11 अगस्त 2026
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हासन के भुवनेश्वरी हाथी झुंड में स्वदेशी रेडियो कॉलर, इंसान-हाथी टकराव रोकने की कोशिश

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हासन के भुवनेश्वरी हाथी झुंड में स्वदेशी रेडियो कॉलर, इंसान-हाथी टकराव रोकने की कोशिश

सारांश

कर्नाटक के हासन जिले में वन विभाग ने भुवनेश्वरी हाथी झुंड के एक हाथी पर स्वदेशी रेडियो कॉलर सफलतापूर्वक लगाया — तीन साल पहले विदेशी कॉलर की बैटरी फेल होने के बाद यह पहली सफल ट्रैकिंग पहल है। अब हासन में तीन झुंडों के हाथी निगरानी में हैं।

मुख्य बातें

हासन जिले की बेलूर रेंज में 10 अगस्त 2026 को भुवनेश्वरी हाथी झुंड के एक हाथी पर स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाया गया।
तीन साल पहले इसी झुंड पर लगाया गया विदेशी कॉलर बैटरी खत्म होने के बाद निष्क्रिय हो गया था।
ऑपरेशन में बांदीपुर , मैसूरु और भद्रा के पशु चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया; 5 कुम्की हाथियों की मदद ली गई।
हासन जिले में अब तीन अलग-अलग झुंडों के हाथियों पर स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाए जा चुके हैं।
रेडियो टेलीमेट्री डेटा से हाथियों के कॉरिडोर और घूमने के पैटर्न की पहचान होगी, जिससे इंसान-हाथी टकराव में कमी अपेक्षित है।

कर्नाटक के हासन जिले की बेलूर रेंज में 10 अगस्त 2026 को वन विभाग ने भुवनेश्वरी जंगली हाथी झुंड के एक हाथी पर सफलतापूर्वक स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाया। यह ऑपरेशन हाथियों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी और इंसान-हाथी टकराव को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

ऑपरेशन का विवरण

रेडियो-कॉलरिंग ऑपरेशन में बांदीपुर टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सा अधिकारी वसीम, मैसूरु सर्कल के आदर्श और भद्रा टाइगर रिजर्व के विनायक ने देखरेख की। हाथी को सुरक्षित रूप से पकड़ने के लिए नागरहोल एलिफेंट कैंप के 'कुम्की' हाथी एकलव्य और दुबारे एलिफेंट कैंप के प्रशांत, धनंजय, ईश्वर, लक्ष्मण और अजय्या को तैनात किया गया।

कॉलर लगाने से पहले हाथी की पूरी पशु चिकित्सा जाँच की गई और आवश्यक एहतियाती उपाय किए गए। इसके बाद जानवर को सकुशल जंगल में वापस छोड़ दिया गया।

पुराने कॉलर की विफलता और नई पहल

गौरतलब है कि तीन वर्ष पूर्व इसी झुंड के एक हाथी पर विदेश निर्मित रेडियो कॉलर लगाया गया था, जो बैटरी खत्म होने के बाद काम करना बंद हो गया था। उस विफलता के बाद वन विभाग हाथी की लोकेशन और गतिविधियों को रेडियो टेलीमेट्री के ज़रिए ट्रैक करने में असमर्थ हो गया था। इस बार स्वदेशी तकनीक का उपयोग उसी कमज़ोरी को दूर करने का प्रयास है।

निगरानी से क्या बदलेगा

नया रेडियो कॉलर वन अधिकारियों को हाथी के घूमने के पैटर्न, दायरे और महत्वपूर्ण कॉरिडोर की पहचान करने में सक्षम बनाएगा। जब भी हाथी किसी गाँव या इंसानी बस्ती के निकट आएगा, अधिकारी तेज़ी से एहतियाती कदम उठा सकेंगे — जिससे फसल नुकसान और जनहानि, दोनों का जोखिम घटेगा।

हासन जिले में व्यापक प्रयास

वन विभाग के अनुसार इस ऑपरेशन के साथ हासन जिले में तीन अलग-अलग जंगली हाथी झुंडों के हाथियों पर अब स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाए जा चुके हैं। विभाग उन इलाकों में रेडियो-कॉलरिंग और अन्य निगरानी तकनीकों का विस्तार कर रहा है जहाँ हाथी अक्सर इंसानी बस्तियों और कृषि भूमि के संपर्क में आते हैं। यह पहल कर्नाटक में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सुविचारित कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा डेटा के उपयोग में है — कॉलर लगाना पर्याप्त नहीं, उससे मिली रियल-टाइम जानकारी पर त्वरित क्षेत्रीय कार्रवाई ज़रूरी है। कर्नाटक में हर साल दर्जनों लोग और हाथी इंसान-वन्यजीव टकराव में जान गँवाते हैं, और अकेले ट्रैकिंग तकनीक बिना पर्याप्त मानव संसाधन और सामुदायिक अलर्ट सिस्टम के अधूरी है। तीन झुंडों तक पहुँचना शुरुआत है — लेकिन हासन और आसपास के जिलों में कितने और झुंड बिना किसी निगरानी के घूम रहे हैं, यह सवाल अनुत्तरित है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवनेश्वरी हाथी झुंड पर रेडियो कॉलर क्यों लगाया गया?
वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों को लगातार ट्रैक करने और इंसानी बस्तियों के निकट आने पर समय रहते एहतियाती कदम उठाने के लिए यह कॉलर लगाया। इससे इंसान-हाथी टकराव के जोखिम को कम करना मुख्य उद्देश्य है।
पहले लगाया गया रेडियो कॉलर क्यों विफल हो गया था?
तीन साल पहले इसी झुंड के एक हाथी पर विदेश निर्मित रेडियो कॉलर लगाया गया था, जो बैटरी खत्म होने के बाद निष्क्रिय हो गया। उसके बाद वन विभाग रेडियो टेलीमेट्री से हाथी की लोकेशन ट्रैक नहीं कर पा रहा था।
इस ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल था?
ऑपरेशन की देखरेख बांदीपुर टाइगर रिजर्व के वसीम, मैसूरु सर्कल के आदर्श और भद्रा टाइगर रिजर्व के विनायक ने की। हाथी को पकड़ने में नागरहोल एलिफेंट कैंप के एकलव्य और दुबारे एलिफेंट कैंप के पाँच कुम्की हाथियों की मदद ली गई।
हासन जिले में अब कितने हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाए जा चुके हैं?
वन विभाग के अनुसार इस ऑपरेशन के साथ हासन जिले में तीन अलग-अलग जंगली हाथी झुंडों के हाथियों पर स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाए जा चुके हैं।
रेडियो कॉलर से इंसान-हाथी टकराव कैसे कम होगा?
रेडियो टेलीमेट्री से हाथी के घूमने के पैटर्न, दायरे और कॉरिडोर की पहचान होगी। जब हाथी किसी गाँव या कृषि भूमि के निकट आएगा, वन अधिकारी तेज़ी से अलर्ट जारी कर सकेंगे और निवारक कदम उठा सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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