एच-1बी वीजा पर $1,00,000 फीस से अमेरिकी नौकरियाँ जाएंगी विदेश: सांसद राजा कृष्णमूर्ति की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने 14 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि एच-1बी वीजा पर प्रस्तावित $1,00,000 की वार्षिक फीस अमेरिकी कंपनियों को अपना काम-काज विदेश स्थानांतरित करने पर मजबूर कर सकती है, जिससे अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचेगा। इलिनोइस के डेमोक्रेट सांसद ने इस फीस को 'तकनीकी कर्मचारियों पर टैक्स' करार दिया और कहा कि यह नीति अमेरिकी हितों के विरुद्ध है।
मुख्य बयान और तर्क
कृष्णमूर्ति ने 'स्पिल द टी' इंटरव्यू सीरीज में कहा, 'आप या तो टैलेंट को देश में ला सकते हैं या काम को विदेश भेज सकते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कंपनियाँ इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगी। उनके अनुसार, 'ये कंपनियाँ बस हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेंगी और काम नहीं रोकेंगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब आप इस वर्ग पर $1,00,000 का टैक्स लगाते हैं, तो आप उन्हें शुरुआत में ही बाहर कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जो अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी भूमिकाएँ निभाते हैं और जिन्होंने ऐसी कंपनियाँ बनाई हैं जो लाखों लोगों को रोज़गार देती हैं।'
एच-1बी और भारतीय पेशेवरों का संदर्भ
इंटरव्यू के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वित्त वर्ष 2024 में जारी किए गए कुल एच-1बी वीजा में से 71 प्रतिशत भारतीय नागरिकों को मिले थे। इस आँकड़े के आलोक में कृष्णमूर्ति से पूछा गया कि इस प्रस्तावित नीति का भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर क्या असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा, 'इसका बुरा असर दोनों पर पड़ता है, क्योंकि हमारी प्रतिस्पर्धी क्षमता दुनिया के सबसे बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित करने पर निर्भर करती है — चाहे वे भारत, चीन या स्वीडन के हों। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।' एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष कौशल की आवश्यकता वाले पदों के लिए विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है; प्रौद्योगिकी और परामर्श कंपनियाँ परंपरागत रूप से इसकी सबसे बड़ी उपयोगकर्ता रही हैं।
कानूनी आव्रजन सुधार की माँग
कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी कानूनी आव्रजन प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी आर्थिक माहौल में हमें अपने कानूनी आव्रजन तंत्र को ठीक करना होगा। एच-1बी और अन्य कानूनी मार्गों का इस्तेमाल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हुआ है। हमें आत्म-विनाशकारी गलतियाँ रोकनी होंगी।'
ट्रंप पर आरोप और सामाजिक संदर्भ
कृष्णमूर्ति ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध नफरत को सामान्य बनाने का आरोप लगाया। एशियाई और भारतीय विरोधी भावनाओं के बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, 'इसका जवाब डोनाल्ड ट्रंप के नाम में ही है। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने हाशिए पर माने जाने वाले लोगों के डर का फायदा उठाया और दूसरों को आर्थिक समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया।'
गौरतलब है कि कृष्णमूर्ति 2017 से इलिनोइस के 8वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके पास प्रिंसटन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और हार्वर्ड लॉ स्कूल से विधि की डिग्री है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में उच्च-कुशल आव्रजन नीति पर बहस तेज़ हो रही है और टेक उद्योग इस प्रस्तावित फीस के विरुद्ध सक्रिय रूप से आवाज़ उठा रहा है।