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कोयंबटूर का चाडिवायल हाथी शिविर बनेगा इको टूरिज्म केंद्र, ₹8 करोड़ की लागत से हुआ तैयार

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कोयंबटूर का चाडिवायल हाथी शिविर बनेगा इको टूरिज्म केंद्र, ₹8 करोड़ की लागत से हुआ तैयार

सारांश

कोयंबटूर के सिरुवानी की तलहटी में ₹8 करोड़ की लागत से बना चाडिवायल हाथी शिविर जल्द पर्यटकों के लिए खुल सकता है। 18 हाथियों की क्षमता वाला यह केंद्र इको टूरिज्म और मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन दोनों का अनूठा संगम है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु वन विभाग कोयंबटूर के चाडिवायल हाथी शिविर को इको टूरिज्म केंद्र के रूप में खोलने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
शिविर ₹8 करोड़ की लागत से निर्मित है और एक साथ 18 हाथियों को रखने में सक्षम है।
सप्ताहांत में 2,000 और सप्ताह के अन्य दिनों में 500 पर्यटक पास के कोवाई कुट्रालम जलप्रपात पहुंचते हैं।
शिविर में फिलहाल चार हाथी हैं — मुथु , कावेरी , जॉन और सुमंगला ।
अनामलाई टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डी.
वेंकटेशन के अनुसार पर्यटकों के प्रवेश की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

तमिलनाडु का वन विभाग कोयंबटूर जिले के सिरुवानी की तलहटी में स्थित चाडिवायल हाथी शिविर को जल्द ही पर्यटकों के लिए खोलने की दिशा में कार्य कर रहा है। विभाग एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसके स्वीकृत होने पर पर्यटक नियंत्रित वातावरण में प्रशिक्षित हाथियों को भोजन करते और स्नान करते हुए देख सकेंगे। वन विभाग के अनुसार, यह शिविर कोयंबटूर में एक प्रमुख इको टूरिज्म गंतव्य के रूप में उभर सकता है।

शिविर की विशेषताएं और अवसंरचना

करीब ₹8 करोड़ की लागत से निर्मित यह आधुनिक हाथी पुनर्वास एवं संघर्ष प्रबंधन केंद्र एक साथ 18 हाथियों को रखने में सक्षम है। शिविर में हाथियों के लिए शेड, महावतों के आवास, स्नान स्थल, प्राकृतिक तालाब, प्रशिक्षण के लिए क्राल (बाड़ा) तथा विशेष आहार तैयार करने की रसोई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस केंद्र का उद्घाटन तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उधयनिधि स्टालिन ने किया था।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यह शिविर लोकप्रिय कोवाई कुट्रालम जलप्रपात के मार्ग पर स्थित है। वन अधिकारियों के अनुसार, सप्ताहांत में लगभग 2,000 और सप्ताह के अन्य दिनों में करीब 500 पर्यटक कोवाई कुट्रालम पहुंचते हैं। ऐसे में हाथी शिविर के पर्यटकों के लिए खुलने से इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को और अधिक गति मिलने की संभावना है।

हाथियों की दिनचर्या और दर्शकों का समय

वन अधिकारी पर्यटकों के लिए ऐसा समय निर्धारित करने पर विचार कर रहे हैं जिससे हाथियों की दिनचर्या और उनके कल्याण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। वर्तमान में हाथियों को सुबह 8:30 बजे और शाम 5:30 बजे भोजन कराया जाता है, जबकि कोवाई कुट्रालम का समय सुबह 10 बजे से शाम 4:30 बजे तक है। अनामलाई टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड डायरेक्टर डी. वेंकटेशन ने बताया कि वन अधिकारी और पशु चिकित्सक मिलकर नियंत्रित तरीके से पर्यटकों के प्रवेश की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। यह व्यवस्था थेप्पाकाडु हाथी शिविर (मुदुमलाई) और कोझिकामुथी हाथी शिविर (अनामलाई टाइगर रिजर्व) की तर्ज पर होगी।

