3 अक्टूबर 2026
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एडमिरल पापारो का 6 दिवसीय भारत दौरा शुरू, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर होगी चर्चा

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एडमिरल पापारो का 6 दिवसीय भारत दौरा शुरू, भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर होगी चर्चा

सारांश

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख एडमिरल पापारो इस साल दूसरी बार भारत पहुँचे हैं — छह दिन, कई बड़े एजेंडे। डिजिटल रक्षा, समुद्री सुरक्षा और उभरती तकनीक में सहयोग पर बात होगी। यह यात्रा भारत-अमेरिका की गहराती मेजर डिफेंस पार्टनरशिप और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती अमेरिकी रणनीतिक साझेदारी का ताज़ा संकेत है।

मुख्य बातें

पापारो , अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड प्रमुख, 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के दौरे पर हैं।
दौरे का उद्देश्य भारत-अमेरिका मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को मज़बूत करना और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक स्थिरता पर चर्चा करना है।
एजेंडे में डिजिटल परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं।
यह इस वर्ष पापारो की दूसरी भारत यात्रा है — पहली 14–19 फरवरी 2026 को हुई थी।
पिछले दौरे में उन्होंने जनरल अनिल चौहान , एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वेस्टर्न कमांड से मुलाकात की थी।
भारत क्वाड सदस्य होते हुए भी अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम है।

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 अक्टूबर 2026 को भारत पहुँचे और 8 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस छह दिवसीय दौरे में भारतीय सैन्य नेतृत्व के साथ व्यापक रक्षा वार्ता करेंगे। भारत में अमेरिकी दूतावास ने पुष्टि की है कि इस यात्रा का केंद्रीय उद्देश्य भारत-अमेरिका की मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को और सुदृढ़ करना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाना है।

दौरे के प्रमुख एजेंडे

अमेरिकी दूतावास के अनुसार, एडमिरल पापारो भारतीय अधिकारियों के साथ कई साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इनमें डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों का रक्षा में उपयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना, रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और लचीलापन बढ़ाना, तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटना शामिल है।

दूतावास ने कहा कि दोनों देश मिलकर ऐसी रक्षा साझेदारी विकसित कर रहे हैं जो नई प्रौद्योगिकी से लेकर समुद्री सुरक्षा तक भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

फरवरी 2026 की यात्रा की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एडमिरल पापारो इससे पहले इसी वर्ष 14 से 19 फरवरी 2026 के बीच भारत आ चुके हैं — यानी यह वर्ष में उनकी दूसरी भारत यात्रा है। पिछले दौरे में उन्होंने नई दिल्ली में तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से मुलाकात की थी। उस बैठक में क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और संयुक्त परिचालन क्षमता (joint operability) जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई थी।

फरवरी की उस यात्रा के दौरान एडमिरल पापारो ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ हरियाणा के चंडीमंदिर स्थित भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड के मुख्यालय का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ ऑपरेशनल ब्रीफिंग में भाग लिया था।

बेंगलुरु में एयरोस्पेस और तेजस कनेक्शन

पिछली यात्रा के दौरान एडमिरल पापारो बेंगलुरु भी गए थे, जहाँ उन्होंने नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर का निरीक्षण किया और HAL तेजस से जुड़ी उत्पादन व परीक्षण सुविधाओं को देखा। उन्होंने एयरोस्पेस क्षेत्र में नवाचार की सराहना करते हुए भारत-अमेरिका प्रौद्योगिकी साझेदारी को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की व्यापक तस्वीर

पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। इसमें लॉजिस्टिक्स समझौते, संयुक्त सैन्य अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी के सह-उत्पादन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देश क्वाड के भी सदस्य हैं, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी भागीदार हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र हो रही है। हालाँकि, भारत अपनी पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम रहते हुए किसी एक गुट में पूरी तरह शामिल होने से परहेज करता आया है — जो उसकी विदेश नीति की एक स्थायी विशेषता है। एडमिरल पापारो की यह यात्रा उसी संतुलन के बीच दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यावहारिक रक्षा सहयोग की निरंतरता को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना इस तथ्य पर नहीं कि भारत अभी भी रूस से हथियार खरीदता है और CAATSA-प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद मॉस्को से ऊर्जा संबंध बनाए रखता है। यह 'मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के साथ एक स्थायी तनाव में जीती है — और वाशिंगटन इसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ता दिखता है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडमिरल पापारो का भारत दौरा कब से कब तक है?
एडमिरल सैमुअल जे. पापारो 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक भारत के दौरे पर हैं। यह इस वर्ष उनकी दूसरी भारत यात्रा है — पहली फरवरी 2026 में हुई थी।
एडमिरल पापारो के भारत दौरे का मकसद क्या है?
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका की मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को मज़बूत करना है। इसमें डिजिटल परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकी, इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक स्थिरता, रक्षा ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
फरवरी 2026 की यात्रा में एडमिरल पापारो ने किन भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की थी?
फरवरी 2026 की यात्रा में एडमिरल पापारो ने तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से मुलाकात की थी। उन्होंने चंडीमंदिर स्थित वेस्टर्न कमांड का भी दौरा किया था और लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ ऑपरेशनल ब्रीफिंग में भाग लिया था।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में क्या-क्या शामिल है?
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में लॉजिस्टिक्स समझौते, संयुक्त सैन्य अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी का सह-उत्पादन शामिल है। दोनों देश क्वाड के भी सदस्य हैं, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।
क्या भारत अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी में पूरी तरह शामिल है?
भारत मेजर डिफेंस पार्टनर और क्वाड सदस्य है, लेकिन वह अपनी पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर भी कायम रहता है। इसका अर्थ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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