भारत-अमेरिका व्यापार 2030 तक $500 अरब का लक्ष्य, राजदूत क्वात्रा ने तनाव की अटकलें खारिज कीं

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भारत-अमेरिका व्यापार 2030 तक $500 अरब का लक्ष्य, राजदूत क्वात्रा ने तनाव की अटकलें खारिज कीं

सारांश

राजदूत क्वात्रा का संदेश साफ था — भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार की कहानियाँ हकीकत से परे हैं। $220 अरब से $500 अरब व्यापार का लक्ष्य, अमेरिकी रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े खरीदार का दर्जा, और 2,000 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर — ये आँकड़े बताते हैं कि साझेदारी कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।

मुख्य बातें

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 19 मई 2026 को कैपिटल हिल समिट 2026 में भारत-अमेरिका तनाव की अटकलों को खारिज किया।
दोनों देशों का लक्ष्य वार्षिक व्यापार $220 अरब से बढ़ाकर 2030 तक $500 अरब करना है।
भारत अमेरिका के बाहर अमेरिकी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन चुका है।
भारत में लगभग 2,000 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें से करीब आधे अमेरिकी कंपनियों के हैं।
माइक्रॉन सहित अमेरिकी कंपनियाँ भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं।
नए सिविल न्यूक्लियर कानून ने असैन्य परमाणु सहयोग में निजी क्षेत्र की भागीदारी के रास्ते खोले।

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 19 मई 2026 को वाशिंगटन में आयोजित 'कैपिटल हिल समिट 2026' को संबोधित करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों की साझेदारी व्यापार, तकनीक, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रही है और इसे अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का द्विदलीय समर्थन प्राप्त है।

मुख्य घटनाक्रम

अमेरिका-भारत मैत्री परिषद द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन में क्वात्रा ने कहा कि संबंधों में खटास को लेकर जो धारणाएं बनाई जा रही हैं, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं। उन्होंने कहा, 'हम स्वाभाविक साझेदार हैं — सिर्फ भौगोलिक वजह से नहीं, बल्कि हमारे साझा मूल्यों की वजह से भी।' इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का भी उल्लेख किया।

दो दशकों की निरंतरता

राजदूत ने रेखांकित किया कि पिछले 20 वर्षों में हर अमेरिकी प्रशासन ने भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने में अपनी पूर्ववर्ती सरकार की उपलब्धियों को आधार बनाया है। उन्होंने कहा, 'अगर आप पिछले दशकों और अलग-अलग सरकारों के दौरान रिश्तों की कड़ी को देखें, तो पाएंगे कि हर सरकार ने पिछली सरकार की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की और उसमें सफलता भी हासिल की।' यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर अनेक द्विपक्षीय रिश्ते राजनीतिक बदलावों के साथ डगमगाते रहे हैं।

व्यापार और रक्षा में बड़े लक्ष्य

आर्थिक साझेदारी पर क्वात्रा ने बताया कि दोनों देशों ने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा लगभग $220 अरब से बढ़ाकर 2030 तक $500 अरब तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। रक्षा सहयोग को उन्होंने इस साझेदारी का सबसे तेज़ी से उभरता हुआ आयाम बताया। उन्होंने कहा, 'आज भारत, अमेरिका के बाहर अमेरिकी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।' गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा समझौते और परिचालन तालमेल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

तकनीक और परमाणु सहयोग में नई राहें

क्वात्रा ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत में हाल ही में पारित सिविल न्यूक्लियर कानून ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के नए द्वार खोले हैं। तकनीकी निवेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि माइक्रॉन जैसी अमेरिकी दिग्गज कंपनियाँ भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।

बौद्धिक संपदा और शिक्षा सहयोग

बौद्धिक संपदा (आईपी) सुरक्षा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत में करीब 2,000 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें से लगभग आधे अमेरिकी कंपनियों के हैं — यह तथ्य स्वयं भारत में पेटेंट, ट्रेडमार्क और आईपी सुरक्षा की विश्वसनीयता को दर्शाता है। शिक्षा के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि भारत 'वैश्विक स्तर की उत्कृष्ट संस्थाएं' स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने में सक्षम होंगी। आने वाले समय में यह शैक्षणिक सेतु दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को और गहरे जोड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस वृद्धि की संरचना कैसी होगी — क्या यह केवल सेवा निर्यात पर टिकी रहेगी या वस्तु व्यापार और विनिर्माण में भी संतुलन आएगा। रक्षा क्षेत्र में भारत की अमेरिकी उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता रणनीतिक गहराई तो दर्शाती है, पर यह प्रश्न भी उठाती है कि 'आत्मनिर्भर भारत' के रक्षा उत्पादन लक्ष्य इस समीकरण में कहाँ खड़े हैं। द्विदलीय समर्थन की दलील ऐतिहासिक रूप से सही है, लेकिन अमेरिकी राजनीति में बदलते घरेलू दबावों के बीच इसे स्थायी मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारत-अमेरिका तनाव पर क्या कहा?
क्वात्रा ने 19 मई 2026 को कैपिटल हिल समिट 2026 में कहा कि तनाव को लेकर बनाई जा रही अधिकांश धारणाएं जमीनी हकीकत पर आधारित नहीं हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के संबंध व्यापार, रक्षा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत और अमेरिका का 2030 तक व्यापार लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा लगभग $220 अरब से बढ़ाकर 2030 तक $500 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य वस्तु, सेवा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर हासिल करने की योजना है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी कितनी बड़ी हो गई है?
क्वात्रा के अनुसार भारत अब अमेरिका के बाहर अमेरिकी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन चुका है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा समझौते और परिचालन तालमेल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईपी सुरक्षा की क्या स्थिति है?
क्वात्रा ने बताया कि भारत में करीब 2,000 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर हैं, जिनमें से लगभग आधे अमेरिकी कंपनियों के हैं। उन्होंने इसे भारत में पेटेंट, ट्रेडमार्क और आईपी सुरक्षा की विश्वसनीयता का प्रमाण बताया।
भारत के नए सिविल न्यूक्लियर कानून का अमेरिका से सहयोग पर क्या असर होगा?
हाल ही में पारित सिविल न्यूक्लियर कानून ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के नए रास्ते खोले हैं। इससे अमेरिकी और भारतीय निजी कंपनियों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग के अवसर बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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