शिविर के हाथी और उनकी कहानियां

फिलहाल चाडिवायल हाथी शिविर में चार हाथी हैं। 24 वर्षीय नर हाथी 'मुथु' — जो पहले पोलाची क्षेत्र में बार-बार आबादी वाले इलाकों में पहुंचने के कारण 'अरिसी राजा' के नाम से प्रसिद्ध हो गया था — को कोझिकामुथी हाथी शिविर से यहां लाया गया है। पुनर्वास के बाद अब उसे कुमकी हाथी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि भविष्य में वह जंगली हाथियों को खेतों और रिहायशी इलाकों से दूर भगाने के अभियानों में सहयोग कर सके।

17 वर्षीय मादा हाथी 'कावेरी' को देखभाल के उद्देश्य से यहां रखा गया है और उसे मानव-हाथी संघर्ष अभियानों में शामिल नहीं किया जाएगा। 35 वर्षीय नर हाथी 'जॉन', जिसे थेप्पाकाडु से लाया गया है, पहले कोयंबटूर के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष नियंत्रण में अहम भूमिका निभा चुका है। 'सुमंगला', जिसे वर्ष 1988 में अनाथ अवस्था में बचाया गया था, पैर की चोट से उबरने के बाद मुदुमलाई से यहां स्थानांतरित की गई है।

संरक्षण और जागरूकता का लक्ष्य

वन विभाग का मानना है कि यह शिविर केवल पर्यटन का केंद्र नहीं बनेगा, बल्कि आगंतुकों को हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के बारे में जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पहल तमिलनाडु में इको टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण के समन्वय की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा पर्यटन और पशु-कल्याण के बीच संतुलन बनाने में होगी। थेप्पाकाडु जैसे स्थापित शिविरों में भी पर्यटक दबाव और हाथियों की मनोवैज्ञानिक सेहत को लेकर सवाल उठते रहे हैं। 'मुथु' जैसे संघर्षग्रस्त हाथी को कुमकी के रूप में प्रशिक्षित करना एक अभिनव कदम है, पर यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि पर्यटन की भीड़ उसके पुनर्वास की प्रक्रिया को बाधित न करे। वन विभाग को पर्यटक संख्या की स्पष्ट सीमा और स्वतंत्र पशु-कल्याण निगरानी का ढांचा सार्वजनिक करना चाहिए।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चाडिवायल हाथी शिविर कहां स्थित है और यह क्यों खास है?
चाडिवायल हाथी शिविर तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में सिरुवानी की तलहटी में स्थित है। यह ₹8 करोड़ की लागत से बना आधुनिक हाथी पुनर्वास एवं संघर्ष प्रबंधन केंद्र है, जो लोकप्रिय कोवाई कुट्रालम जलप्रपात के मार्ग पर है।
चाडिवायल हाथी शिविर में पर्यटक कब से जा सकेंगे?
वन विभाग अभी प्रस्ताव तैयार कर रहा है और प्रवेश की रूपरेखा पर विचार चल रहा है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद ही पर्यटकों के लिए आधिकारिक समय और व्यवस्था की घोषणा होगी।
शिविर में कौन-कौन से हाथी हैं?
शिविर में फिलहाल चार हाथी हैं — 24 वर्षीय नर 'मुथु' (जिसे 'अरिसी राजा' भी कहते हैं), 17 वर्षीय मादा 'कावेरी', 35 वर्षीय नर 'जॉन' और 1988 में बचाई गई 'सुमंगला'। इनमें से मुथु को कुमकी हाथी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इको टूरिज्म से हाथियों के कल्याण पर क्या असर पड़ेगा?
वन अधिकारी और पशु चिकित्सक ऐसा समय निर्धारित कर रहे हैं जिससे हाथियों की दिनचर्या प्रभावित न हो। यह व्यवस्था थेप्पाकाडु और कोझिकामुथी शिविरों की तर्ज पर होगी, जहां निर्धारित समय-सीमा में ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता है।
यह शिविर मानव-हाथी संघर्ष से कैसे जुड़ा है?
शिविर का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन भी है। यहां प्रशिक्षित कुमकी हाथी भविष्य में कोयंबटूर जिले में जंगली हाथियों को खेतों और रिहायशी इलाकों से दूर भगाने में सहायता करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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