पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर BJP-AAP आमने-सामने: भाजपा ने कहा — 'आप नेता गुमराह कर रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शुक्रवार, 15 मई को आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर AAP नेताओं के बयान न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि जनता को गुमराह करने की कोशिश हैं। BJP का कहना है कि खाड़ी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाज़ार में आई उथल-पुथल को AAP जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर राजनीतिक रोटी सेंक रही है।
भाजपा का पलटवार
दिल्ली BJP के प्रवक्ता शंकर कपूर ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹1 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से भी आम नागरिकों को तकलीफ होती है — यह स्वाभाविक है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का हर नागरिक यह समझता है कि यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा नतीजा है, और केंद्र सरकार ने इसे न्यूनतम स्तर पर बनाए रखने में सफलता पाई है।
कपूर ने AAP के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार की बुनियादी समझ नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि AAP नेताओं ने थोड़ी-सी भी रिसर्च की होती, तो उन्हें पता होता कि भारतीय मुद्रा के हिसाब से न्यूयॉर्क में पेट्रोल ₹105 प्रति लीटर और मॉस्को में ₹92.50 प्रति लीटर बिक रहा है। कपूर ने सौरभ भारद्वाज से सीधा सवाल पूछा कि अरब देशों, अमेरिका या रूस से खरीदा गया तेल भारत को सस्ता कैसे पड़ेगा।
AAP का आरोप — रूसी तेल और अमेरिकी दबाव
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में आकर रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना कम कर दिया गया है, जिसके चलते देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और आने वाले समय में इसमें और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारद्वाज ने दावा किया कि यह केवल शुरुआत है और आम जनता को महंगाई की और बड़ी मार झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ सरकार आम लोगों से विदेश यात्रा कम करने और सोना न खरीदने की अपील कर रही है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव न पड़े, वहीं दूसरी तरफ बड़े उद्योगपति विदेशों में भारी निवेश कर रहे हैं।
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कोई भी उछाल सीधे घरेलू पंप कीमतों पर असर डालता है। AAP का रूसी तेल वाला तर्क एक पुरानी बहस को फिर से हवा दे रहा है जो 2022 के यूक्रेन संघर्ष के बाद से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रही है।
आम जनता पर असर
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत, रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों और मध्यम वर्ग के बजट पर पड़ता है। आलोचकों का कहना है कि इस बहस के राजनीतिक होने से असली मुद्दा — महंगाई से राहत — पीछे रह जाता है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह टकराव और तेज़ होने की संभावना है।