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हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी 2025: 14 राज्यों के 160 हिंदू-अमेरिकियों ने कैपिटल हिल पर उठाई हिंदू विरोधी नफरत की आवाज़

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हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी 2025: 14 राज्यों के 160 हिंदू-अमेरिकियों ने कैपिटल हिल पर उठाई हिंदू विरोधी नफरत की आवाज़

सारांश

14 राज्यों से आए 160 हिंदू-अमेरिकी प्रतिनिधि कैपिटल हिल पहुँचे — और इस बार सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने नहीं। CoHNA के पाँचवें वार्षिक एडवोकेसी दिवस पर 50 से अधिक सांसदों से सीधी बात हुई — हिंदू विरोधी नफरत, मंदिरों पर हमले और समुदाय को 'विदेशी एजेंट' बताने की प्रवृत्ति पर।

मुख्य बातें

CoHNA के पाँचवें वार्षिक हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी में 14 राज्यों से करीब 160 प्रतिनिधियों ने 1 जुलाई को वाशिंगटन डी.सी.
प्रतिनिधिमंडल ने 50 से अधिक सांसदों से बैठकें कीं और करीब 170 कांग्रेस कार्यालयों का दौरा किया।
प्रमुख मुद्दे: हिंदू विरोधी बयानबाजी , मंदिरों पर हमले , सोशल मीडिया पर नफरत, और समुदाय को विदेशी एजेंट बताने की प्रवृत्ति।
भारत की उप मिशन प्रमुख नामग्या सी.
खंपा ने भारत-अमेरिका साझेदारी को मजबूत बताया; PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की फ्रांस मुलाकात का उल्लेख किया।
करीब 40 युवाओं ने यूथ समिट में भाग लिया; CoHNA ने नई पीढ़ी के नेताओं के लिए लीडरशिप इनक्यूबेटर लॉन्च किया।
यह आयोजन अमेरिका की 250वीं वर्षगाँठ के अवसर पर हुआ, जब हिंदू-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक सक्रियता नई ऊँचाई पर है।

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) के पाँचवें वार्षिक 'हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी' कार्यक्रम में 14 अमेरिकी राज्यों से आए करीब 160 हिंदू-अमेरिकी प्रतिनिधियों ने 1 जुलाई को वाशिंगटन डी.सी. स्थित यूएस कैपिटल में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात कर हिंदू विरोधी नफरत, मंदिरों पर हमले और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे अहम मुद्दे उठाए। प्रतिनिधिमंडल ने सीनेटरों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्यों के साथ 50 से अधिक बैठकें कीं और करीब 170 कांग्रेस कार्यालयों का दौरा किया।

मुख्य घटनाक्रम

यह एक दिवसीय कार्यक्रम हिंदू-अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक पहुँच को संस्थागत रूप देने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बताया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने डेमोक्रेट और रिपब्लिकन — दोनों दलों के सांसदों से संवाद किया। CoHNA के अध्यक्ष निकुंज त्रिवेदी ने बताया कि दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता जताई।

त्रिवेदी ने कहा, "कई विशेषज्ञ और दोनों दलों के सांसद हमारे साथ जुड़े। उन्होंने हमारे समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कैपिटल हिल आने पर हमारा धन्यवाद किया। अक्सर हमारा समुदाय अपनी बात खुलकर नहीं रखता, लेकिन अब यह बदल रहा है।"

प्रमुख मुद्दे जो उठाए गए

CoHNA अध्यक्ष निकुंज त्रिवेदी के अनुसार, सांसदों के साथ हुई चर्चाओं में चार प्रमुख विषय केंद्र में रहे — बढ़ती हिंदू विरोधी बयानबाजी, हिंदू मंदिरों पर हमले, सोशल मीडिया पर भारतीय प्रवासियों के खिलाफ नफरत, और हिंदुओं को विदेशी सरकारों का एजेंट बताने की प्रवृत्ति।

त्रिवेदी ने कहा, "जब हम अपने अधिकारों, हिंदू मंदिरों पर हमलों या अपनी धार्मिक पहचान की बात करते हैं, तब हमें भारत सरकार का एजेंट बताया जाता है। हमने सीनेटरों को समझाया कि इसी तरह हमारे समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।"

भारत-अमेरिका संबंध और समुदाय की भूमिका

कार्यक्रम के स्वागत समारोह में अमेरिका में भारत की उप मिशन प्रमुख नामग्या सी. खंपा ने भारत-अमेरिका साझेदारी को मजबूत और भविष्योन्मुखी बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल ही में फ्रांस में मुलाकात हुई थी। दोनों देशों को मिलकर अभी बहुत कुछ हासिल करना है और इस दिशा में भारतीय मूल का समुदाय एक महत्वपूर्ण साझेदार है।"

गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय हुआ जब अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगाँठ का उत्सव मना रहा है। आयोजकों ने इस अवसर पर रेखांकित किया कि हिंदू-अमेरिकी समुदाय अमेरिकी विकास में सक्रिय योगदान दे रहा है।

युवा नेतृत्व और भविष्य की तैयारी

इस कार्यक्रम में करीब 40 युवा हिंदू-अमेरिकियों ने यूथ समिट में हिस्सा लिया। CoHNA ने एक लीडरशिप इनक्यूबेटर भी शुरू किया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी के हिंदू सामुदायिक नेताओं को तैयार करना है। रटगर्स यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक पैनल ने बताया कि वे कैंपस पर कार्यक्रम आयोजित कर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद बढ़ा रहे हैं और हिंदू छात्रों को सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

आगे की राह

विभिन्न धर्मों के नेताओं ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और हिंदू मंदिरों पर होने वाले हमलों की निंदा करते हुए समुदाय के प्रति समर्थन जताया। यह आयोजन हिंदू-अमेरिकी संगठनों के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसका लक्ष्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना और अमेरिकी लोकतंत्र में हिंदू समुदाय की भागीदारी को संस्थागत रूप देना है। पिछले एक दशक में भारतीय-अमेरिकी समुदाय व्यापार, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में अमेरिका के सबसे तेज़ी से उभरते राजनीतिक रूप से सक्रिय प्रवासी समूहों में शामिल हो चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बदलती राजनीतिक चेतना का प्रतीक है — जो दशकों की 'मॉडल माइनॉरिटी' चुप्पी को तोड़ रहा है। हालाँकि, यह सवाल बना रहता है कि क्या 50 बैठकें और 170 दफ्तरों के दौरे ठोस विधायी नतीजों में बदल पाएँगे, या यह प्रतीकात्मक उपस्थिति तक सीमित रहेगा। जिस तरह समुदाय को 'विदेशी एजेंट' बताने की प्रवृत्ति का मुद्दा उठाया गया, वह एक वास्तविक और संवेदनशील चिंता है — लेकिन इसके साथ-साथ घरेलू नागरिक अधिकार ढाँचे में इसे परिभाषित करने की चुनौती भी बड़ी है। युवा नेतृत्व में निवेश और द्विदलीय संपर्क — यही दो पहलू इस अभियान को दीर्घकालिक प्रासंगिकता दे सकते हैं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी क्या है और इसे कौन आयोजित करता है?
हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी CoHNA (कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका) द्वारा आयोजित वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें हिंदू-अमेरिकी प्रतिनिधि वाशिंगटन डी.सी. में अमेरिकी सांसदों से मिलकर समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। 1 जुलाई को आयोजित इस पाँचवें संस्करण में 14 राज्यों से 160 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में कौन-से प्रमुख मुद्दे उठाए गए?
CoHNA अध्यक्ष निकुंज त्रिवेदी के अनुसार चार प्रमुख मुद्दे उठाए गए — हिंदू विरोधी बयानबाजी में वृद्धि, हिंदू मंदिरों पर हमले, सोशल मीडिया पर भारतीय प्रवासियों के खिलाफ नफरत, और हिंदुओं को विदेशी सरकारों का एजेंट बताने की प्रवृत्ति। इन मुद्दों पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के सांसदों से चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में इस आयोजन का क्या महत्व है?
अमेरिका में भारत की उप मिशन प्रमुख नामग्या सी. खंपा ने कार्यक्रम में कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और भारतीय मूल का समुदाय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की फ्रांस में हुई हालिया मुलाकात का भी उल्लेख किया।
युवा हिंदू-अमेरिकियों के लिए इस कार्यक्रम में क्या खास था?
करीब 40 युवाओं ने यूथ समिट में भाग लिया और CoHNA ने एक लीडरशिप इनक्यूबेटर लॉन्च किया जो नई पीढ़ी के हिंदू सामुदायिक नेताओं को तैयार करेगा। रटगर्स यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बताया कि वे कैंपस पर हिंदू छात्रों को सार्वजनिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों में सक्रिय करने का काम कर रहे हैं।
क्या इस कार्यक्रम में अन्य धर्मों के नेता भी शामिल हुए?
हाँ, आयोजकों के अनुसार विभिन्न धर्मों के नेताओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और हिंदू मंदिरों पर होने वाले हमलों की निंदा करते हुए समुदाय के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। यह अंतर-धार्मिक एकजुटता इस आयोजन की एक विशेषता रही।
राष्ट्र प्रेस
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