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टेक्सास में भारतीय झंडा फाड़े जाने पर 6 भारतीय-अमेरिकी सांसदों की कड़ी निंदा, समुदाय के साथ एकजुटता

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टेक्सास में भारतीय झंडा फाड़े जाने पर 6 भारतीय-अमेरिकी सांसदों की कड़ी निंदा, समुदाय के साथ एकजुटता

सारांश

टेक्सास के फ्रिस्को में भारतीय तिरंगा फाड़े जाने की घटना ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी। अमेरिकी कांग्रेस के छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने एकजुट होकर इस भारत-विरोधी कृत्य की निंदा की और 50 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकियों के साथ अपनी एकजुटता जताई।

मुख्य बातें

फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर इमिग्रेशन-विरोधी प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फाड़ दिया।
प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति , अमी बेरा , प्रमिला जयपाल , रो खन्ना , श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने संयुक्त बयान जारी कर घटना की निंदा की।
ये छह सांसद अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक साथ काम करने वाले भारतीय-अमेरिकियों का अब तक का सबसे बड़ा समूह हैं।
अमेरिका में 50 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं; फ्रिस्को उनका एक प्रमुख केंद्र है।
सांसदों ने जेनोफोबिया और भारत-विरोधी हिंसा को अस्वीकार्य बताते हुए समुदाय की सुरक्षा की माँग की।

अमेरिकी कांग्रेस के छह भारतीय-अमेरिकी सदस्यों ने टेक्सास के फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर इमिग्रेशन से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय तिरंगा फाड़े जाने की कड़ी निंदा की है। जेनोफोबिया और भारत-विरोधी बयानबाज़ी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इन सांसदों ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ अपनी एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने भारत-विरोधी नारों के बीच भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फाड़ दिया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया और पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। इसके बाद प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया।

सांसदों का बयान

सांसदों ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा, "हम सभी अमेरिकियों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का पुरजोर समर्थन करते हैं। साथ ही, हम फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर भारत-विरोधी नफरत भरे बयानों के साथ भारतीय झंडा फाड़े जाने की निंदा करते हैं, क्योंकि ऐसी हरकतें भारत-विरोधी हिंसा और जेनोफोबिया को बढ़ावा देती हैं।"

बयान में आगे कहा गया, "किसी भी समुदाय को निशाना बनाकर नफरत और डराने-धमकाने वाली हरकतें अस्वीकार्य हैं और हमारे देश में इनके लिए कोई जगह नहीं है। भारतीय-अमेरिकी और दक्षिण एशियाई-अमेरिकी समुदाय जब उत्पीड़न, जेनोफोबिया और नफरत का सामना करें, तो नेताओं को स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की ताकत और भूमिका

गौरतलब है कि ये छह सांसद अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक साथ काम करने वाले भारतीय-अमेरिकी सदस्यों का अब तक का सबसे बड़ा समूह हैं। इन्होंने मिलकर अक्सर प्रवासी समुदायों, नागरिक अधिकारों और अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी हितों से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठाई है।

आज अमेरिका में 50 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी निवास करते हैं और वे देश के सर्वाधिक शिक्षित तथा आर्थिक रूप से सफल जातीय समुदायों में गिने जाते हैं। इस समुदाय ने कांग्रेस, राज्य विधानसभाओं, स्थानीय प्रशासन और प्रौद्योगिकी व व्यापार जगत में अपनी उपस्थिति लगातार मज़बूत की है।

फ्रिस्को: भारतीय-अमेरिकियों का अहम केंद्र

डलास के उत्तर में स्थित फ्रिस्को में पिछले दो दशकों में तेज़ी से जनसंख्या वृद्धि हुई है और यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी परिवार बसे हुए हैं। यह शहर प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, वित्त और अन्य क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो टेक्सास में भारतीय समुदाय के बढ़ते विस्तार को रेखांकित करता है।

आगे क्या

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा अपराधों की घटनाएँ चर्चा में हैं। सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे फ्रिस्को और पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ खड़े हैं और हर व्यक्ति को सम्मान व सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह निंदा ठोस विधायी कदमों में बदलेगी या केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी। भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती राजनीतिक ताकत के बावजूद, जमीनी स्तर पर जेनोफोबिक घटनाओं की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि प्रतिनिधित्व और सुरक्षा के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेक्सास के फ्रिस्को में भारतीय झंडे के साथ क्या हुआ?
फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर इमिग्रेशन से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने भारत-विरोधी नारों के बीच भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फाड़ दिया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की और पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय में आक्रोश फैल गया।
किन भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने इस घटना की निंदा की?
अमेरिकी कांग्रेस के छह भारतीय-अमेरिकी सदस्यों — राजा कृष्णमूर्ति, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम — ने संयुक्त बयान जारी कर इस भारत-विरोधी कृत्य की निंदा की। ये हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक साथ काम करने वाले भारतीय-अमेरिकियों का अब तक का सबसे बड़ा समूह हैं।
सांसदों ने अपने बयान में क्या कहा?
सांसदों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए भी स्पष्ट किया कि भारत-विरोधी नफरत भरे बयान और झंडा फाड़ने जैसी हरकतें जेनोफोबिया और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को नफरत का निशाना बनाना अस्वीकार्य है और भारतीय-अमेरिकियों को सम्मान व सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार है।
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय कितना बड़ा है?
अमेरिका में फिलहाल 50 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं और वे देश के सर्वाधिक शिक्षित व आर्थिक रूप से सफल जातीय समुदायों में गिने जाते हैं। इस समुदाय की कांग्रेस, राज्य विधानसभाओं और प्रौद्योगिकी-व्यापार जगत में भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
फ्रिस्को में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की क्या भूमिका है?
डलास के उत्तर में स्थित फ्रिस्को पिछले दो दशकों में तेज़ी से बढ़ा है और यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी परिवार बसे हुए हैं। यह शहर प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और वित्त क्षेत्र के पेशेवरों का प्रमुख केंद्र है, जो टेक्सास में भारतीय समुदाय के विस्तार को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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