एच-1बी वीजा शुल्क में ₹86 लाख की प्रस्तावित बढ़ोतरी पर नैसकॉम सतर्क, सभी हितधारकों से संवाद जारी
सारांश
मुख्य बातें
नैसकॉम ने मंगलवार, 25 अगस्त को स्पष्ट किया कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित एच-1बी वीजा शुल्क में 1,03,265 डॉलर (लगभग ₹86 लाख) की भारी बढ़ोतरी को इस कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के संदर्भ में परखा जाना चाहिए। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का यह शीर्ष संगठन सभी प्रमुख हितधारकों के साथ सक्रिय संवाद बनाए हुए है और स्थिति पर निरंतर नजर रख रहा है।
प्रस्तावित शुल्क का पूरा ब्यौरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा की वार्षिक सीमा के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक याचिका पर 1,03,265 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह शुल्क सभी मौजूदा शुल्कों के ऊपर अलग से देय होगा। इसमें वे आवेदक भी शामिल होंगे जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों से परास्नातक या उससे उच्च डिग्री प्राप्त करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए उपलब्ध 20,000 अतिरिक्त वीजा की विशेष श्रेणी के तहत आवेदन करते हैं।
यह अभी एक प्रस्तावित नियम है और संबंधित पक्षों को अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अनुमान के अनुसार, इस प्रस्ताव से प्रतिवर्ष लगभग 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है — यह अनुमान हर वर्ष दायर होने वाली लगभग 85,000 एच-1बी याचिकाओं के आधार पर लगाया गया है।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस शुल्क का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली की परिचालन लागत की भरपाई करना है। इसमें लाभ आवेदन निपटान, धोखाधड़ी की पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा जांच, सरकारी प्रणालियों का आधुनिकीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे खर्च शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासन का तर्क है कि इससे कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिकी नागरिकों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए प्रेरणा मिलेगी।
गौरतलब है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत अमेरिका हर वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी करता है, और परास्नातक डिग्रीधारकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध हैं।
नैसकॉम का पक्ष और भारतीय IT उद्योग का योगदान
नैसकॉम ने अपने बयान में रेखांकित किया कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम दशकों से अमेरिका में अल्पकालिक कौशल की कमी को पूरा करने का एक अहम माध्यम रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि पिछले 5 वर्षों में अमेरिकी बाजार में कार्यरत भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के एच-1बी कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, क्योंकि कंपनियों ने स्थानीय भर्ती बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
नैसकॉम के अनुसार, भारतीय IT कंपनियों ने अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) शिक्षा को मजबूत करने के लिए 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसके तहत 130 से अधिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ साझेदारी की गई है, जिससे लगभग 29 लाख छात्रों को लाभ पहुंचा है और 2.55 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया है।
आम जनता और उद्योग पर असर
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत सहित अन्य देशों के कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की प्रति-याचिका लागत में भारी वृद्धि होगी। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत वृद्धि छोटी और मध्यम आकार की प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए विशेष रूप से कठिन होगी, जो वैश्विक प्रतिभा पर अधिक निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी प्रशासन आव्रजन नीतियों को व्यापक रूप से कड़ा कर रहा है।
आगे क्या होगा
30 दिनों की सार्वजनिक टिप्पणी अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा। नैसकॉम ने संकेत दिया है कि वह इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेगा। भारतीय IT उद्योग की नजर इस नियम के अंतिम स्वरूप पर टिकी है, क्योंकि इसका सीधा असर भारत से अमेरिका जाने वाले लाखों तकनीकी पेशेवरों पर पड़ सकता है।