भारत-अमेरिका संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत: उप प्रमुख मिशन नमग्या खम्पा का कैपिटल हिल पर बयान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका में भारत की उप प्रमुख मिशन नमग्या सी. खम्पा ने 24 जून 2026 को कैपिटल हिल, वाशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग पहले से कहीं अधिक गहरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी आज 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक द्विपक्षीय साझेदारियों में से एक बन गई है।
मतभेद नहीं, रणनीतिक सोच है आधार
खम्पा ने अपने संबोधन में कहा, "भारत-अमेरिका साझेदारी को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक बताया जाता है और यह बात पूरी तरह सही है। इसका कारण यह नहीं है कि हम हर मुद्दे पर 100 प्रतिशत सहमत हैं। स्वाभाविक रूप से कुछ मुद्दों पर मतभेद होते हैं, लेकिन इस रिश्ते के पीछे जो रणनीतिक सोच है, वह हर साल मजबूत होती जा रही है।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापार, तकनीक और हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बातचीत जारी है।
मोदी-ट्रंप मुलाकात और रुबियो की भारत यात्रा
खम्पा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और उनके बीच गर्मजोशी भरा विश्वास का रिश्ता है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया भारत यात्रा का भी जिक्र किया, जिसमें द्विपक्षीय बैठकों के अलावा क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी शामिल थी।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग की नई दिशा
भारतीय राजनयिक ने बताया कि दोनों पक्षों के वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल टैरिफ कम करना नहीं, बल्कि एक अधिक मजबूत, महत्वाकांक्षी और दोनों देशों के लिए लाभकारी आर्थिक साझेदारी तैयार करना है। कच्चे तेल, एलएनजी और नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग में तेजी से प्रगति होने की बात उन्होंने रेखांकित की, यह देखते हुए कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें और अमेरिका के विशाल ऊर्जा संसाधन दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं।
तकनीक और रक्षा: साझेदारी का नया आयाम
खम्पा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, एडवांस कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग को भविष्य की साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। साथ ही सप्लाई चेन को विविध बनाने और कुछ चुनिंदा तकनीकी केंद्रों पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयासों का उल्लेख किया। रक्षा सहयोग के बारे में उन्होंने कहा कि यह अब केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं रहा — समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और आतंकवाद विरोधी प्रयासों तक इसका विस्तार हो चुका है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भारत और अमेरिका ने 10 वर्षीय रक्षा ढाँचा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
50 लाख भारतीय-अमेरिकी: दो देशों के बीच जीवंत पुल
खम्पा ने अमेरिका में रहने वाले 50 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोगों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार इस समुदाय ने दोनों देशों के सरकारी रिश्तों को एक व्यापक सामाजिक साझेदारी में बदल दिया है। व्यापार, चिकित्सा, तकनीक, उद्यमिता, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा में इस समुदाय के योगदान की उन्होंने सराहना की। क्वाड समूह — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि का अहम स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और गहरी होगी।