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पार्वतीपुरम-मान्यम में मानव-हाथी संघर्ष रोकेंगे कुमकी हाथी जयंत और अभिमन्यु: पवन कल्याण

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पार्वतीपुरम-मान्यम में मानव-हाथी संघर्ष रोकेंगे कुमकी हाथी जयंत और अभिमन्यु: पवन कल्याण

सारांश

आंध्र प्रदेश में मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए पवन कल्याण ने दो प्रशिक्षित कुमकी हाथी — जयंत और अभिमन्यु — पार्वतीपुरम-मान्यम जिले के गुचिमी कैंप भेजे। 2017 से इस इलाके में 13 मौतें और 3,600 एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है।

मुख्य बातें

पवन कल्याण ने 24 जुलाई को कुमकी हाथी जयंत और अभिमन्यु को पार्वतीपुरम-मान्यम के गुचिमी कैंप के लिए रवाना किया।
दोनों हाथी चित्तूर जिले के मुसलामाडुगु हाथी प्रशिक्षण केंद्र से भेजे गए हैं।
2017 से पार्वतीपुरम-मान्यम में हाथी हमलों में 13 लोगों की मौत और करीब 3,600 एकड़ फसल नष्ट।
फिलहाल क्षेत्र में दो झुंड सक्रिय — विजयनगरम में 8 हाथी , पार्वतीपुरम-मान्यम में 4 हाथी ।
पिछले साल कर्नाटक से 4 कुमकी हाथी लाए गए थे; यह तैनाती उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने शुक्रवार, 24 जुलाई को घोषणा की कि दो प्रशिक्षित कुमकी हाथी — जयंत और अभिमन्युपार्वतीपुरम-मान्यम जिले में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ये दोनों हाथी चित्तूर जिले के पलमनेर स्थित मुसलामाडुगु हाथी प्रशिक्षण केंद्र से गुचिमी कैंप के लिए रवाना किए गए हैं।

मंगलगिरि में हुआ स्वागत, गुचिमी कैंप के लिए रवानगी

पवन कल्याण ने अपने आधिकारिक आवास मंगलगिरि में जयंत और अभिमन्यु का पुष्पवर्षा और भोजन खिलाकर भव्य स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रा के दौरान दोनों हाथियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि गुचिमी कैंप पहुँचने पर विशेषज्ञों की देखरेख में हाथियों को वहाँ के वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

क्यों ज़रूरी हैं कुमकी हाथी

कुमकी हाथी विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं और वन्यजीव प्रबंधन में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये जंगली हाथियों को सही दिशा में मोड़ने, उन्हें नियंत्रित रखने और आवश्यकता पड़ने पर बचाव अभियान चलाने में सक्षम होते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जयंत और अभिमन्यु पहले पलमनेर और चित्तूर क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग ले चुके हैं और जंगली हाथियों के झुंड को सुरक्षित रूप से वन में वापस पहुँचाने में सफल रहे हैं।

पार्वतीपुरम-मान्यम में संकट की स्थिति

ओडिशा सीमा से सटे पार्वतीपुरम-मान्यम जिले में जंगली हाथियों के झुंड बार-बार आदिवासी बस्तियों में घुस आते हैं, जिससे धान, केला, कोको, ऑयल पाम, गन्ना और सब्जियों की फसलें भारी नुकसान उठाती हैं। साल 2017 से अब तक इस इलाके में हाथियों के हमलों में कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें दो हाथी ट्रैकर भी शामिल हैं। इसके अलावा, करीब 3,600 एकड़ में फैली फसलें भी नष्ट हो चुकी हैं। फिलहाल, विजयनगरम जिले के बोब्बिली मंडल के कराडा गाँव के पास आठ हाथियों का एक झुंड और पार्वतीपुरम-मान्यम जिले के भामिनी मंडल के घनासारा गाँव के पास चार हाथियों का एक अलग झुंड सक्रिय है।

