एच-1बी वीजा पर $1 लाख शुल्क रद्द: व्हाइट हाउस की अपील की तैयारी, ट्रंप प्रशासन का बचाव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी संघीय अदालत द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाए गए $1 लाख (एक लाख डॉलर) के अतिरिक्त शुल्क को गैर-कानूनी घोषित करने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले का पुरज़ोर बचाव किया है और अदालती आदेश को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि प्रशासन ने कांग्रेस की अनुमति के बिना यह शुल्क थोपा, जो कानूनी रूप से अमान्य है।
अदालत का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि
सितंबर 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत नई एच-1बी याचिकाएं दाखिल करने वाले नियोक्ताओं को नियमित शुल्क के अतिरिक्त $1 लाख का भुगतान अनिवार्य किया गया था। जज सोरोकिन ने अपने कड़े शब्दों वाले फैसले में निष्कर्ष निकाला कि यह नीति कांग्रेस द्वारा प्रदत्त किसी भी विधायी अधिकार पर आधारित नहीं है। फैसले में स्पष्ट कहा गया, "अदालत का मानना है कि यह पॉलिसी कांग्रेस की ओर से ज़रूरी अधिकार दिए बिना एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाती है। ऐसी कोई विधायी शक्तियाँ नहीं हैं जो प्रतिवादियों को एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर शुल्क लागू करने का अधिकार देती हों।" अदालत ने इस आदेश को पूरे देश में रद्द कर दिया और उन एजेंसियों की भी आलोचना की जिन्होंने इसे लागू किया था।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
अदालती फैसले के कुछ घंटों बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप के पास किसी भी श्रेणी के विदेशियों के प्रवेश को रोकने का स्पष्ट कानूनी अधिकार है, जिन्हें वे अमेरिका के सर्वोत्तम हित में नहीं मानते, और उन्होंने ठीक यही किया।" उन्होंने यह भी कहा कि "एच-1बी प्रोग्राम का दशकों से दुरुपयोग हो रहा था और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया।"
रोजर्स ने यह भी उल्लेख किया कि वाशिंगटन में एक अन्य संघीय न्यायाधीश इसी तरह के एक आदेश को पहले ही सही ठहरा चुके हैं, और प्रशासन को भरोसा है कि अपील करने पर यह फैसला पलट दिया जाएगा। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने अपील की तारीख या समय-सीमा का कोई ब्यौरा नहीं दिया।
कानूनी दलीलों पर अदालत का रुख
प्रशासन ने तर्क दिया था कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति की व्यापक शक्तियाँ इस शुल्क को उचित ठहराती हैं। अदालत ने इस दलील को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा उद्धृत इमिग्रेशन कानून राष्ट्रपति को इस प्रकार का शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देते। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की एच-1बी कार्यक्रम पर निगरानी कड़ी करने की व्यापक रणनीति के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
भारतीय पेशेवरों और नियोक्ताओं पर असर
एच-1बी वीजा कार्यक्रम में भारतीय आईटी पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। $1 लाख के अतिरिक्त शुल्क से भारतीय कंपनियों और अमेरिकी नियोक्ताओं दोनों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता, और इससे नई याचिकाएं दाखिल करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता। अदालती फैसले से फिलहाल यह बोझ हट गया है, लेकिन अपील की प्रक्रिया में अनिश्चितता बनी रहेगी। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप प्रशासन के इमिग्रेशन संबंधी कदमों को अदालत में चुनौती मिली हो।
आगे क्या होगा
प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे अपील की राह अपनाएंगे और इस उपाय का बचाव जारी रखेंगे। यह मामला अब उच्च न्यायालय में जाने की संभावना है, जहाँ राष्ट्रपति की इमिग्रेशन शक्तियों की सीमाओं पर निर्णायक फैसला हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानूनी लड़ाई आने वाले महीनों तक जारी रह सकती है।