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एच-1बी वीजा पर $1 लाख शुल्क रद्द: अमेरिकी नेताओं ने फैसले को अर्थव्यवस्था की जीत बताया

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एच-1बी वीजा पर $1 लाख शुल्क रद्द: अमेरिकी नेताओं ने फैसले को अर्थव्यवस्था की जीत बताया

सारांश

अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन का एच-1बी वीजा पर $1 लाख का शुल्क असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। सांसद राजा कृष्णमूर्ति, कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा और FIIDS समेत कई नेताओं ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और नवाचार की जीत बताया।

मुख्य बातें

अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी.
सोरोकिन ने ट्रंप प्रशासन के $1 लाख एच-1बी वीजा शुल्क को असंवैधानिक करार देते हुए पूरे देश में रद्द किया।
सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने फैसले को अमेरिकी आर्थिक प्रतिस्पर्धा की रक्षा करने वाला बताया।
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कई राज्यों की ओर से मुकदमे का नेतृत्व किया था।
FIIDS के नीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा कि इससे रोज़गार-आधारित इमिग्रेशन में निष्पक्षता बहाल होगी।
हर वर्ष जारी होने वाले एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है, जिससे यह फैसला भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए $1 लाख (एक लाख डॉलर) के शुल्क को रद्द कर दिया है, जिसके बाद डेमोक्रेटिक सांसदों, राज्य अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। 9 जून को आए इस फैसले को नियोक्ताओं, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कार्यपालिका के पास एच-1बी याचिकाओं पर इस प्रकार का कर लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं था।

फैसले की पृष्ठभूमि

न्यायाधीश सोरोकिन ने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिकी कांग्रेस ने कार्यपालिका को एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाने की शक्ति नहीं दी थी, इसलिए यह शुल्क कानूनी रूप से अमान्य था। अदालत ने इस नीति को पूरे देश में तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। गौरतलब है कि कई राज्यों ने मिलकर इस नीति के विरुद्ध मुकदमा दायर किया था, जिसका नेतृत्व कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने किया।

सांसदों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह फैसला एक ऐसी अवैध नीति को खारिज करता है, जिसने अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुँचाया और व्यवसायों, अस्पतालों, विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों के लिए ज़रूरी उच्च-कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करना कठिन बना दिया था। उन्होंने कहा, 'एच-1बी वीजा कार्यक्रम नवाचार को बढ़ावा देता है, महत्वपूर्ण उद्योगों में अमेरिका की नेतृत्व क्षमता को मज़बूत करता है और कंपनियों को बढ़ने तथा अमेरिका में निवेश करने में मदद करके रोज़गार सृजन का समर्थन करता है।'

कृष्णमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति निर्माताओं को कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना चाहिए, लेकिन अत्यधिक कुशल पेशेवरों को अमेरिका आने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। उनके शब्दों में, 'ऐसी मनमानी बाधाएँ लगाने के बजाय, जो प्रतिभा और निवेश को दूसरे देशों की ओर धकेलती हैं, हमें दुरुपयोग रोकने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए कि अमेरिका दुनिया में नवाचार, कारोबार और आर्थिक विकास के लिए सबसे बेहतर स्थान बना रहे।'

अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने इस फैसले को नियोक्ताओं और सार्वजनिक संस्थानों पर डाले गए अवैध बोझ के विरुद्ध बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, 'ट्रंप प्रशासन का अवैध और महंगा $1 लाख का टैक्स रद्द कर दिया गया है।' बोंटा ने आगे कहा कि यह शुल्क शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों, शोधकर्ताओं और अन्य कुशल पेशेवरों की भर्ती को और कठिन तथा महंगा बना देता, जिनकी विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए सख्त ज़रूरत है।

सांसद सैनफोर्ड बिशप ने भी फैसले की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के अस्पतालों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने पहले ही आगाह किया था कि अतिरिक्त शुल्क से भर्ती प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'नियोक्ताओं के एच-1बी आवेदनों पर $1 लाख की फीस से अमेरिका आने वाली सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का मनोबल टूट जाता और हमारी अर्थव्यवस्था के विकास तथा नवाचार पर असर पड़ता।'

भारतीय डायस्पोरा संगठन का स्वागत

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने भी इस फैसले का स्वागत किया। संगठन के नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा, 'हम संघीय अदालत के उस फैसले का स्वागत करते हैं, जिसने $1 लाख की एच-1बी वीजा फीस को रद्द कर दिया। इससे रोज़गार-आधारित इमिग्रेशन प्रणाली में पूर्वानुमेयता और निष्पक्षता बहाल होगी।' कंद ने कहा कि वैश्विक स्तर की उच्च-कुशल प्रतिभाओं तक पहुँच अमेरिकी प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों की निरंतर वृद्धि के लिए बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह फैसला इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि बड़े नीतिगत बदलाव कानून और आर्थिक वास्तविकताओं के आधार पर ही किए जाने चाहिए।

एच-1बी कार्यक्रम और भारत का संदर्भ

एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों — जिनके पास कम से कम स्नातक डिग्री या समकक्ष योग्यता हो — को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसका सबसे अधिक उपयोग प्रौद्योगिकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों और शोध संगठनों द्वारा किया जाता है। हर वर्ष जारी होने वाले एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है, इसलिए यह कार्यक्रम भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में कुशल विदेशी श्रमिकों की माँग और आव्रजन नीति को लेकर बहस तेज़ है।

आगे की राह

अदालत के इस फैसले के बाद अब नज़रें इस पर हैं कि ट्रंप प्रशासन इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देता है या नहीं। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एच-1बी कार्यक्रम के भविष्य और अमेरिका की वैश्विक प्रतिभा-आकर्षण क्षमता पर दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक बहस को नहीं सुलझाता जो एच-1बी कार्यक्रम में कथित दुरुपयोग को लेकर वर्षों से चली आ रही है। $1 लाख का शुल्क भले ही असंवैधानिक था, परंतु यह उस राजनीतिक दबाव का प्रतिबिंब था जो अमेरिकी श्रमिकों की जगह विदेशी प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने के आरोपों से उपजा था। असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा एच-1बी ढाँचा वास्तव में 'वास्तविक कौशल की कमी' को संबोधित करता है या केवल कम वेतन पर श्रम उपलब्ध कराने का माध्यम बनता है — यह जाँच बिना किसी दंडात्मक शुल्क के भी होनी चाहिए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच-1बी वीजा पर $1 लाख शुल्क क्यों रद्द किया गया?
अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने पाया कि अमेरिकी कांग्रेस ने कार्यपालिका को एच-1बी याचिकाओं पर इस प्रकार का कर लगाने की शक्ति नहीं दी थी, इसलिए यह शुल्क कानूनी रूप से अमान्य था। अदालत ने इसे पूरे देश में तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
इस फैसले से किन्हें सबसे अधिक फायदा होगा?
इस फैसले से प्रौद्योगिकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों को सबसे अधिक राहत मिलेगी, जो उच्च-कुशल विदेशी पेशेवरों की भर्ती के लिए एच-1बी कार्यक्रम पर निर्भर हैं। भारतीय नागरिक, जो हर वर्ष सबसे अधिक एच-1बी वीजा पाते हैं, भी इससे सीधे लाभान्वित होंगे।
राजा कृष्णमूर्ति ने इस फैसले पर क्या कहा?
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह फैसला एक अवैध नीति को खारिज करता है, जिसने अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुँचाया था। उन्होंने कहा कि दुरुपयोग रोकना ज़रूरी है, लेकिन मनमानी बाधाएँ लगाकर प्रतिभाओं को दूसरे देशों की ओर नहीं धकेला जाना चाहिए।
एच-1बी कार्यक्रम भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
हर वर्ष जारी होने वाले एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है, इसलिए इस कार्यक्रम में कोई भी बड़ा बदलाव भारतीय आईटी पेशेवरों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को सीधे प्रभावित करता है। यही कारण है कि FIIDS जैसे भारतीय डायस्पोरा संगठन भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं।
क्या ट्रंप प्रशासन इस फैसले को चुनौती दे सकता है?
अदालत के आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। नीति विशेषज्ञों की नज़र इस पर है कि प्रशासन इस फैसले को स्वीकार करता है या उसे चुनौती देता है।
राष्ट्र प्रेस
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