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इंडो-पैसिफिक 21वीं सदी का सबसे अहम रणभूमि: एडमिरल पैपारो की कांग्रेस में बड़ी चेतावनी

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इंडो-पैसिफिक 21वीं सदी का सबसे अहम रणभूमि: एडमिरल पैपारो की कांग्रेस में बड़ी चेतावनी

सारांश

एडमिरल सैमुअल पैपारो ने अमेरिकी कांग्रेस में इंडो-पैसिफिक को 21वीं सदी का निर्णायक रणभूमि बताया। चीन की छाया रणनीति, रूस को सेमीकंडक्टर आपूर्ति और भारत से गहरे सैन्य सहयोग पर अहम बयान दिए। ताइवान को हथियारों की त्वरित आपूर्ति पर भी जोर दिया।

मुख्य बातें

एडमिरल सैमुअल पैपारो ने 25 अप्रैल को अमेरिकी कांग्रेस में इंडो-पैसिफिक को 21वीं सदी का निर्णायक रणनीतिक क्षेत्र घोषित किया।
चीन रूस की युद्ध मशीन को 90 प्रतिशत सेमीकंडक्टर दे रहा है — पैपारो ने इसे 'बेहद चिंताजनक' बताया।
भारत के साथ सैन्य सहयोग को अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया, संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं।
ताइवान को हथियारों की आपूर्ति 'समय से पहले' होनी चाहिए — पैपारो ने कांग्रेस में दोटूक कहा।
पेंटागन अधिकारी जॉन नोह ने कहा — अमेरिका का लक्ष्य चीन पर प्रभुत्व नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय हितों की रक्षा है।
मानवरहित प्रणालियों और सस्ती-सटीक मारक क्षमता में निवेश बढ़ाने पर जोर — युद्ध का बदलता स्वरूप अमेरिकी रणनीति की चुनौती।

वाशिंगटन, 25 अप्रैल। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पैपारो ने अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र "21वीं सदी का निर्णायक रणनीतिक रणभूमि" है। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन को इस क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए गठबंधन, अग्रिम सैन्य उपस्थिति और तकनीकी बढ़त के जरिए प्रतिरोध क्षमता को हर हाल में बनाए रखना होगा।

कांग्रेस सुनवाई में पैपारो के अहम बयान

इस सप्ताह हुई अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में एडमिरल पैपारो ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रतिरोध क्षमता निरंतर सैन्य अभियानों और सहयोगी देशों के साथ समन्वय पर टिकी है — और यह हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है। उन्होंने कहा, "हम गतिशील युद्ध शक्ति के साथ प्रतिरोध क्षमता विकसित करते हैं और प्रतिदिन सभी क्षेत्रों में अभियान चलाते हैं।"

पैपारो ने यह भी रेखांकित किया कि सहयोगी देश और साझेदार अमेरिका की युद्ध क्षमता और सामर्थ्य दोनों को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा, "हमारे सहयोगी और साझेदार हमारी प्रतिरोध क्षमता की रीढ़ हैं।"

भारत-अमेरिका सैन्य संबंध: बढ़ती प्राथमिकता

भारत की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए एडमिरल पैपारो ने कहा कि नई दिल्ली के साथ सैन्य संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं और यह एक प्राथमिकता वाला सहयोग बना हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच INDUS-X जैसी रक्षा-तकनीक साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की बढ़ती आक्रामकता के मद्देनजर भारत अमेरिका के लिए हिंद-प्रशांत में सबसे अहम संतुलनकारी शक्ति बनता जा रहा है।

चीन की 'छाया रणनीति' पर गंभीर चेतावनी

एडमिरल पैपारो ने चीन के बारे में चेतावनी देते हुए कहा कि बीजिंग का दृष्टिकोण पारंपरिक सैन्य विस्तार से कहीं आगे जाता है। उन्होंने "सूचना संचालन", कूटनीतिक दबाव और कानूनी दांव-पेच जैसी रणनीतियों का उल्लेख किया, जिनका मकसद बिना सीधे युद्ध के क्षेत्रीय व्यवस्था को बदलना है। उन्होंने कहा, "ये सभी ऐसी आकस्मिक स्थितियां हैं, जिनकी हम बहुत गहराई से योजना बनाते हैं।"

पैपारो ने यह भी खुलासा किया कि चीन, रूस को उसकी युद्ध मशीन के लिए 90 प्रतिशत सेमीकंडक्टर और अधिकांश महत्वपूर्ण औद्योगिक उपकरण मुहैया करा रहा है। उन्होंने इस रिश्ते को "बेहद चिंताजनक" करार दिया। गौरतलब है कि यूक्रेन संघर्ष के बाद से चीन-रूस की यह तकनीकी निर्भरता पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़े रणनीतिक खतरों में से एक मानी जा रही है।