सरकार की व्यापक रणनीति

पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि कुमकी हाथियों की तैनाती गठबंधन सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक और मानवीय तरीकों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की फसलों की रक्षा करना और वन्यजीवों का संरक्षण करना है। गौरतलब है कि पिछले साल मई में आंध्र प्रदेश सरकार कर्नाटक से चार कुमकी हाथी लाई थी। इससे पहले, नवंबर में पवन कल्याण ने चित्तूर जिले में कुमकी हाथी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया था, जो इस दिशा में राज्य सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आगे की राह

गुचिमी कैंप में जयंत और अभिमन्यु की तैनाती के बाद विशेषज्ञ इन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाएंगे। पार्वतीपुरम और सीथांपेटा एजेंसी क्षेत्रों के आदिवासी समुदायों को उम्मीद है कि इन प्रशिक्षित हाथियों की मौजूदगी से जंगली हाथियों की घुसपैठ में कमी आएगी और उनकी जान-माल की सुरक्षा बेहतर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल समस्या का दीर्घकालिक समाधान नहीं है — ओडिशा सीमा पर वन क्षेत्र का सिकुड़ना और हाथियों के परंपरागत गलियारों पर अतिक्रमण असली चुनौती है। 2017 से 13 मौतें और 3,600 एकड़ फसल नुकसान यह बताता है कि पिछले हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं रहे। केवल कुमकी हाथियों की संख्या बढ़ाने से स्थायी राहत नहीं मिलेगी; आदिवासी समुदायों के लिए मुआवज़ा तंत्र की पारदर्शिता और हाथी गलियारों की कानूनी सुरक्षा उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमकी हाथी क्या होते हैं और इनका उपयोग क्यों किया जाता है?
कुमकी हाथी विशेष रूप से प्रशिक्षित पालतू हाथी होते हैं जिनका उपयोग वन्यजीव प्रबंधन में जंगली हाथियों को नियंत्रित करने, सही दिशा में मोड़ने और बचाव अभियानों में किया जाता है। ये मानव-हाथी संघर्ष को कम करने का एक वैज्ञानिक और मानवीय तरीका है।
जयंत और अभिमन्यु को कहाँ से कहाँ भेजा गया है?
इन दोनों कुमकी हाथियों को चित्तूर जिले के पलमनेर स्थित मुसलामाडुगु हाथी प्रशिक्षण केंद्र से पार्वतीपुरम-मान्यम जिले के गुचिमी कैंप भेजा गया है। वहाँ पहुँचने पर विशेषज्ञ इन्हें स्थानीय वातावरण के अनुकूल बनाएंगे।
पार्वतीपुरम-मान्यम में मानव-हाथी संघर्ष कितना गंभीर है?
2017 से अब तक इस इलाके में हाथी हमलों में कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें दो हाथी ट्रैकर भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 3,600 एकड़ में फैली फसलें नष्ट हो चुकी हैं। ओडिशा सीमा से जंगली हाथियों के झुंड बार-बार इस क्षेत्र में घुस आते हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार ने इससे पहले इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए थे?
पिछले साल मई में आंध्र प्रदेश सरकार कर्नाटक से चार कुमकी हाथी लाई थी। इससे पहले नवंबर में पवन कल्याण ने चित्तूर जिले में कुमकी हाथी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया था, जहाँ से अब जयंत और अभिमन्यु को प्रशिक्षित कर भेजा गया है।
फिलहाल इस क्षेत्र में जंगली हाथियों की स्थिति क्या है?
विजयनगरम जिले के बोब्बिली मंडल के कराडा गाँव के पास आठ हाथियों का एक झुंड और पार्वतीपुरम-मान्यम जिले के भामिनी मंडल के घनासारा गाँव के पास चार हाथियों का एक अलग झुंड सक्रिय है। पार्वतीपुरम और सीथांपेटा एजेंसी क्षेत्रों के आदिवासी समुदाय इनसे सबसे अधिक प्रभावित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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