एच-1बी वीजा पर 3 साल का प्रतिबंध! अमेरिकी संसद में नया विधेयक पेश, भारतीयों पर बड़ा असर
सारांश
Key Takeaways
- एली क्रेन ने 25 अप्रैल 2026 को अमेरिकी संसद में एच-1बी वीजा पर 3 साल की रोक लगाने का विधेयक पेश किया।
- वार्षिक एच-1बी वीजा सीमा 65,000 से घटाकर 25,000 करने का प्रस्ताव है।
- न्यूनतम वार्षिक वेतन 2,00,000 डॉलर (लगभग ₹1.67 करोड़) तय करने की मांग की गई है।
- लॉटरी प्रणाली खत्म होगी और वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लागू की जाएगी।
- OPT कार्यक्रम समाप्त होगा और एच-1बी धारकों को ग्रीन कार्ड मिलने का रास्ता बंद होगा।
- ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स सहित कई रिपब्लिकन सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया।
अमेरिकी संसद में 25 अप्रैल 2026 को रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने एच-1बी वीजा जारी करने पर तीन वर्षों के लिए पूर्ण रोक लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। "एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026" नामक यह विधेयक अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देने और वीजा प्रणाली में व्यापक सुधार करने के उद्देश्य से लाया गया है। इस विधेयक के प्रावधान लागू हुए तो भारतीय आईटी पेशेवरों पर सबसे गहरा असर पड़ेगा।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
इस विधेयक को प्रतिनिधि एली क्रेन ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा, "संघीय सरकार को मेहनती नागरिकों के लिए काम करना चाहिए, न कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के मुनाफे के लिए।" क्रेन के अनुसार, यह विधेयक रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करेगा और अमेरिकी नागरिकों को नौकरी में प्राथमिकता देगा।
विधेयक में वार्षिक एच-1बी वीजा सीमा को 65,000 से घटाकर 25,000 करने का प्रस्ताव है और सभी मौजूदा छूटों को समाप्त करने की बात कही गई है। इसके अलावा, वर्तमान लॉटरी प्रणाली की जगह वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लागू की जाएगी और न्यूनतम वार्षिक वेतन 2,00,000 डॉलर (लगभग ₹1.67 करोड़) निर्धारित किया जाएगा।
नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उन्हें कोई योग्य अमेरिकी उम्मीदवार नहीं मिल रहा और उन्होंने हाल ही में किसी कर्मचारी की छंटनी नहीं की है। एच-1बी धारकों को एक साथ एक से अधिक नौकरियां करने और तृतीय-पक्ष भर्ती एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त होने पर भी रोक लगाई जाएगी।
अन्य कड़े प्रतिबंध और प्रावधान
विधेयक में वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही एच-1बी धारकों को अपने आश्रितों को अमेरिका लाने से रोका जाएगा और उन्हें ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास में परिवर्तित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि गैर-आप्रवासी वीजा धारकों को किसी अन्य वीजा श्रेणी में जाने से पहले अमेरिका छोड़ना होगा और संघीय एजेंसियां ऐसे कामगारों को प्रायोजित नहीं कर सकेंगी।
रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन और बयान
इस विधेयक को ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स सहित कई रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन मिला है। ब्रैंडन गिल ने कहा कि वे इस विधेयक के सह-प्रायोजक होने पर गर्व महसूस करते हैं क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका की आप्रवासन प्रणाली विदेशियों से पहले अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता दे।
पॉल गोसर ने आरोप लगाया, "एच-1बी कार्यक्रम का दुरुपयोग अमेरिकी कामगारों को सस्ते विदेशी श्रम से बदलने के लिए किया गया है।" वहीं एंडी ओगल्स ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को अपने ही देश में पराया नहीं बनने दिया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय और भारत पर प्रभाव
इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट की सह-संस्थापक रोज़मेरी जेनक्स ने इसे "अमेरिकी संसद में अब तक पेश किया गया सबसे कड़ा एच-1बी विधेयक" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एच-1बी वीजा को उसके मूल अस्थायी स्वरूप में वापस लाएगा।
गौरतलब है कि भारतीय नागरिक ऐतिहासिक रूप से एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं और अमेरिका के तकनीकी व इंजीनियरिंग क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि यह विधेयक पारित होता है तो भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में काम करने वाले लाखों भारतीय पेशेवरों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही तेज है। आलोचकों का मानना है कि यह कार्यक्रम घरेलू वेतन को कम करता है, जबकि उद्योग जगत इसे अमेरिकी नवाचार और अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य मानता है। अब देखना होगा कि यह विधेयक अमेरिकी संसद में कितना समर्थन जुटा पाता है और क्या यह कानून का रूप ले सकेगा।