होर्मुज स्ट्रेट में अस्थायी समुद्री गलियारे पर ईरान-ओमान सहमति, जल्द होगी घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने 26 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि तेहरान में ईरानी समकक्ष के साथ हुई बातचीत के बाद होर्मुज स्ट्रेट में अस्थायी समुद्री गलियारा (कॉरिडोर) स्थापित करने और सुरक्षित जहाजरानी बहाल करने की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई है। यह कूटनीतिक सफलता ऐसे समय में आई है जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है।
बातचीत का मुख्य घटनाक्रम
अल बुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'तेहरान में मेरे सहयोगी डॉ. अराघची के साथ सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई। मुझे उम्मीद है कि हम जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक अस्थायी समुद्री गलियारे और सुरक्षित जहाजरानी बहाल करने के लिए व्यावहारिक व्यवस्थाओं की घोषणा करेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन और स्थायी समाधान पर आगे चलकर काम किया जाएगा, जैसा कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम के अनुच्छेद 5 में उल्लेख है।
ईरान की प्रतिक्रिया और प्रतिबद्धता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी एक्स पर पोस्ट कर क्षेत्रीय समाधान पर जोर दिया। उन्होंने लिखा, 'ईरान की शांति और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता उतनी ही मजबूत है जितनी उसके पड़ोसी देशों के साथ उसके लगातार कूटनीतिक प्रयास। पाकिस्तान और ओमान से आए प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में इस बात पर जोर दिया गया कि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान क्षेत्र के देशों को मिलकर निकालना चाहिए।' अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट के लिए नए समुद्री गलियारे, संयुक्त माइन-क्लियरिंग अभियान और भविष्य के प्रबंधन ढाँचे को इसी सोच का उदाहरण बताया।
इस्लामाबाद मेमोरेंडम की भूमिका
गौरतलब है कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम के अनुच्छेद 5 में होर्मुज स्ट्रेट के दीर्घकालिक प्रबंधन की रूपरेखा पहले से तय की गई है। इस मेमोरेंडम ने ओमान, पाकिस्तान और ईरान के बीच त्रिपक्षीय कूटनीतिक प्रक्रिया को एक वैधानिक आधार दिया है। अल बुसैदी ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय साझेदारों के साथ बातचीत शांति, सहयोग, स्थिरता और समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र एवं सुरक्षित आवाजाही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी रहेगी।
वैश्विक व्यापार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस जलमार्ग में किसी भी बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है, जिससे भारत सहित एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ प्रभावित होती हैं।
आगे क्या होगा
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, अस्थायी समुद्री गलियारे की व्यावहारिक व्यवस्थाओं की औपचारिक घोषणा जल्द अपेक्षित है। इसके साथ ही संयुक्त माइन-क्लियरिंग अभियान की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट के स्थायी प्रबंधन पर बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद मेमोरेंडम के ढाँचे में जारी रहेगा।