हासन के भुवनेश्वरी हाथी झुंड में स्वदेशी रेडियो कॉलर, इंसान-हाथी टकराव रोकने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के हासन जिले की बेलूर रेंज में 10 अगस्त 2026 को वन विभाग ने भुवनेश्वरी जंगली हाथी झुंड के एक हाथी पर सफलतापूर्वक स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाया। यह ऑपरेशन हाथियों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी और इंसान-हाथी टकराव को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ऑपरेशन का विवरण
रेडियो-कॉलरिंग ऑपरेशन में बांदीपुर टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सा अधिकारी वसीम, मैसूरु सर्कल के आदर्श और भद्रा टाइगर रिजर्व के विनायक ने देखरेख की। हाथी को सुरक्षित रूप से पकड़ने के लिए नागरहोल एलिफेंट कैंप के 'कुम्की' हाथी एकलव्य और दुबारे एलिफेंट कैंप के प्रशांत, धनंजय, ईश्वर, लक्ष्मण और अजय्या को तैनात किया गया।
कॉलर लगाने से पहले हाथी की पूरी पशु चिकित्सा जाँच की गई और आवश्यक एहतियाती उपाय किए गए। इसके बाद जानवर को सकुशल जंगल में वापस छोड़ दिया गया।
पुराने कॉलर की विफलता और नई पहल
गौरतलब है कि तीन वर्ष पूर्व इसी झुंड के एक हाथी पर विदेश निर्मित रेडियो कॉलर लगाया गया था, जो बैटरी खत्म होने के बाद काम करना बंद हो गया था। उस विफलता के बाद वन विभाग हाथी की लोकेशन और गतिविधियों को रेडियो टेलीमेट्री के ज़रिए ट्रैक करने में असमर्थ हो गया था। इस बार स्वदेशी तकनीक का उपयोग उसी कमज़ोरी को दूर करने का प्रयास है।
निगरानी से क्या बदलेगा
नया रेडियो कॉलर वन अधिकारियों को हाथी के घूमने के पैटर्न, दायरे और महत्वपूर्ण कॉरिडोर की पहचान करने में सक्षम बनाएगा। जब भी हाथी किसी गाँव या इंसानी बस्ती के निकट आएगा, अधिकारी तेज़ी से एहतियाती कदम उठा सकेंगे — जिससे फसल नुकसान और जनहानि, दोनों का जोखिम घटेगा।
हासन जिले में व्यापक प्रयास
वन विभाग के अनुसार इस ऑपरेशन के साथ हासन जिले में तीन अलग-अलग जंगली हाथी झुंडों के हाथियों पर अब स्वदेशी रेडियो कॉलर लगाए जा चुके हैं। विभाग उन इलाकों में रेडियो-कॉलरिंग और अन्य निगरानी तकनीकों का विस्तार कर रहा है जहाँ हाथी अक्सर इंसानी बस्तियों और कृषि भूमि के संपर्क में आते हैं। यह पहल कर्नाटक में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सुविचारित कदम है।