4 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर-एडमिरल पापारो बैठक: हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका सुरक्षा व समुद्री सहयोग पर मंथन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर-एडमिरल पापारो बैठक: हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका सुरक्षा व समुद्री सहयोग पर मंथन

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर और INDOPACOM कमांडर एडमिरल पापारो की नई दिल्ली बैठक महज औपचारिकता नहीं — यह हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका की बढ़ती सामरिक एकजुटता का ताज़ा संकेत है। एक सप्ताह में दो उच्चस्तरीय रक्षा बैठकें बताती हैं कि दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा पर साझा एजेंडे को ठोस आकार देने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 4 अक्टूबर 2026 को INDOPACOM कमांडर एडमिरल सैमुअल जे.
पापारो से नई दिल्ली में मुलाकात की।
बैठक में हिंद-प्रशांत में सुरक्षा साझेदारी, समुद्री सहयोग, उभरती तकनीक और रणनीतिक स्थिरता पर चर्चा हुई।
एडमिरल पापारो छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आए हैं; अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी बैठक में उपस्थित रहे।
28 सितंबर 2026 को सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी USARPAC के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी.
वोवेल से मुलाकात की थी।
अमेरिकी दूतावास ने कहा कि यात्रा दोनों देशों की मजबूत रक्षा साझेदारी और हिंद महासागर में अमेरिका की दीर्घकालिक उपस्थिति को दर्शाती है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में यूनाइटेड स्टेट्स पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में द्विपक्षीय सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अहम बैठक में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी उपस्थित रहे। एडमिरल पापारो छह दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर शनिवार, 3 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुँचे थे।

बैठक में क्या हुई चर्चा

जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'अमेरिकी प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो से मिलकर खुशी हुई। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारी सुरक्षा साझेदारी और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।' यह बैठक भारत-अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों की बढ़ती गहराई को रेखांकित करती है, जो हाल के वर्षों में रणनीतिक सहयोग की धुरी बन चुकी है।

यात्रा के प्रमुख एजेंडे

एडमिरल पापारो की यात्रा के दौरान भारतीय अधिकारियों के साथ जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा होने की जानकारी है, उनमें शामिल हैं — डिजिटल रूपांतरण और उभरती तकनीकों का सैन्य उपयोग, हिंद-प्रशांत में रणनीतिक स्थिरता, रक्षा क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा, और तेजी से बदलती तकनीकी प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न चुनौतियाँ। भारत में अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा, 'नई तकनीक से लेकर समुद्री सुरक्षा तक, अमेरिका और भारत ऐसी रक्षा साझेदारी तैयार कर रहे हैं, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।'

पिछले हफ्ते की बैठक से जुड़ता है संदर्भ

यह बैठक ऐसे समय में आई है जब महज एक सप्ताह पहले, 28 सितंबर 2026 को, भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अमेरिकी सेना की प्रशांत कमान के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वोवेल से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत में बदलते सुरक्षा परिदृश्य और द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार के अवसरों पर चर्चा की थी। गौरतलब है कि युद्ध अभ्यास जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों की सफलता को भी दोनों देशों ने रेखांकित किया था।

सेना की संयुक्त क्षमता पर ज़ोर

भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन ने एक्स पर बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल वोवेल और जनरल सेठ की बैठक में 'संयुक्त ट्रेनिंग और सैन्य अभ्यासों के ज़रिए दोनों सेनाओं की साथ मिलकर काम करने की क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।' अमेरिकी दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि एडमिरल पापारो की यात्रा 'हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिका की दीर्घकालिक उपस्थिति और हितों को दोहराती है।'

क्या होगा आगे

एडमिरल पापारो की छह दिवसीय यात्रा के शेष दिनों में भारतीय रक्षा और सैन्य नेतृत्व के साथ और बैठकें अपेक्षित हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब क्वाड और भारत-अमेरिका रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (DTTI) जैसे ढाँचों के तहत दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। आने वाले महीनों में इस सहयोग के ठोस नतीजे सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर जयशंकर और पापारो — यह संयोग नहीं है। यह उस समन्वित कूटनीतिक ताल का हिस्सा है जो दोनों देश हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती मुखरता के मद्देनज़र बना रहे हैं। हालाँकि बैठकों के ब्यौरे अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन 'उभरती तकनीक' और 'तकनीकी प्रतिस्पर्धा' जैसे शब्द स्पष्ट संकेत देते हैं कि एजेंडा पारंपरिक सैन्य सहयोग से आगे जा चुका है। असली परीक्षा यह होगी कि ये बैठकें ठोस रक्षा सौदों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण या अभ्यासों के रूप में कितनी जल्दी परिणाम देती हैं।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और एडमिरल पापारो की बैठक में क्या हुई चर्चा?
4 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी, समुद्री सहयोग, उभरती तकनीकों के सैन्य उपयोग और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने स्वयं एक्स पर इसकी जानकारी दी।
एडमिरल सैमुअल जे. पापारो की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
एडमिरल पापारो छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और मज़बूत करना है। इसमें डिजिटल रूपांतरण, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
28 सितंबर को हुई भारत-अमेरिका बैठक किन अधिकारियों के बीच थी?
28 सितंबर 2026 को भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और USARPAC के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वोवेल के बीच नई दिल्ली में बैठक हुई थी। इसमें हिंद-प्रशांत के बदलते सुरक्षा हालात और द्विपक्षीय सहयोग के अवसरों पर चर्चा हुई।
हिंद-प्रशांत में भारत-अमेरिका सुरक्षा सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और अमेरिका साझा सामरिक हितों को लेकर एकजुट हो रहे हैं। दोनों देश क्वाड जैसे ढाँचों के तहत समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
इन रक्षा बैठकों से आगे क्या होने की उम्मीद है?
एडमिरल पापारो की शेष यात्रा में भारतीय रक्षा और सैन्य नेतृत्व के साथ और बैठकें अपेक्षित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चर्चाओं से रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त अभ्यास और समुद्री सुरक्षा के ठोस समझौतों की दिशा तय हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले