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क्या त्रिपुरा ने हाइड्रोकाइनेटिक पावर परियोजनाओं के लिए 10 नदी स्थलों की पहचान की?

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क्या त्रिपुरा ने हाइड्रोकाइनेटिक पावर परियोजनाओं के लिए 10 नदी स्थलों की पहचान की?

सारांश

त्रिपुरा ने 10 नदी स्थलों की पहचान की है ताकि हाइड्रोकाइनेटिक पावर परियोजनाओं के लिए बिजली उत्पादन किया जा सके। ऊर्जा मंत्री रतन लाल नाथ ने नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। यह विकास राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में मदद करेगा।

मुख्य बातें

त्रिपुरा ने 10 नदी स्थलों की पहचान की है।
हाइड्रोकाइनेटिक ऊर्जा उत्पादन की योजना है।
सुपर ईसीबीसी भवन में 12.33 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
2031 तक बिजली की मांग 650 मेगावाट होने की संभावना है।
रूफटॉप सोलर पैनल से 1,000 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव है।

अगरतला, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार बहती नदियों से हाइड्रोकाइनेटिक ऊर्जा उत्पादन और बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर जैसी नई तकनीकों को अपना रही है। यह जानकारी शनिवार को ऊर्जा मंत्री रतन लाल नाथ ने दी।

बनमालीपुर में प्रस्तावित सुपर एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (ईसीबीसी) भवन के ‘भूमि पूजन’ समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग ने हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन तकनीक के जरिए 185 मेगावाट बिजली उत्पादन का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्यभर में 10 नदी स्थलों की पहचान कर ली गई है।

उन्होंने कहा कि विकास का सीधा संबंध बिजली की उपलब्धता से है। उन्होंने कहा, “अगर हम नई तकनीकों को नहीं अपनाएंगे तो पीछे रह जाएंगे। हमारी सरकार बिजली के कुशल उपयोग और आधुनिक समाधानों पर फोकस कर रही है।”

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सुपर ईसीबीसी भवन पर 12.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह देश में ऐसे पांच भवनों में से एक होगा, जिसका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में त्रिपुरा में पीक आवर के दौरान लगभग 378 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, जो 2031 तक बढ़कर 650 मेगावाट होने की संभावना है।

नाथ के अनुसार, राज्य में औसतन 23 घंटे 54 मिनट बिजली आपूर्ति की जा रही है, हालांकि कभी-कभार ट्रिपिंग की समस्या होती है। उन्होंने बताया कि बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 2018 से पहले के 7.21 लाख से बढ़कर अब 10.57 लाख हो गई है, जो विकास का संकेत है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि यदि पांच लाख घरों में 2 किलोवॉट के रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जाएं तो त्रिपुरा प्रतिदिन 1,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकता है, जिससे आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बल मिलेगा।

उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग 2,000 सरकारी भवनों में भी सोलर पावर सिस्टम लगा रहा है, जिसे अगले साल तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे लगभग 80 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

अब तक 15,000 उपभोक्ता रूफटॉप सोलर सिस्टम लगा चुके हैं, जिनसे 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई तकनीकों का उपयोग कर ऊर्जा संकट को भी हल करेगा। यह एक सकारात्मक संकेत है कि राज्य सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाइड्रोकाइनेटिक ऊर्जा क्या है?
हाइड्रोकाइनेटिक ऊर्जा वह ऊर्जा है जो बहती नदियों या जलधाराओं से उत्पन्न होती है।
त्रिपुरा में बिजली की वर्तमान स्थिति क्या है?
त्रिपुरा में वर्तमान में पीक आवर के दौरान 378 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है।
सुपर ईसीबीसी भवन का क्या महत्व है?
यह भवन ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे पांच भवनों में से एक है।
रूफटॉप सोलर पैनल से कितना बिजली उत्पादन संभव है?
5 लाख घरों में 2 किलोवॉट के रूफटॉप सोलर पैनल लगाने पर त्रिपुरा प्रतिदिन 1,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर सकता है।
त्रिपुरा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या क्या है?
बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 2018 में 7.21 लाख से बढ़कर अब 10.57 लाख हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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