4 अगस्त 2026
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होर्मुज स्ट्रेट को हाईवे बनाने की योजना: ईरान-ओमान बातचीत, ट्रंप और अमेरिका दरकिनार

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होर्मुज स्ट्रेट को हाईवे बनाने की योजना: ईरान-ओमान बातचीत, ट्रंप और अमेरिका दरकिनार

सारांश

ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने अमेरिका को दरकिनार करते हुए ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट में एक सिंगल टू-वे शिपिंग कॉरिडोर बनाने की बातचीत शुरू की है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है — बशर्ते ओमान सहमत हो।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 4 अगस्त 2026 को पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट में सिंगल टू-वे कॉरिडोर के लिए ओमान के साथ बातचीत जारी है।
प्रस्तावित कॉरिडोर मौजूदा टीएसएस (ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम) की जगह लेगा, जिसे आईएमओ ने 1968 में अपनाया था।
ओमान ने अभी तक न तो बातचीत की पुष्टि की है और न ही इनकार किया है।
बाघेई ने स्पष्ट किया कि वार्ता में अमेरिका शामिल नहीं है; ट्रंप के दावों को नकारा।
ईरान अपने तटीय मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस ले सकता है — इसे 'टोल' नहीं कहा जाएगा।
आईएमओ ने खदानों की मौजूदगी के कारण जहाजों को टीएसएस मार्ग से बचने की सलाह दी है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 4 अगस्त 2026 को तेहरान में एक प्रेस ब्रीफिंग में खुलासा किया कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में एक सिंगल टू-वे शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने को लेकर सक्रिय बातचीत जारी है। यह प्रस्तावित व्यवस्था मौजूदा बहु-लेन ट्रैफिक सेपरेशन प्रणाली की जगह लेगी और दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण ऊर्जा जलमार्ग को फिर से व्यापार के लिए खोलने का रास्ता बन सकती है।

प्रस्तावित कॉरिडोर की संरचना

बाघेई के अनुसार, प्रस्तावित अंतरिम कॉरिडोर मौजूदा उत्तरी और दक्षिणी अलग-अलग रूटों को एक सिंगल इंटरमीडिएट कॉरिडोर से बदलेगा। इस व्यवस्था में जहाज दाहिने हाथ की लेन में चलेंगे — ठीक किसी हाईवे की तरह। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी की ओर जाने वाले जहाज ईरान के तटीय मार्ग का उपयोग करेंगे, जबकि बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की तरफ के मार्ग से गुजरेंगे।

बाघेई ने स्पष्ट किया कि यह कॉरिडोर तब तक अस्थायी रूप से काम करेगा जब तक ईरान और ओमान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) के स्थायी विकल्प पर सहमति नहीं बना लेते। गौरतलब है कि यूएन के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने 1968 में ईरान और ओमान द्वारा प्रस्तावित इस टीएसएस को अपनाया था, जिसमें दोनों दिशाओं के लिए 2 मील चौड़ी लेनें और उनके बीच 2 मील का पृथक्करण क्षेत्र निर्धारित है।

ओमान की चुप्पी और अमेरिका की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में ओमान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी — न तो बातचीत की पुष्टि की और न ही इनकार किया। यह रणनीतिक चुप्पी खाड़ी कूटनीति में ओमान की परंपरागत मध्यस्थ भूमिका के अनुरूप है।

बाघेई ने यह भी स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं में कोई तीसरा देश शामिल नहीं है — जिसका अर्थ है कि अमेरिका इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर है। यह उल्लेखनीय है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि स्ट्रेट को फिर से खोलने पर ईरान के साथ बातचीत हो रही है — जिसे बाघेई ने सीधे नकार दिया।

मौजूदा संकट की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव चरम पर है। तेहरान ने स्ट्रेट में माइनिंग की है और वहाँ से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर हमले भी किए हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को अवरुद्ध कर दिया है और उल्लंघन करने वाले जहाजों पर कार्रवाई की है। आईएमओ ने भी खदानों की मौजूदगी की खबरों के मद्देनजर जहाजों को टीएसएस मार्ग से बचने की सलाह दी है।

