भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और लेफ्टिनेंट जनरल वॉवेल की इंडो-पैसिफिक पर अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत और अमेरिका ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा हालात पर उच्च स्तरीय चर्चा की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने के रास्तों पर विचार साझा किए। यह बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों देशों की सेनाएँ राजस्थान में 'युद्ध अभ्यास 2026' के तहत संयुक्त प्रशिक्षण पूरा कर चुकी हैं।
मुख्य बैठक: जनरल सेठ और लेफ्टिनेंट जनरल वॉवेल
भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अमेरिकी सेना की पैसिफिक कमांड (यूएसएआरपीएसी) के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वॉवेल से मुलाकात की। भारतीय सेना ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'दोनों सैन्य अधिकारियों ने इंडो-पैसिफिक में बदलते सुरक्षा हालात पर चर्चा की और कई क्षेत्रों में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के मौकों पर बात की।' बातचीत में संयुक्त ट्रेनिंग और सैन्य अभ्यासों के ज़रिए दोनों सेनाओं की साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने पर भी ज़ोर दिया गया।
रक्षा सचिव की अमेरिकी सांसदों से मुलाकात
इसी दिन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बातचीत भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हो रहे बदलावों पर केंद्रित रही, जिसमें रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी सहयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया।
'युद्ध अभ्यास 2026' की सफलता और संयुक्त प्रशिक्षण
पिछले हफ्ते राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित 'युद्ध अभ्यास 2026' के तहत भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों ने कई तरह के प्लेटफॉर्म और अभियानगत परिस्थितियों में एक साथ प्रशिक्षण लिया। दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की रणनीति, तकनीक और काम करने के तरीकों को करीब से समझा और साथ मिलकर काम करने की क्षमता को और मज़बूत किया। भारतीय सेना ने कहा कि 'युद्ध अभ्यास' की सफलता ने स्पष्ट किया है कि दोनों सेनाएँ संयुक्त सैन्य अभियानों में बेहतर तालमेल से काम कर सकती हैं।
अमेरिकी राजदूत की प्रतिक्रिया
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज का दौरा करने के बाद एक्स पर लिखा, 'अमेरिका और भारत के सैनिकों को एक साथ ट्रेनिंग करते देखना शानदार रहा। यह अभ्यास हमारी रक्षा साझेदारी की ताकत को दिखाता है, जिसमें भरोसा, तैयारी, साथ मिलकर काम करने की क्षमता और साझा उद्देश्य शामिल हैं।' गोर ने यह भी कहा कि दोनों सेनाएँ मिलकर जो हासिल कर रही हैं उस पर गर्व है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह उच्चस्तरीय संपर्क ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है और क्वाड जैसे बहुपक्षीय ढाँचों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी सहयोग पर ज़ोर देना यह संकेत देता है कि दोनों देश केवल अभ्यासों से आगे बढ़कर औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी को भी नई ऊँचाई देना चाहते हैं। आने वाले महीनों में इस साझेदारी की दिशा और गहराई और स्पष्ट होगी।