एच-1बी वीजा में बड़े सुधार की तैयारी: ट्रंप प्रशासन का प्रस्ताव व्हाइट हाउस समीक्षा में
सारांश
मुख्य बातें
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में व्यापक बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए 26 अगस्त 2026 को एक प्रस्तावित नियम को व्हाइट हाउस की समीक्षा के लिए भेज दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा तैयार यह प्रस्ताव हर साल हजारों भारतीय और अन्य विदेशी पेशेवरों को सीधे प्रभावित कर सकता है, जो इस वीजा श्रेणी के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।
प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति
DHS ने सोमवार को 'रिफॉर्मिंग द एच-वन-बी नॉनइमिग्रेंट वीजा क्लासिफिकेशन प्रोग्राम' नामक प्रस्तावित नियम को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स (OIRA) के पास समीक्षा के लिए भेजा। फेडरल रेगुलेटरी डॉकेट के अनुसार, इसे अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के तहत एक प्रस्तावित नियम के रूप में दर्ज किया गया है।
इस प्रस्ताव को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इससे प्रतिवर्ष कम से कम 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) का आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, या यह नौकरियों, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है।
विस्तृत प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं
प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधान अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। डॉकेट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रशासन योग्यता के मानकों, नियोक्ता की जरूरतों, वेतन नियमों, वार्षिक चयन प्रक्रिया या अनुपालन नियमों में किस तरह का बदलाव करना चाहता है। OIRA किसी प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है, उसे एजेंसी को वापस भेज सकता है, या बदलाव के साथ स्वीकृति दे सकता है। व्हाइट हाउस समीक्षा पूरी करने की कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है।
गौरतलब है कि नियमों का पूरा विवरण आमतौर पर समीक्षा के बाद फेडरल रजिस्टर में प्रकाशन के साथ सामने आता है, जिसके बाद आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियाँ मांगी जाती हैं।
फीस वृद्धि का अलग प्रस्ताव
यह व्यापक सुधार प्रस्ताव USCIS के एक अन्य प्रस्ताव से अलग है, जो मंगलवार को प्रकाशित हुआ। उसके तहत हर कैप-सब्जेक्ट एच-1बी याचिका पर 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने का प्रस्ताव है। यह फीस नियमित वार्षिक सीमा के तहत आने वाली याचिकाओं और अमेरिकी विश्वविद्यालयों से एडवांस्ड डिग्री रखने वाले विदेशी पेशेवरों पर लागू होगी। हालाँकि, विश्वविद्यालयों, सरकारी शोध संगठनों और गैर-लाभकारी शोध संस्थानों की ओर से दायर कैप-मुक्त याचिकाओं पर यह लागू नहीं होगी। इस फीस प्रस्ताव पर 24 सितंबर तक सार्वजनिक टिप्पणियाँ स्वीकार की जाएंगी।
ग्रेस पीरियड और OPT पर भी विचार
प्रशासन ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के लिए प्रस्तावित फीस की भी समीक्षा कर रहा है, जो विदेशी छात्रों को अपनी डिग्री से जुड़े क्षेत्रों में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देती है। इसके अलावा एक और प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, जिसमें एच-1बी और कुछ अन्य विदेशी कर्मचारियों को नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड समाप्त करने का सुझाव है। यह ग्रेस पीरियड अभी कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने या अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलने का अवसर देती है।
एच-1बी कार्यक्रम: पृष्ठभूमि और भारतीयों पर असर
एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेष ज्ञान वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनके पास आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री होती है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का सर्वाधिक उपयोग होता है। अमेरिकी कांग्रेस हर साल 65,000 नए एच-1बी वीजा की सीमा तय करती है, जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पेशेवर इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं और किसी भी बदलाव का असर सीधे उन पर पड़ेगा। फिलहाल मौजूदा एच-1बी नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए नियोक्ताओं और वीजा धारकों को अभी किसी विशेष कार्रवाई की जरूरत नहीं है।