अमेरिकी नौसेना ने कुछ जहाजों को ओमान की तरफ से एस्कॉर्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन उन जहाजों पर हमलों के बाद यह प्रयास रोक दिया गया। बाघेई ने कहा कि ओमानी जल क्षेत्र से होकर गुजरने वाला दक्षिणी मार्ग — जिसे वाशिंगटन चलाना चाहता था — जून में हुए ईरान-अमेरिका सहमति-पत्र का उल्लंघन था और इससे पर्यावरणीय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न हुईं।

सर्विस फीस का विवादास्पद सवाल

रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान अपने हिस्से से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस ले सकता है। इसे आधिकारिक तौर पर 'टोल' नहीं कहा जाएगा ताकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन न माना जाए — एक ऐसा बिंदु जिसका ट्रंप ने कड़ा विरोध किया है। ब्रीफिंग में बाघेई ने फीस के सवाल को सीधे टाल दिया।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा वहन करती है। यदि ईरान और ओमान इस कॉरिडोर पर सहमत होते हैं, तो यह उन देशों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत लेकर आएगा जो ऊर्जा शिपिंग में बाधा के कारण संकट में हैं। यह वार्ता सफल होती है या नहीं, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा — लेकिन इस कदम ने वैश्विक कूटनीति में एक नई धुरी जरूर बना दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह एक सुविचारित भू-राजनीतिक चाल है — अमेरिका को वार्ता-मेज से हटाकर होर्मुज पर संप्रभुता का दावा मजबूत करना। ट्रंप के उस दावे को सीधे नकारना कि ईरान-अमेरिका बातचीत हो रही है, तेहरान की यह संदेश देने की कोशिश है कि वह किसी भी समाधान में वाशिंगटन की भूमिका स्वीकार नहीं करेगा। ओमान की रणनीतिक चुप्पी उसकी परंपरागत मध्यस्थ छवि को बनाए रखने की कोशिश है, लेकिन यदि वह इस व्यवस्था में शामिल होता है तो वह अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान के साथ द्विपक्षीय ढाँचे को वैधता देगा। सर्विस फीस का मुद्दा सबसे विस्फोटक है — इसे 'टोल' न कहने की भाषाई कलाबाजी अंतरराष्ट्रीय कानून की परीक्षा लेगी और ट्रंप प्रशासन के लिए एक नई टकराव की जमीन तैयार करेगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट में किस तरह की व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं?
दोनों देश मौजूदा बहु-लेन ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम की जगह एक सिंगल टू-वे शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर बात कर रहे हैं, जिसमें जहाज हाईवे की तरह दाहिने हाथ की लेन में चलेंगे। खाड़ी की ओर जाने वाले जहाज ईरान के तटीय मार्ग और बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की तरफ के मार्ग से गुजरेंगे।
इस बातचीत में अमेरिका की क्या भूमिका है?
ईरान के प्रवक्ता बाघेई ने स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं में कोई तीसरा देश शामिल नहीं है, यानी अमेरिका इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर है। राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को भी नकारा गया जिसमें उन्होंने कहा था कि स्ट्रेट को खोलने पर ईरान के साथ बातचीत हो रही है।
होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा संकट कैसे शुरू हुआ?
ईरान ने स्ट्रेट में माइनिंग की और वहाँ से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों पर हमले किए, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को अवरुद्ध कर दिया। आईएमओ ने भी खदानों की मौजूदगी के कारण जहाजों को मौजूदा टीएसएस मार्ग से बचने की सलाह दी है।
क्या ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेगा?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अपने तटीय मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस ले सकता है। इसे आधिकारिक तौर पर 'टोल' नहीं कहा जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन न हो — हालाँकि बाघेई ने प्रेस ब्रीफिंग में इस सवाल को सीधे टाल दिया।
टीएसएस क्या है और इसे क्यों बदला जा रहा है?
ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) एक समुद्री यातायात प्रणाली है जिसे आईएमओ ने 1968 में अपनाया था। इसमें दोनों दिशाओं के लिए 2 मील चौड़ी लेनें और बीच में 2 मील का पृथक्करण क्षेत्र है। मौजूदा खदानों और सुरक्षा खतरों के कारण इसे अस्थायी रूप से बदलने की कोशिश हो रही है।
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