होर्मुज स्ट्रेट संकट: ईरान के अराघची ने जर्मनी से की चर्चा, अमेरिका-इजरायल को ठहराया जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने 11 अगस्त 2026 को टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव के कारणों पर केंद्रित चर्चा हुई। अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग में पैदा हुई अस्थिरता पूरी तरह अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का परिणाम है।
मुख्य घटनाक्रम
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्टों के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श किया। अराघची ने वाडेफुल को ओमान के साथ जारी वार्ताओं की जानकारी दी, जिनका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।
अराघची का अमेरिका पर आरोप
अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि होर्मुज स्ट्रेट के संभावित बंद होने से उत्पन्न होने वाले सुरक्षा और आर्थिक दुष्परिणामों के लिए अमेरिकी प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग में स्थिरता बहाल करने के लिए अमेरिका की आक्रामक कार्रवाइयों और कथित गैरकानूनी दखलअंदाजी को समाप्त करना अनिवार्य है। इसमें समुद्री नाकाबंदी और इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत अमेरिका की प्रतिबद्धताओं के कथित उल्लंघन भी शामिल हैं।
अमेरिका के साथ वार्ता पर ईरान का रुख
अराघची पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। हालाँकि, कुछ मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच संवाद पुनः स्थापित कराने के रास्ते तलाश रहे हैं। उनके अनुसार, जब तक अमेरिका समझौते का उल्लंघन बंद नहीं करता और पूर्व के उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता, तब तक वार्ता फिर से शुरू होना संभव नहीं है।
कूटनीतिक प्रयासों पर जोर
दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि विभिन्न स्तरों पर कूटनीतिक संपर्क और बातचीत निरंतर जारी रखी जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट — जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है — पर तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि यह जलमार्ग मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में हमेशा से एक संवेदनशील बिंदु रहा है। आने वाले दिनों में ओमान के माध्यम से जारी मध्यस्थता प्रयासों की दिशा पर सबकी नजर रहेगी।