क्या झारखंड-बंगाल ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ हाथियों के लिए खतरनाक बन गया है?

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क्या झारखंड-बंगाल ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ हाथियों के लिए खतरनाक बन गया है?

सारांश

झारखंड और बंगाल के बीच फैला ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ अब हाथियों के लिए एक खतरनाक जगह बन गया है। हाल ही में हुई घटनाओं में कई हाथियों की जानें गई हैं। जानें, इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है।

मुख्य बातें

हाथियों की सुरक्षा के लिए उचित उपायों की आवश्यकता है।
‘एलिफेंट कॉरिडोर’ अब ख़तरनाक साबित हो रहा है।
अधिकतर हाथियों की मौत करंट और ट्रेन के कारण हो रही है।
सरकार को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जानवरों की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है।

जमशेदपुर, 18 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल से लेकर बंगाल तक फैला ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ अब गजराज के लिए एक खतरनाक गलियारा बन गया है। पिछले 45 दिनों में महज 100 किलोमीटर के क्षेत्र में सात हाथियों की मौत हो चुकी है। किसी की जान करंट से गई, किसी को ट्रेन ने कुचल दिया, और किसी की जान बारूदी सुरंग ने ले ली।

जंगल अब हाथियों के लिए एक मौत का गलियारा बनते जा रहे हैं। ताजा घटना 17-18 जुलाई 2025 की रात की है। झारखंड के घाटशिला अनुमंडल से सटे पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले में बांसतोला स्टेशन के पास ट्रेन की चपेट में आकर तीन हाथियों की मौत हो गई।

बताया गया कि रात करीब एक बजे जनशताब्दी एक्सप्रेस जब इस स्टेशन से गुजरी, उसी समय हाथियों का झुंड ट्रैक पार कर रहा था। तीन हाथी ट्रेन की चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मरने वालों में एक वयस्क हाथी के अलावा दो बच्चे शामिल थे। उनके शव रातभर रेलवे ट्रैक पर पड़े रहे। इस हादसे के कारण हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग घंटों बाधित रहा। शुक्रवार को जेसीबी से शव हटाए गए, तब जाकर यातायात बहाल हुआ। यह हाथियों का झुंड कई दिनों से बांसतोला के जंगलों में घूम रहा था।

वन विभाग का कहना है कि रेलवे को पहले ही इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन ट्रेन की रफ्तार कम नहीं की गई। घटना की रात ग्रामीण और वनकर्मी मशाल जलाकर हाथियों के झुंड को रिहायशी इलाके से खदेड़ रहे थे। हाथी रेलवे ट्रैक पर जा पहुंचे और इसी बीच तेज रफ्तार ट्रेन उनमें से तीन को काटते हुए पार हो गई।

झाड़ग्राम के डीएफओ उमर इमाम ने कहा कि समय रहते सावधानी बरती जाती तो यह हादसा रोका जा सकता था। इससे पहले, 10 जुलाई 2025 को पश्चिम सिंहभूम जिले की सेरेंगसिया घाटी में एक जंगली हाथी मृत पाया गया था। आशंका जताई गई कि उसकी मौत खेत में बिछाए गए बिजली के करंट से हुई।

5 जुलाई 2025 को इसी जिले के सारंडा जंगल में छह साल के हाथी की मौत हो गई। वह हाथी 24 जून 2025 को नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी विस्फोट में घायल हुआ था। सारंडा के लोग उसे ‘गडरू’ नाम से जानते थे। घायल गडरू को बचाने के लिए वन विभाग और गुजरात की वन्यजीव संस्था ‘वनतारा’ की टीम ने इलाज शुरू किया था, लेकिन अंततः उसने दम तोड़ दिया। 24 जून 2025 की रात सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत हेवन गांव में एक मादा हाथी करंट लगने से मारी गई। खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए तार में बिजली दौड़ाई गई थी। मादा हाथी उसके चपेट में आ गई और मौके पर ही तड़पकर मर गई।

जांच में पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी वन क्षेत्र में 5 जून 2025 को आमबेड़ा के पास एक और हाथी खेत में मृत पाया गया था। तीन साल में कोल्हान प्रमंडल के अलग-अलग इलाकों में 20 से अधिक हाथियों की मौत हुई है। नवंबर 2023 में पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में करंट लगने से पांच हाथी मरे थे। जुलाई 2024 में बहरागोड़ा के भादुआ गांव में एक हथिनी मृत मिली थी। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले पांच वर्षों में 528 हाथियों की अप्राकृतिक कारणों से मौत हुई है, जिनमें 30 हाथी केवल झारखंड में करंट लगने से मरे।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि मानव विकास के साथ जंगलों का सिकुड़ना और हाथियों की सुरक्षा के लिए उचित उपायों की कमी हो रही है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जानवरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी जानें बचाई जा सकें।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलिफेंट कॉरिडोर में हाथियों की मौत का मुख्य कारण क्या है?
हाथियों की मौत का मुख्य कारण करंट, ट्रेन से कुचलना और बारूदी सुरंगें हैं।
क्या सरकार ने इस समस्या का समाधान करने के लिए कोई कदम उठाए हैं?
सरकार ने वन विभाग को जानकारी दी, लेकिन रेलवे ने आवश्यक सावधानी नहीं बरती।
हाथियों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
हाथियों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए जाने की आवश्यकता है, साथ ही बिजली के करंट और विस्फोटक से सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी।
राष्ट्र प्रेस