आर्थिक विकास और सुरक्षा से बदल रहा भारत — राजदूत क्वात्रा का 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में बड़ा बयान
सारांश
Key Takeaways
- राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने 23 अप्रैल को वॉशिंगटन में 'द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में भारत के परिवर्तन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
- भारत की अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है, जो इसे विश्व की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रखती है।
- भारत में बदलाव के तीन मुख्य स्तंभ हैं — शासन सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और तकनीक व मैन्युफैक्चरिंग।
- सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और न्यूक्लियर एनर्जी में भारत की प्रगति अगले दशक की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर हो रही है।
- भारत-अमेरिका व्यापार वर्तमान में 200 अरब डॉलर है, जिसे इस दशक के अंत तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
- क्वात्रा ने सीमा पार आतंकवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख मुद्दा बताते हुए ऊर्जा, आर्थिक और खाद्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता में रखा।
वॉशिंगटन, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत में हो रहे ऐतिहासिक बदलाव की मूल शक्ति आर्थिक विकास, समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा में निहित है। वॉशिंगटन में आयोजित प्रतिष्ठित 'द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में बोलते हुए उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका और घरेलू परिवर्तन को विस्तार से रेखांकित किया।
भारत की विकास गाथा: सात प्रतिशत से ऊपर की रफ्तार
राजदूत क्वात्रा ने कहा, "मुख्य फोकस आर्थिक विकास और समृद्धि पर है… साथ ही हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी हैं, जैसे सीमा पार आतंकवाद।" उन्होंने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय सात प्रतिशत से अधिक की दर से विस्तार कर रही है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाती है।
यह आंकड़ा महज एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है — यह उस नींव का प्रमाण है जिस पर भारत अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का ढांचा खड़ा कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं भी भारत को अगले दशक की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों में गिन रही हैं।
शासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक — तीन स्तंभों पर टिका बदलाव
क्वात्रा ने भारत में हो रहे परिवर्तन को तीन प्रमुख आयामों में विभाजित किया। पहला बदलाव शासन (गवर्नेंस) में है — सरकार इस तरह पुनर्गठित हो रही है कि विकास का लाभ सीधे आम नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने पारदर्शिता, वित्तीय समावेशन और बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को इसका ठोस उदाहरण बताया।
दूसरा बड़ा बदलाव इंफ्रास्ट्रक्चर में है। सड़कें, पुल और भौतिक ढांचे के साथ-साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेज़ी से विकसित हो रहा है। क्वात्रा के शब्दों में, "डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक तरफ विकास का फायदा लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है, और दूसरी तरफ खुद विकास को आगे बढ़ाने का काम भी करता है।"
तीसरा बदलाव तकनीक, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में है। उन्होंने इसे एक स्व-पोषित चक्र बताया — नई तकनीक उत्पादन बढ़ाती है और बढ़ा हुआ उत्पादन नई तकनीक को प्रोत्साहित करता है। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारत की प्रगति का उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
सुरक्षा का विस्तृत दायरा: ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा
राजदूत क्वात्रा ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अब सुरक्षा को केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं देखती। ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा — ये तीनों मिलकर भारत की समग्र सुरक्षा नीति का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि इन सभी क्षेत्रों में एक साथ काम करने से ही आम नागरिक के जीवन में वास्तविक बदलाव आएगा।
यह दृष्टिकोण उस वैश्विक वास्तविकता के अनुरूप है जिसमें सप्लाई चेन में व्यवधान, संसाधनों पर बढ़ता नियंत्रण और तकनीकी वर्चस्व की होड़ नई चुनौतियां पेश कर रही है। क्वात्रा ने कहा, "अब सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं है… जरूरी है कि चीजें भरोसेमंद तरीके से मिलती भी रहें।"
भारत-अमेरिका साझेदारी: 200 अरब से 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-अमेरिका संबंध को राजदूत क्वात्रा ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और व्यापार में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 200 अरब डॉलर प्रतिवर्ष है, और इसे इस दशक के अंत तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
गौरतलब है कि यह लक्ष्य तब और प्रासंगिक हो जाता है जब चीन के साथ अमेरिकी व्यापार तनाव चरम पर है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्गठित हो रही हैं। भारत इस पुनर्गठन में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है — यही वह भू-राजनीतिक अवसर है जिसे भारत भुनाने की कोशिश कर रहा है।
आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और रक्षा सहयोग समझौतों पर नज़र रखना होगा, क्योंकि ये दोनों देशों की साझेदारी की दिशा तय करेंगे।