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थेक्कम्पट्टी हाथी पुनर्वास शिविर विवाद: किसानों ने तमिलनाडु सरकार से स्थानांतरण की मांग की

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थेक्कम्पट्टी हाथी पुनर्वास शिविर विवाद: किसानों ने तमिलनाडु सरकार से स्थानांतरण की मांग की

सारांश

कोयंबटूर के थेक्कम्पट्टी किसानों ने ₹3 करोड़ के हाथी पुनर्वास शिविर का विरोध किया है — उनका तर्क है कि भवानी नदी किनारे यह स्थल हाथी कॉरिडोर पर है, जिससे जंगली हाथी बस्तियों और सूखाग्रस्त खेतों में घुस सकते हैं। पाँच साल बाद शिविर की वापसी की घोषणा ने स्थानीय संघर्ष को नया आयाम दे दिया है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने थेक्कम्पट्टी में हाथी पुनर्वास शिविर के पुनः संचालन के लिए ₹3 करोड़ आवंटित किए हैं।
यह शिविर पिछले पाँच वर्षों से इस स्थल पर आयोजित नहीं हुआ था।
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित स्थान जंगली हाथियों के माइग्रेशन कॉरिडोर पर स्थित है।
प्रभावित होने की आशंका वाले गाँवों में थेक्कम्पट्टी, दासानूर, नेल्लीथुराई और किट्टमपालयम शामिल हैं।
शिविर के ब्रीडिंग सीजन में होने से जंगली नर हाथियों के आने का खतरा और बढ़ने की आशंका है।
किसानों ने सरकार से वैकल्पिक स्थान की पहचान और पारिस्थितिक सुरक्षा जाँच की माँग की है।

कोयंबटूर ज़िले के मेट्टुपालयम के निकट थेक्कम्पट्टी गांव के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से भवानी नदी के किनारे प्रस्तावित हाथी पुनर्वास शिविर ('रिजूवनेशन कैंप') को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। किसानों की चेतावनी है कि सूखे से पहले से जूझ रहे इस क्षेत्र में शिविर के पुनः संचालन से मानव-हाथी संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

हाल ही में तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री ने राज्य विधानसभा में घोषणा की कि थेक्कम्पट्टी में इस शिविर को पुनः आरंभ करने के लिए ₹3 करोड़ आवंटित किए गए हैं। मंदिरों और मठों के हाथियों के लिए आयोजित होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम पिछले पाँच वर्षों से इस स्थल पर नहीं हो पाया है।

थेक्कम्पट्टी और नेल्लीथुराई पंचायतों के किसानों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि चुना गया स्थान जंगली हाथियों के पारंपरिक प्रवासन मार्ग (माइग्रेशन कॉरिडोर) पर स्थित है। यह क्षेत्र उन जलस्रोतों के निकट है जहाँ वन्य हाथियों के झुंड नियमित रूप से आते-जाते हैं।

किसानों की आशंकाएँ

किसानों का कहना है कि शिविर से जुड़ी निर्माण गतिविधियाँ, अस्थायी बाड़बंदी और बढ़ती मानवीय उपस्थिति हाथियों के स्थापित मार्गों में बाधा उत्पन्न कर सकती है और उनके जलस्रोतों तक पहुँच को कठिन बना सकती है। इससे जंगली हाथी वैकल्पिक रास्तों की तलाश में थेक्कम्पट्टी, दासानूर, एनजी पुदुर, आरजी पुदुर, थोट्टादासानूर, नेल्लीथुराई और किट्टमपालयम जैसी बस्तियों और खेतों में घुस सकते हैं।

एक अतिरिक्त चिंता यह है कि शिविर के प्रजनन काल (ब्रीडिंग सीजन) के दौरान आयोजित होने की संभावना है और इसमें मुख्यतः मंदिर की मादा हाथियों को रखा जाएगा। किसानों को आशंका है कि मादा हाथियों की मौजूदगी में जंगली नर हाथी शिविर और आसपास के खेतों में आ सकते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।

