग के लोगों को टारगेट कर रहा है।
राज्य की नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।

पटना, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमौर से एआईएमआईएम के विधायक और बिहार विधानसभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार विकास की बजाय बर्बादी की ओर बढ़ रहा है।

अख्तरुल ईमान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "बिहार में शिक्षा प्रणाली पिछले कई वर्षों से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। स्वास्थ्य सेवाएं भी संकट में हैं। सरकार का खजाना खाली होता जा रहा है। विकास संबंधी सभी योजनाएं ठप हैं। यह पहली बार है कि बजट में वृद्धि की गई है, लेकिन विकास परियोजनाओं के लिए आवंटन घटा दिया गया है। बिहार तरक्की की ओर नहीं, बल्कि बर्बादी के रास्ते पर है।"

महिला आरक्षण विधेयक पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "जब 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, सांसद अपनी पार्टियों के लिए रैलियां करेंगे या संसद की कार्यवाही में शामिल होंगे। यह विधेयक लाने का सही समय नहीं था। इसे या तो पहले लाना चाहिए था या चुनाव के बाद संसद में चर्चा के लिए रखना चाहिए था। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है।"

इस बीच, उन्होंने गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के निर्णय का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से विशेष वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "यह विधेयक गैर कानूनी है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। समान का मतलब सभी के लिए समान नियम होते हैं। जब अलग-अलग नियम बनाए गए हैं, तब यह समान नहीं होता। यूसीसी के नाम पर विशेष वर्ग को टारगेट किया जा रहा है।"

ज्ञात हो कि हाल ही में गुजरात विधानसभा ने कई घंटों की बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक को पारित किया था। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदन में इस बिल को पेश किया था। इसके परिणामस्वरूप, उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा राज्य बना है जिसने यूसीसी को अपनाया। उत्तराखंड पहला राज्य था जिसने फरवरी 2024 में यूसीसी बिल को पारित किया।

'गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' कानून पूरे राज्य में लागू होगा। हालांकि, विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कोड अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है ताकि राज्य की जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में शिक्षा व्यवस्था कितनी गंभीर है?
विधायक अख्तरुल ईमान के अनुसार, बिहार में शिक्षा व्यवस्था पिछले कई वर्षों से चौपट हो चुकी है।
महिला आरक्षण विधेयक पर अख्तरुल ईमान का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि यह विधेयक लाने का सही समय नहीं था और इसे पहले लाना चाहिए था।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के बारे में उनका क्या कहना है?
उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी के नाम पर विशेष वर्ग के लोगों को टारगेट किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले