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एच-1बी वीजा शुल्क रद्द: संघीय अदालत ने कहा — राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना टैक्स लगाने का अधिकार नहीं

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एच-1बी वीजा शुल्क रद्द: संघीय अदालत ने कहा — राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना टैक्स लगाने का अधिकार नहीं

सारांश

अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को असंवैधानिक टैक्स करार देते हुए रद्द कर दिया। न्यायाधीश का स्पष्ट संदेश: राष्ट्रपति इमिग्रेशन के नाम पर कांग्रेस की विशेष टैक्स शक्ति नहीं हड़प सकते।

मुख्य बातें

संघीय न्यायाधीश लियो टी.
सोरोकिन ने 9 जून 2026 को ट्रंप प्रशासन की एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर (₹83 लाख) की अतिरिक्त फीस को पूरी तरह रद्द किया।
42 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि यह फीस वास्तव में एक अनधिकृत टैक्स है, जिसे लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है।
अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है; राष्ट्रपति इसे इमिग्रेशन प्रतिबंध के नाम पर नहीं थोप सकते।
सरकारी एजेंसियों ने नियम बनाने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नियोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
यह फैसला पूरे अमेरिका में लागू है; सरकार के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प है।

अमेरिकी संघीय न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने 9 जून 2026 को ट्रंप प्रशासन की उस नीति को अवैध और पूरी तरह रद्द घोषित कर दिया, जिसके तहत एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) की अतिरिक्त फीस लगाई गई थी। अपने 42 पन्नों के फैसले में न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह मामला इमिग्रेशन नीति का नहीं, बल्कि संवैधानिक शक्तियों के अतिक्रमण का है।

फैसले का मूल आधार

न्यायाधीश सोरोकिन ने अपने फैसले में लिखा, 'अदालत का मानना है कि यह नीति एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाती है, जबकि इसके लिए कांग्रेस ने कोई अधिकार नहीं दिया है। एच-1बी याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर का टैक्स लगाने की अनुमति किसी कानून में नहीं है।' गौरतलब है कि अमेरिकी संविधान के अंतर्गत टैक्स लगाने का अधिकार विशेष रूप से अमेरिकी कांग्रेस को प्रदान किया गया है।

सरकार की दलील और अदालत का खंडन

ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि 1 लाख डॉलर की यह राशि टैक्स नहीं, बल्कि विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्ति का हिस्सा है। न्यायाधीश ने इस दलील को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'टैक्स को प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दिया गया, वे राष्ट्रपति को नियम, प्रतिबंध और शर्तें लगाने की अनुमति देते हैं — परंतु नया टैक्स बनाने की नहीं।

कार्यपालिका की शक्तियों की संवैधानिक सीमा

फैसले में बार-बार रेखांकित किया गया कि राष्ट्रपति के पास इमिग्रेशन मामलों में व्यापक अधिकार होते हैं, किंतु ये असीमित नहीं हैं। न्यायाधीश ने लिखा, 'कार्यपालिका के पास विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निष्कासन को लेकर व्यापक अधिकार हैं, लेकिन ये अधिकार संविधान की सीमाओं या कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।' यह भी कहा गया कि कांग्रेस कुछ मामलों में टैक्स लगाने का अधिकार सरकारी एजेंसियों को सौंप सकती है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट कानूनी अनुमति अनिवार्य है — जो इस मामले में नहीं थी।

प्रक्रियागत खामियाँ भी उजागर

संवैधानिक आपत्तियों के अतिरिक्त, अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित सरकारी एजेंसियों ने नियम बनाने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नियोक्ताओं पर इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत थोपने का कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण भी नहीं दिया। फैसले में कहा गया, 'प्रतिवादियों के पास एच-1बी याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर का टैक्स लगाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।'

भारतीय पेशेवरों पर असर और आगे की राह

यह फैसला उन हज़ारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए राहत की खबर है जो एच-1बी वीजा के ज़रिए अमेरिका में कार्यरत हैं या आवेदन की प्रक्रिया में थे। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन इमिग्रेशन पर कई मोर्चों पर कड़ाई बरत रहा है। अदालत ने इस नीति को पूरे देश में प्रभावी रूप से रद्द कर दिया है, हालाँकि सरकार उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह वास्तव में कांग्रेस की विशेष टैक्स शक्ति को बाईपास करने का प्रयास था। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप-युग की इमिग्रेशन नीतियाँ अदालतों में पलटी हों — लेकिन इस बार संवैधानिक शक्तियों के बँटवारे पर इतना स्पष्ट निर्णय एक नई मिसाल बनाता है। भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि सरकार अपील का रास्ता खुला रखती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस क्यों रद्द की गई?
संघीय न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने इसे अनधिकृत टैक्स करार दिया, क्योंकि अमेरिकी संविधान के तहत नया टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं। ट्रंप प्रशासन इसे इमिग्रेशन प्रतिबंध बता रहा था, लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया।
इस फैसले का भारतीय एच-1बी आवेदकों पर क्या असर होगा?
यह फैसला उन भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए सीधी राहत है जो एच-1बी वीजा के लिए आवेदन करना चाहते थे या जिनके नियोक्ताओं को यह अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता। फैसला पूरे अमेरिका में लागू है, इसलिए कोई भी एजेंसी अब यह फीस नहीं वसूल सकती।
क्या ट्रंप सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है?
हाँ, सरकार के पास उच्च संघीय न्यायालय में अपील का विकल्प खुला है। अभी तक प्रशासन की ओर से अपील को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
न्यायाधीश ने सरकारी एजेंसियों पर और क्या आपत्तियाँ जताईं?
न्यायाधीश ने पाया कि सरकारी एजेंसियों ने नियम बनाने की अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और नियोक्ताओं पर इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत थोपने का कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया। इस आधार पर भी नीति को अवैध माना गया।
क्या राष्ट्रपति के पास इमिग्रेशन पर कोई अधिकार नहीं है?
अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निष्कासन पर व्यापक अधिकार हैं, लेकिन ये असीमित नहीं हैं। राष्ट्रपति नियम, प्रतिबंध और शर्तें लगा सकते हैं, परंतु कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के बिना नया टैक्स नहीं बना सकते।
राष्ट्र प्रेस
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