केजरीवाल ने केंद्र से माँगा तेल-गैस स्टॉक का हिसाब, AAP विधायक संजीव झा ने दिल्ली सरकार पर लगाया दोहरेपन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 22 मई को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में तेल और गैस के भंडार को लेकर तीखे सवाल उठाए। साथ ही पार्टी के ही विधायक संजीव झा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री पर कथनी और करनी में अंतर का आरोप लगाकर सियासी माहौल को और गर्म कर दिया।
केजरीवाल के केंद्र पर सवाल
केजरीवाल ने सोशल मीडिया के ज़रिए केंद्र सरकार से तीन सीधे सवाल पूछे — सरकार के पास तेल और गैस का कितना स्टॉक उपलब्ध है, यह स्टॉक कितने दिनों तक चलेगा, और नई आपूर्ति कब तक आने की उम्मीद है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विषय पर केंद्र सरकार की चुप्पी से जनता के बीच भ्रम और भय का वातावरण बन रहा है।
केजरीवाल के अनुसार, देश के कई हिस्सों में चिंताजनक स्थिति है और अफवाहों का बाज़ार गर्म है। उन्होंने कहा कि जनता अफरा-तफरी की स्थिति में है, लेकिन सरकार कहीं नज़र नहीं आ रही। यह ऐसे समय में आया है जब ऊर्जा आपूर्ति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
AAP विधायक का दिल्ली सरकार पर निशाना
AAP विधायक संजीव झा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री नागरिकों से बचत और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील करती हैं, वहीं दूसरी ओर एलजी हाउस तक मात्र 180 मीटर पैदल चलकर केवल पीआर करने का प्रयास करती हैं।
झा ने आगे आरोप लगाया कि बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र के मुखमेलपुर गाँव में एक छोटे पार्क के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के लिए अलग-अलग कॉलोनियों से बसों और गाड़ियों में भर-भरकर लोगों को लाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सैकड़ों वाहनों का इस तरह उपयोग फिजूलखर्ची नहीं है।
पार्क परियोजना में देरी का आरोप
संजीव झा के अनुसार, जिस पार्क का उद्घाटन किया गया, उसे अरविंद केजरीवाल की सरकार के कार्यकाल में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे पूरा करने में करीब डेढ़ साल का समय लगा दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और।'
ऑनलाइन पढ़ाई बनाम सरकारी भीड़ — दोहरापन का आरोप
झा ने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ जनता को ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी जाती है, जबकि दूसरी तरफ सरकारी कार्यक्रमों में भारी भीड़ जुटाकर राजनीतिक प्रदर्शन किया जाता है। गौरतलब है कि यह बयान तब आया है जब AAP खुद विपक्ष की भूमिका में है और पार्टी के भीतर से ही दिल्ली सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ
दिल्ली की राजनीति में यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर तब और पेचीदा हो जाता है जब एक ही पार्टी के नेता अलग-अलग सरकारों पर एक साथ हमलावर होते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के दोहरे मोर्चे पर हमले पार्टी की रणनीतिक स्थिति को जटिल बनाते हैं। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से तेल-गैस स्टॉक पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना अहम होगा।