युद्ध तकनीक का तेज बदलाव और अमेरिकी रणनीति

युद्ध के बदलते स्वरूप पर एडमिरल पैपारो ने कहा कि अमेरिका को उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा, "हम हर दिन सस्ते, वितरित और सटीक मारक क्षमता का व्यवसायीकरण देखते हैं।" उन्होंने उन्नत और किफायती हथियार प्रणालियों के मिश्रण की वकालत करते हुए कहा, "उत्कृष्ट लक्ष्यों के लिए उत्कृष्ट हथियार, साधारण लक्ष्यों के लिए सस्ते हथियार।" साथ ही उन्होंने मानवरहित प्रणालियों और विस्तार योग्य हथियारों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।

ताइवान, गठबंधन और संसाधनों की चुनौती

पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी जॉन नोह ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य "टकराव के बजाय ताकत के बल पर चीन को रोकना" है और यह सुनिश्चित करना है कि कोई एक शक्ति हिंद-प्रशांत पर हावी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया, "इसका उद्देश्य चीन पर प्रभुत्व नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा है।"

प्रतिनिधि एडम स्मिथ ने चेताया कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अमेरिकी संसाधनों पर दबाव बना रहा है, जिसका असर हिंद-प्रशांत रणनीति पर भी पड़ रहा है। अन्य प्रतिनिधियों ने ताइवान को हथियारों की आपूर्ति में देरी पर गंभीर चिंता जताई। पैपारो ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि आपूर्ति "न केवल समय पर, बल्कि समय से पहले" होनी चाहिए।

इस सुनवाई के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में अमेरिका हिंद-प्रशांत में अपनी सैन्य उपस्थिति और तकनीकी निवेश दोनों को तेज करेगा। भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह इस रणनीतिक साझेदारी में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का खाका है — जिसमें भारत की भूमिका केंद्रीय होती जा रही है। विडंबना यह है कि जब अमेरिका चीन की 'छाया रणनीति' से चिंतित है, तब खुद उसके संसाधन मध्य पूर्व में उलझे हैं। चीन का रूस को सेमीकंडक्टर देना यह साबित करता है कि तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला अब सबसे बड़ा भू-राजनीतिक हथियार बन चुकी है — और भारत को इस खेल में अपनी चिप निर्माण क्षमता तेज करने की जरूरत है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वो यह है कि यह सुनवाई भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के लिए एक नया द्वार खोल सकती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडमिरल पैपारो ने इंडो-पैसिफिक के बारे में क्या कहा?
एडमिरल सैमुअल पैपारो ने अमेरिकी कांग्रेस में कहा कि इंडो-पैसिफिक '21वीं सदी का निर्णायक रणनीतिक क्षेत्र' है। उन्होंने गठबंधन, अग्रिम सैन्य उपस्थिति और तकनीकी बढ़त के जरिए प्रतिरोध बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
चीन की इंडो-पैसिफिक रणनीति क्या है जिससे अमेरिका चिंतित है?
पैपारो के अनुसार चीन सूचना संचालन, कूटनीतिक दबाव और कानूनी दांव-पेच के जरिए बिना सीधे युद्ध के क्षेत्रीय व्यवस्था बदलने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा चीन रूस को 90 प्रतिशत सेमीकंडक्टर और औद्योगिक उपकरण देकर उसकी युद्ध मशीन को ताकत दे रहा है।
भारत-अमेरिका सैन्य संबंध इंडो-पैसिफिक रणनीति में कितने अहम हैं?
एडमिरल पैपारो ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली के साथ सैन्य संबंध एक प्राथमिकता वाला सहयोग है जो लगातार मजबूत हो रहा है। भारत को अमेरिका हिंद-प्रशांत में सबसे अहम क्षेत्रीय साझेदार मानता है।
ताइवान को हथियारों की आपूर्ति पर अमेरिका का क्या रुख है?
एडमिरल पैपारो ने कांग्रेस में कहा कि ताइवान को हथियारों की आपूर्ति 'न केवल समय पर, बल्कि समय से पहले' होनी चाहिए। कई प्रतिनिधियों ने आपूर्ति में देरी और रक्षा उत्पादन में तेजी लाने की जरूरत पर चिंता जताई।
अमेरिका इंडो-पैसिफिक में चीन को कैसे रोकना चाहता है?
पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी जॉन नोह ने स्पष्ट किया कि अमेरिका 'टकराव के बजाय ताकत के बल पर चीन को रोकना' चाहता है। इसका मकसद चीन पर प्रभुत्व नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में अमेरिकी राष्ट्रीय हितों की रक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है।
राष्ट्र प्रेस
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