एच-1बी वीजा फीस $1,03,265: अमेरिका के 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ट्रंप प्रशासन के खिलाफ
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्तावित नियम का सख्त विरोध किया है, जिसमें कुछ एच-1बी वीजा याचिकाओं पर $1,03,265 (लगभग ₹86 लाख) तक की फीस लगाने की बात कही गई है। अटॉर्नी जनरल्स का तर्क है कि यह प्रस्ताव गैर-कानूनी है और इससे शिक्षकों, डॉक्टरों एवं नर्सों की पहले से चली आ रही कमी और गहरी हो जाएगी।
प्रस्ताव का पूरा ब्यौरा
यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने 25 अगस्त 2026 को एक प्रस्तावित नियम बनाने का नोटिस जारी किया था। इसके तहत उन नियोक्ताओं द्वारा दायर एच-1बी याचिकाओं पर $1,03,265 का अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना है, जो वार्षिक एच-1बी वीजा कैप से छूट प्राप्त नहीं हैं। वर्तमान में अस्पताल, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और कुछ गैर-लाभकारी संगठन इस कैप से बाहर हैं, लेकिन नया शुल्क उन पर भी लागू होगा।
गौरतलब है कि एच-1बी कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशिष्ट कौशल वाले विदेशी पेशेवरों — जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं — को नियुक्त करने की अनुमति देता है। आमतौर पर इसके लिए कम से कम स्नातक डिग्री या समकक्ष योग्यता आवश्यक होती है।
अटॉर्नी जनरल्स के कानूनी तर्क
गठबंधन ने USCIS को एक औपचारिक कमेंट लेटर दाखिल कर प्रस्तावित नियम वापस लेने की माँग की है। उनके मुख्य कानूनी आपत्तियाँ तीन स्तरों पर हैं — पहला, अटॉर्नी जनरल्स ने इस शुल्क को 'टैक्स' की संज्ञा दी और तर्क दिया कि कार्यपालिका शाखा बिना कांग्रेस की मंजूरी के ऐसा कर नहीं सकती। दूसरा, यह नियम इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत USCIS के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। तीसरा, यह एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर एक्ट का उल्लंघन करता है।
गठबंधन ने यह भी एतराज जताया कि USCIS ने केवल 30 दिन का पब्लिक कमेंट पीरियड रखा, जिसे वे अपर्याप्त मानते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने कम नुकसानदायक विकल्पों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया।
वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल की तीखी प्रतिक्रिया
वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल जे जोन्स ने इस गठबंधन की अगुवाई करते हुए कहा, 'इस श्रेणी के लोग कागजों पर सिर्फ नाम नहीं हैं, वे हमारे शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, देखभाल करने वाले और बहुत कुछ हैं। वे हमारे पड़ोसी, दोस्त और परिवार हैं।' उन्होंने आगे कहा कि ये पेशेवर हर सरकारी औपचारिकता पूरी कर अमेरिका आए हैं।
जोन्स ने डोनाल्ड ट्रंप पर समुदायों और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पर विचार किए बिना कार्यकारी शक्तियों का विस्तार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'हम अपने समुदायों के लिए लड़ते हैं, और मेरा ऑफिस यह सुनिश्चित करने के लिए हर कानूनी साधन का इस्तेमाल करेगा कि यह प्रस्ताव आगे न बढ़े।'
आम जनता और जरूरी सेवाओं पर असर
अटॉर्नी जनरल्स ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी फीस के कारण राज्य और स्थानीय संस्थानों के लिए कुशल विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करना और भी कठिन हो जाएगा। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सार्वजनिक सेवाओं में पहले से मौजूद कमी और गहरी हो सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के कई राज्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में चिकित्सकों और शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। भारतीय पेशेवर — जो एच-1बी धारकों का एक बड़ा हिस्सा हैं — इन्हीं क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कोशिश
गठबंधन ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है — पिछले प्रयास में भी ट्रंप प्रशासन ने ऐसा ही शुल्क लगाने की कोशिश की थी, जिसे बाद में रद्द करना पड़ा था। गठबंधन के अनुसार, नया प्रस्ताव कांग्रेस से मंजूरी लेने के बजाय फिर से प्रशासनिक रास्ते से टैक्स लगाने का प्रयास है। इस गठबंधन में वर्जीनिया, कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स, एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, मेन, मैरीलैंड, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवाडा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, वॉशिंगटन, विस्कॉन्सिन और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया शामिल हैं।
आने वाले हफ्तों में USCIS के इस प्रस्ताव पर अदालती चुनौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।