हैती के केन्सकॉफ में गैंग का नरसंहार: चर्च में शरण लिए 50 से अधिक विस्थापित मारे गए
सारांश
मुख्य बातें
हैती के केन्सकॉफ कस्बे में रविवार, 24 अगस्त 2026 की रात सशस्त्र गैंग सदस्यों ने एक चर्च में शरण लिए विस्थापित नागरिकों पर बर्बर हमला किया, जिसमें स्थानीय अधिकारियों के अनुसार 50 से अधिक लोगों की जान चली गई। पोर्ट-ऑ-प्रिंस से मात्र 10 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित इस पहाड़ी कस्बे में हुई यह हिंसा सोमवार तक जारी रही, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ अभी भी लापता हैं।
हमले का घटनाक्रम
केन्सकॉफ के मेयर मैसिलॉन जीन के अनुसार, हमला रविवार रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और सोमवार तक जारी रहा। 'विव अनसानम' गठबंधन के सशस्त्र सदस्यों ने कस्बे के कई इलाकों में एक साथ हमला बोला। निशाने पर लिए गए क्षेत्रों में टाउन सेंटर, म्युनिसिपल बिल्डिंग के पास विलियर स्ट्रीट, वियार्ड 1, मैडेलीन, फर्माथे 52 और थॉमसिन 48 शामिल थे।
मेयर जीन ने सोमवार को बताया कि 40 शव बरामद हो चुके हैं और कई लोग अभी भी लापता हैं। मारे गए लोगों में वे विस्थापित नागरिक भी शामिल थे जो पहले अन्य इलाकों में हुई गैंग हिंसा से भागकर इस चर्च में आश्रय लिए हुए थे। कुछ पीड़ितों की हत्या अत्यंत बर्बर तरीके से की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया
हमले के बाद प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमे के कार्यालय ने एक बयान जारी कर शोक संतप्त परिवारों और पीड़ितों के प्रति "गहरी संवेदना" व्यक्त की। सरकार ने केन्सकॉफ में सुरक्षा बहाल करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। गौरतलब है कि यह कस्बा महीनों से गैंग हिंसा का शिकार रहा है और सशस्त्र समूह लगातार अपने नियंत्रण का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।
हैती में गैंग हिंसा की पृष्ठभूमि
अमेरिकी महाद्वीप के सबसे गरीब देश हैती में वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाएँ, भ्रष्टाचार और सशस्त्र गैंग की हिंसा का दौर जारी है। ये गैंग बड़े पैमाने पर हत्याओं, बलात्कार, लूटपाट और अपहरण के लिए जिम्मेदार हैं। पोर्ट-ऑ-प्रिंस के बड़े हिस्से पर इन्हीं गैंग का कब्जा है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हैती में 2016 के बाद से कोई चुनाव नहीं हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति जोवेनेल मोइस की जुलाई 2021 में हत्या कर दी गई थी और उनकी जगह किसी नए राष्ट्रपति को नियुक्त नहीं किया गया। देश में दिसंबर 2026 में आम चुनाव होने हैं।
आम जनता पर असर
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, लगभग 1.1 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब 15 लाख लोग विस्थापित हैं, जबकि 50 लाख से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा की स्थिति से गुजर रहे हैं। केन्सकॉफ का यह हमला उन लोगों को निशाना बनाता है जो पहले से ही हिंसा से भागकर आए थे — यह दर्शाता है कि देश में विस्थापितों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।
आगे क्या होगा
सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गैंग के ढाँचे को व्यवस्थित रूप से तोड़ा नहीं जाता, तब तक इस तरह की घटनाएँ रुकने की संभावना कम है। दिसंबर 2026 के चुनावों से पहले स्थिरता बहाल करना हैती सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।