जयशंकर ने हंगरी की नई उप प्रधानमंत्री अनीता ओर्बान को दी बधाई, भारत-हंगरी साझेदारी मजबूत करने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को अनीता ओर्बान को हंगरी की नई उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री नियुक्त होने पर बधाई दी और भारत-हंगरी द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की प्रतिबद्धता जताई। अनीता ओर्बान ने 13 मई को यह पद संभाला था।
जयशंकर का संदेश
जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'भारत-हंगरी रिश्तों और भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए साथ काम करने का इंतजार है।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब हंगरी में सत्ता-परिवर्तन के बाद नई सरकार अपनी विदेश नीति की दिशा तय कर रही है।
अनीता ओर्बान: परिचय और लक्ष्य
जुलाई 1974 में जन्मीं अनीता ओर्बान एक अनुभवी हंगेरियन वकील, राजनयिक और राजनेता हैं। उन्होंने एक्स पर अपने लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा, 'मेरा लक्ष्य साफ है — हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी मजबूती, सम्मान और साफ सोच के साथ हंगरी के लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करना। मैं अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने और यूरोप समेत दुनिया भर में हंगरी की आवाज को और मजबूत करने के लिए उत्साहित हूं।'
हंगरी में ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव
12 अप्रैल को हुए संसदीय चुनावों में पीटर मग्यार की टिस्जा पार्टी ने विक्टर ओर्बान के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ फिडेज-केडीएनपी गठबंधन को करारी शिकस्त दी। टिस्जा पार्टी ने 199 में से 141 सीटें जीतकर संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया — जिसे हंगरी की राजनीति में एक ऐतिहासिक उलटफेर माना जा रहा है। पीटर मग्यार ने 9 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और नई संसद के पहले सत्र में व्यवस्था बदलने का संकल्प दोहराया।
भारत की प्रतिक्रिया और रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अप्रैल को एक्स पर पीटर मग्यार और टिस्जा पार्टी को बधाई देते हुए लिखा था, 'भारत और हंगरी के बीच गहरी दोस्ती, साझा मूल्य और आपसी सम्मान का मजबूत रिश्ता है। मैं दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करने और भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का इंतजार कर रहा हूं।' गौरतलब है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता के बीच हंगरी जैसे सदस्य देशों से संबंध भारत की व्यापक यूरोपीय कूटनीति के लिए अहम हैं।
आगे की राह
अनीता ओर्बान के नेतृत्व में हंगरी की नई विदेश नीति की रूपरेखा स्पष्ट होना अभी बाकी है। भारत की ओर से जयशंकर का त्वरित बधाई संदेश संकेत देता है कि नई दिल्ली हंगरी की नई सरकार के साथ कूटनीतिक जुड़ाव को प्राथमिकता देती है।