सूखे और फसल नुकसान की दोहरी मार

प्रस्तावित स्थल के आसपास के खेत पहले से ही सूखे की वजह से बुरी तरह प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही बढ़ने से फसलों को और नुकसान होगा, जबकि क्षतिपूर्ति अक्सर देर से और अपर्याप्त मात्रा में मिलती है। इन इलाकों के किसान पहले से ही वन्य हाथियों द्वारा फसल बर्बादी और निवासियों पर हमलों की शिकायत करते आए हैं।

यातायात की दृष्टि से भी चिंताएँ हैं — शिविर के कारण थेक्कम्पट्टी-वनपाथिराकाली अम्मन मंदिर रोड पर दर्शनार्थियों, वाहनों और अस्थायी दुकानदारों की भीड़ से जाम की स्थिति बन सकती है, जिससे स्थानीय निवासियों की आवाजाही और आपातकालीन सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं। गौरतलब है कि पूर्व में भी जंगली हाथियों के शिविर में घुसने और वहाँ बंधे हाथियों तथा महावतों से सामना होने की घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं।

किसानों की माँग

किसानों ने तमिलनाडु सरकार और वन विभाग से आग्रह किया है कि शिविर को पुनः शुरू करने से पहले विस्तृत पारिस्थितिक और सुरक्षा संबंधी जाँच की जाए। साथ ही उन्होंने माँग की है कि हाथी कॉरिडोर, आबादी वाले गाँवों और कृषि भूमि से दूर किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान की जाए।

आगे क्या

अभी तक तमिलनाडु सरकार या वन विभाग की ओर से किसानों की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और वन्यजीव प्रबंधन नीति पर बहस तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रभावित पंचायतों से कोई परामर्श नहीं हुआ — यह प्रक्रियागत चूक है। जब क्षेत्र पहले से सूखे और मानव-हाथी संघर्ष की दोहरी मार झेल रहा हो, तब बिना पारिस्थितिक आकलन के शिविर स्थल तय करना नीतिगत लापरवाही का संकेत है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थेक्कम्पट्टी हाथी पुनर्वास शिविर क्या है?
यह मंदिरों और मठों के हाथियों के लिए आयोजित होने वाला एक वार्षिक पुनर्वास शिविर है, जिसे तमिलनाडु सरकार ने कोयंबटूर ज़िले के थेक्कम्पट्टी में भवानी नदी के किनारे पुनः शुरू करने के लिए ₹3 करोड़ आवंटित किए हैं। यह शिविर पिछले पाँच वर्षों से इस स्थल पर नहीं हुआ था।
किसान इस शिविर का विरोध क्यों कर रहे हैं?
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित स्थान जंगली हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन कॉरिडोर पर है और वहाँ वे जलस्रोत भी हैं जहाँ हाथियों के झुंड नियमित रूप से आते हैं। उन्हें आशंका है कि शिविर की गतिविधियों से हाथियों के रास्ते बाधित होंगे और वे बस्तियों व खेतों में घुस सकते हैं।
कौन-से गाँव इससे प्रभावित हो सकते हैं?
प्रभावित होने की आशंका वाले गाँवों में थेक्कम्पट्टी, दासानूर, एनजी पुदुर, आरजी पुदुर, थोट्टादासानूर, नेल्लीथुराई और किट्टमपालयम शामिल हैं। इन इलाकों के किसान पहले से ही जंगली हाथियों द्वारा फसल नुकसान और हमलों की शिकायत करते रहे हैं।
ब्रीडिंग सीजन में शिविर से क्या खतरा है?
शिविर के प्रजनन काल (ब्रीडिंग सीजन) के दौरान आयोजित होने की संभावना है और इसमें मुख्यतः मंदिर की मादा हाथियों को रखा जाएगा। किसानों को डर है कि मादा हाथियों की मौजूदगी में जंगली नर हाथी शिविर और आसपास के खेतों में आ सकते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति और खतरनाक हो जाएगी।
किसानों ने सरकार से क्या माँग की है?
किसानों ने तमिलनाडु सरकार और वन विभाग से माँग की है कि शिविर पुनः शुरू करने से पहले विस्तृत पारिस्थितिक और सुरक्षा जाँच की जाए। साथ ही उन्होंने हाथी कॉरिडोर, आबादी वाले गाँवों और कृषि भूमि से दूर किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान करने का आग्रह किया है।
राष्ट्र प्रेस
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