बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: हाथी के बच्चे की संदिग्ध मौत, एंथ्रेक्स की आशंका से ताला एलिफेंट कैंप 3 साल के लिए सील
सारांश
मुख्य बातें
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला एलिफेंट कैंप में 28 अप्रैल को एक 3-4 साल की मादा हाथी के बच्चे की अचानक मौत के बाद वन विभाग ने पूरे कैंप क्षेत्र को तीन साल के लिए सील कर दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि यह मौत एंथ्रेक्स संक्रमण के कारण हुई है, हालाँकि अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई बच्चे की मौत
बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि 28 अप्रैल को कैंप में रहने वाली मादा हाथी के बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ी और 5-6 घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा, 'मुंह से लगातार खून बहना और खून का थक्का न जमना — ये एंथ्रेक्स के शुरुआती लक्षण हैं।'
इलाज कर रहे पशु चिकित्सक ने इन लक्षणों को देखते हुए तत्काल एंथ्रेक्स संक्रमण की संभावना जताई, जिसके बाद विभाग ने बिना देरी किए आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर दिया।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
फील्ड डायरेक्टर सहाय के अनुसार, घटना के तुरंत बाद जबलपुर से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा हाथियों की संदिग्ध मौतों के लिए निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का सख्ती से पालन किया गया।
उन्होंने बताया, 'बच्चे की मौत वाली जगह के चारों ओर लगभग 50 मीटर के दायरे में घेरा बना दिया गया है ताकि कोई भी जंगली जानवर उस इलाके में न आ सके। चूँकि एंथ्रेक्स के स्पोर मिट्टी में 3 साल तक जीवित रह सकते हैं, इसलिए उस पूरे क्षेत्र को उतने समय के लिए सील किया गया है।'
एंथ्रेक्स: क्यों इतना खतरनाक है यह संक्रमण
एंथ्रेक्स एक अत्यंत खतरनाक जीवाणु-जनित बीमारी है जो मिट्टी में मौजूद बैसिलस एन्थ्रेसिस बैक्टीरिया के स्पोर से फैलती है। ये स्पोर दशकों तक भूमि में सुप्त अवस्था में जीवित रह सकते हैं और किसी भी जीव के संपर्क में आने पर संक्रमण फैला सकते हैं। गौरतलब है कि यह बीमारी जानवरों के साथ-साथ मनुष्यों को भी प्रभावित कर सकती है, इसलिए एहतियाती उपाय अत्यावश्यक थे।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न वन्यजीव क्षेत्रों में जंगली हाथियों की आबादी और उनके मानव-बस्तियों के करीब आने की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे बीमारी फैलने का जोखिम और भी गंभीर हो जाता है।
एलिफेंट फेस्टिवल और जागरूकता अभियान
फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने यह भी बताया कि विभाग पिछले साल से ही एलिफेंट फेस्टिवल के लिए नई जगहों पर विचार कर रहा था। उन्होंने कहा, 'पहले बांधवगढ़ में सिर्फ कैंप के हाथी ही दिखते थे, लेकिन अब जंगली हाथी रिजर्व के लगभग सभी इलाकों में घूम रहे हैं और गाँवों तक भी आ रहे हैं।'
जगह बदलने का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों के बीच हाथियों की उपयोगिता, वन्यजीव संरक्षण में कैंप के हाथियों की भूमिका और जंगली हाथियों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
आगे की स्थिति
हाथी के बच्चे के नमूनों की प्रयोगशाला जाँच जारी है और एंथ्रेक्स की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। कैंप क्षेत्र अगले 3 वर्षों तक प्रतिबंधित रहेगा और NTCA की SOP के तहत नियमित निगरानी की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारत के अन्य वन्यजीव अभयारण्यों के लिए भी एक चेतावनी है कि बीमारी-निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए।