संजय टाइगर रिजर्व: नर बाघों का संघर्ष थमा, बाघिन टी-40 तीन शावकों संग पर्यटन क्षेत्र में लौटी
सारांश
मुख्य बातें
संजय टाइगर रिजर्व, सीधी (मध्य प्रदेश) में महीनों से जारी नर बाघों की वर्चस्व-लड़ाई अब शांत होती दिख रही है, और इसी के साथ बाघिन टी-40 अपने तीन शावकों के साथ एक बार फिर पर्यटन क्षेत्र में सक्रिय हो गई है। 29 जून 2026 को वन विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। लगातार हो रही टाइगर साइटिंग ने पर्यटकों में नया उत्साह भर दिया है और वन विभाग इसे जंगल में प्राकृतिक संतुलन की बहाली का संकेत मान रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
संजय टाइगर रिजर्व विंध्य अंचल के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप के रूप में जाना जाता है। पिछले कई महीनों से यहाँ नर बाघ टी-56 और टी-67 के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर तीखा संघर्ष चल रहा था। इस टकराव का सबसे गहरा असर बाघिन टी-40 और उसके शावकों पर पड़ा।
बाघिन टी-40 की अपनी एक विशेष पृष्ठभूमि है — बचपन में माँ को खो देने के बाद उसका पालन-पोषण रिजर्व की चर्चित बाघिन 'मौसी' की देखरेख में हुआ था। वन विभाग की सतत निगरानी में पली-बढ़ी टी-40 ने वयस्क होकर अपना क्षेत्र स्थापित किया और चार स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जिसे वन्यजीव संरक्षण की बड़ी उपलब्धि माना गया।
शावक की मौत और बफर जोन में शरण
दो नर बाघों के बढ़ते संघर्ष के बीच टी-40 को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्यटन क्षेत्र छोड़कर बफर जोन के घने जंगलों में शरण लेनी पड़ी। जब कुछ समय बाद वह अपने चारों शावकों के साथ वापस लौटी, तो एक दुखद घटना घटी — नर बाघ टी-67 ने उसके एक शावक का शिकार कर लिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय प्रभुत्व और प्रजनन व्यवहार के चलते नर बाघों द्वारा शावकों पर हमला करना प्रकृति का कठोर किंतु स्वाभाविक व्यवहार है। इस घटना के बाद टी-40 शेष तीन शावकों को लेकर पुनः सुरक्षित इलाकों में चली गई।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
संजय टाइगर रिजर्व सीधी के एसडीओ सुधीर मिश्र ने बताया, 'टी-56 और टी-67 नर बाघों के बीच हुए संघर्ष में टी-40 बाघिन प्रभावित हुई थी। इसके बाद वह अपने 4 शावकों को लेकर बफर क्षेत्र में चली गई थी। बीच में टी-40 बाघिन ने अपने क्षेत्र में लौटने की कोशिश की तो टी-67 बाघ ने एक शावक को मार दिया था। इसके बाद से ही टी-40 बाघिन पर्यटन क्षेत्र में है। अब पर्यटन क्षेत्र में टी-56, टी-67 और टी-40 बाघिन भी दिख रही है।'
वन विभाग के अनुसार अब दोनों नर बाघों के बीच टकराव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। टी-56 और टी-67 की गतिविधियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज की जा रही हैं, जो जंगल में स्थिरता लौटने का संकेत है।
पर्यटकों पर असर
इन दिनों संजय टाइगर रिजर्व पहुँचने वाले पर्यटकों को एक साथ बाघ, बाघिन और शावकों के दीदार हो रहे हैं। कई सफारी वाहनों ने लगातार टी-40 और उसके तीन शावकों की मौजूदगी दर्ज की है। पर्यटकों द्वारा बनाए गए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं, जिससे रिजर्व एक बार फिर देशभर के वन्यजीव प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी टाइगर रिजर्व में नर बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष असामान्य नहीं होता, परंतु जब संघर्ष थमने के बाद बाघिन अपने शावकों के साथ खुलकर दिखाई देने लगे, तो इसे जंगल में स्थिरता और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण माना जाता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक बाघ की गतिविधियों पर कैमरा ट्रैप, जीपीएस-आधारित मॉनिटरिंग और नियमित गश्त के ज़रिये निरंतर नज़र रखी जा रही है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पहले से ही देश में सर्वाधिक बाघों वाला राज्य है। ऐसे में संजय टाइगर रिजर्व से आई यह सकारात्मक खबर न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि टाइगर टूरिज्म को भी नई ऊर्जा देने वाली है। बाघिन टी-40 और उसके तीन शावकों की सुरक्षित वापसी इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण प्रयास और प्राकृतिक संतुलन दोनों सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।