त्रिपुरा को मिली 16वीं TSR बटालियन, गृह मंत्रालय ने दी ₹50 करोड़ की एकमुश्त सहायता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार, 15 मई को त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) की एक नई बटालियन के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी, जिससे इस विशिष्ट अर्धसैनिक बल की कुल बटालियनों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। यह निर्णय त्रिपुरा के मुख्य सचिव को संबोधित एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से सूचित किया गया।
वित्तीय सहायता का ढाँचा
गृह मंत्रालय के पत्र के अनुसार, भारतीय रिज़र्व श्रेणी के अंतर्गत नई बटालियन के गठन पर केंद्र सरकार ₹50 करोड़ की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, बटालियन मुख्यालय और संबंधित सुविधाओं सहित बुनियादी ढाँचे के विकास पर हुए वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति भी की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹30 करोड़ निर्धारित की गई है।
हालाँकि, भूमि की लागत इस प्रतिपूर्ति में शामिल नहीं होगी — त्रिपुरा सरकार को नई बटालियन के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध करानी होगी। प्रतिपूर्ति के लिए सामान्य वित्तीय नियमों के तहत उपयोग प्रमाण पत्र और सभी आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आठ अनिवार्य शर्तें
गृह मंत्रालय ने नई TSR बटालियन के गठन के लिए त्रिपुरा सरकार पर आठ शर्तें भी अधिरोपित की हैं, जिनका कड़ाई से पालन अनिवार्य बताया गया है। हालाँकि पत्र में इन शर्तों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
TSR की राष्ट्रव्यापी तैनाती
16 बटालियनों में से 13 को भारतीय रिज़र्व बटालियन के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिन्हें गृह मंत्रालय सुरक्षा, चुनाव, कानून-व्यवस्था और उग्रवाद-विरोधी अभियानों के लिए देश में कहीं भी तैनात कर सकता है।
वर्तमान में लगभग 2,000 कर्मियों (अधिकारियों सहित) वाली दो TSR बटालियनें राज्य के बाहर कार्यरत हैं — एक 2019 से दिल्ली पुलिस के अधीन राष्ट्रीय राजधानी में, और दूसरी 2022 से छत्तीसगढ़ में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के साथ। इसके अलावा, एक बटालियन त्रिपुरा में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के ड्रिलिंग स्थलों की सुरक्षा में नियुक्त है।
19 अप्रैल से 1 जून 2024 के बीच हुए लोकसभा चुनावों के दौरान TSR के जवानों को महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में चुनाव सुरक्षा के लिए भेजा गया था। हाल ही में असम और पश्चिम बंगाल में भी TSR की 10 कंपनियाँ चुनाव संबंधी कार्यों के लिए तैनात की गई थीं।
TSR की परिचालन विरासत
आतंकवाद-विरोधी अभियानों में दक्ष TSR ने त्रिपुरा में साढ़े चार दशक से चले विद्रोह को नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सुरक्षा प्रदान करने से लेकर देश के लगभग हर राज्य में चुनाव सुरक्षा सेवाएँ देने तक, इस बल ने व्यावसायिकता और परिचालन दक्षता में एक मज़बूत प्रतिष्ठा अर्जित की है।
नई बटालियन की स्वीकृति के साथ TSR की क्षमता और विस्तार का यह क्रम आगे भी जारी रहने की संभावना है।