31 जुलाई 2026
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अमेरिकी कांग्रेस में SACRED एक्ट पेश: हिंदू मंदिरों समेत सभी पूजा स्थलों को 100 फीट के दायरे में सुरक्षा का प्रावधान

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अमेरिकी कांग्रेस में SACRED एक्ट पेश: हिंदू मंदिरों समेत सभी पूजा स्थलों को 100 फीट के दायरे में सुरक्षा का प्रावधान

सारांश

अमेरिकी कांग्रेस में पेश SACRED एक्ट हिंदू मंदिरों समेत सभी पूजा स्थलों के 100 फीट के दायरे को संघीय सुरक्षा क्षेत्र बनाएगा। 2024 में यहूदी संस्थानों में अकेले 1,702 घटनाएँ दर्ज हुईं; हिंदू मंदिरों पर हमले भी बढ़े। यह द्विदलीय बिल अमेरिका में बढ़ते धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ पहला केंद्रित संघीय जवाब है।

मुख्य बातें

अमेरिकी कांग्रेस में SACRED एक्ट पेश; हिंदू मंदिरों समेत सभी पूजा स्थलों को 100 फीट के दायरे में संघीय सुरक्षा।
पहली बार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष और दोबारा अपराध पर तीन वर्ष तक की जेल का प्रावधान।
एंटी-डेफेमेशन लीग के अनुसार 2024 में यहूदी-विरोधी 9,354 घटनाएँ दर्ज; 1,702 यहूदी संस्थानों में।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने और अपवित्र करने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी बताई।
बिल में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को पहले संशोधन के तहत सुरक्षित रखा गया है।

अमेरिकी कांग्रेस में 28 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य हिंदू मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों और यहूदी प्रार्थना स्थलों समेत सभी धार्मिक स्थलों को उत्पीड़न और धमकी से बचाना है। 'सेफगार्डिंग एक्सेस टू कांग्रेगेशन्स एंड रिलीजियस एस्टैब्लिशमेंट्स फ्रॉम डिसरप्शन' यानी SACRED एक्ट नाम के इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी ने पेश किया और रिपब्लिकन सांसद मैक्स मिलर ने इसमें उनका साथ दिया। यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा अपराधों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की जा रही है।

SACRED एक्ट में क्या है प्रावधान

इस विधेयक के तहत किसी भी पूजा स्थल के 100 फीट के दायरे में श्रद्धालुओं को डराना, रास्ता रोकना या किसी भी प्रकार से परेशान करना संघीय अपराध माना जाएगा। पहली बार दोषी पाए जाने पर जुर्माना या एक वर्ष तक की कारावास की सज़ा हो सकती है। यदि वही व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो सज़ा और कड़ी होगी — जिसमें तीन वर्ष तक की जेल भी शामिल है।

इसके अतिरिक्त, यह बिल पीड़ितों को दीवानी (सिविल) मुकदमा दर्ज करने का अधिकार देता है। अमेरिका के अटॉर्नी जनरल समेत संबंधित अधिकारी ऐसे मामलों में न्यायिक रोक लगाने और पीड़ितों को मुआवज़ा दिलाने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं।

सांसदों ने क्या कहा

सुओजी ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '100 फीट के दायरे' की परिभाषा और 'उत्पीड़न' की व्याख्या को लेकर कानूनी विवाद अपरिहार्य लगते हैं — खासकर तब जब पहला संशोधन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की व्यापक गारंटी देता है। गौरतलब है कि अमेरिका में पहले से मौजूद घृणा अपराध कानूनों के बावजूद 2024 में 9,354 यहूदी-विरोधी घटनाएँ दर्ज हुईं, जो दर्शाता है कि कानून बनाना और उसे लागू करना दो अलग चुनौतियाँ हैं। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों के लिए यह बिल प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली कसौटी इसका क्रियान्वयन होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SACRED एक्ट क्या है?
SACRED एक्ट (सेफगार्डिंग एक्सेस टू कांग्रेगेशन्स एंड रिलीजियस एस्टैब्लिशमेंट्स फ्रॉम डिसरप्शन) अमेरिकी कांग्रेस में पेश एक विधेयक है जो किसी भी पूजा स्थल के 100 फीट के दायरे में डराने, रास्ता रोकने या उत्पीड़न को संघीय अपराध घोषित करता है। इसे सांसद टॉम सुओजी और मैक्स मिलर ने मिलकर पेश किया है।
इस बिल से हिंदू मंदिरों को क्या फायदा होगा?
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के अनुसार अमेरिका में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने और अपवित्र करने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। SACRED एक्ट लागू होने पर मंदिर परिसर के 100 फीट के दायरे में किसी भी श्रद्धालु को परेशान करना संघीय अपराध बन जाएगा, जिससे कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
इस बिल में दोषियों के लिए क्या सज़ा का प्रावधान है?
पहली बार दोषी पाए जाने पर जुर्माना या एक वर्ष तक की जेल हो सकती है। दोबारा अपराध करने पर सज़ा बढ़कर तीन वर्ष तक की कारावास तक हो सकती है। पीड़ित दीवानी मुकदमा भी दर्ज कर सकते हैं।
क्या यह बिल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाता है?
नहीं। बिल में स्पष्ट किया गया है कि अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। केवल डराने-धमकाने और रास्ता रोकने जैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित होंगी।
अमेरिका में धार्मिक स्थलों पर हमलों की स्थिति कितनी गंभीर है?
एंटी-डेफेमेशन लीग के अनुसार 2024 में यहूदी-विरोधी 9,354 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें 1,702 यहूदी संस्थानों में हुईं। अमेरिकन ज्यूइश कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 55 प्रतिशत यहूदियों ने डर के कारण अपनी दिनचर्या बदली। हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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