यूएई ने ओपेक छोड़ने का किया ऐलान, शुक्रवार से लागू होगा फैसला; भारत की तेल सप्लाई पर पड़ेगा असर
सारांश
Key Takeaways
- यूएई ने 28 अप्रैल 2026 को ओपेक छोड़ने की घोषणा की; निर्णय शुक्रवार से प्रभावी होगा।
- यूएई की सरकारी एजेंसी डब्ल्यूएएम के अनुसार, यह फैसला दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं के तहत लिया गया है।
- संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के मुताबिक, 2024 में भारत-यूएई तेल व्यापार करीब 13.5 अरब डॉलर का रहा।
- EIA के अनुसार, यूएई ओपेक में पाँचवाँ सबसे बड़ा और दुनिया में आठवाँ सबसे बड़ा तेल उत्पादक है।
- यूएई
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि वह ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) की सदस्यता छोड़ रहा है। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के अनुसार, यह निर्णय ईरान युद्ध के बाद की परिस्थितियों के बीच लिया गया है और यह शुक्रवार से प्रभावी होगा। भारत को तेल सप्लाई करने वाले शीर्ष देशों में शामिल यूएई का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
यूएई ने क्यों लिया यह फैसला
डब्ल्यूएएम के मुताबिक, यूएई ने यह निर्णय अपनी दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं के अनुरूप लिया है। एजेंसी ने कहा कि यह कदम देश के बदलते ऊर्जा क्षेत्र को दर्शाता है। ओपेक से बाहर निकलने के बाद भी यूएई ने आश्वासन दिया है कि वह जिम्मेदारी के साथ काम करता रहेगा और वैश्विक माँग के अनुसार तेल आपूर्ति बढ़ाएगा।
एजेंसी ने यह भी रेखांकित किया कि यूएई दुनिया के सबसे सस्ते और कम कार्बन उत्सर्जन वाले तेल उत्पादकों में से एक है, जो भविष्य में वैश्विक विकास और प्रदूषण में कमी लाने में सहायक होगा।
भारत पर क्या होगा असर
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत और यूएई के बीच तेल व्यापार करीब 13.5 अरब डॉलर का रहा। पिछले वर्ष यूएई भारत को तेल सप्लाई करने वाले देशों में चौथे या पाँचवें स्थान पर था। ओपेक के कोटा नियमों से मुक्त होने के बाद यूएई अपनी उत्पादन क्षमता और निर्यात को और बढ़ा सकता है, जिससे भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर तेल मिलने की संभावना है।
ओपेक में यूएई की स्थिति
अमेरिका की एनर्जी इन्फॉर्मेशन एजेंसी (EIA) के अनुसार, ओपेक के 12 सदस्यों में यूएई पेट्रोलियम उत्पादन में पाँचवें स्थान पर है, जबकि वैश्विक स्तर पर उसकी रैंक आठवीं है। ओपेक की स्थापना 1967 में हुई थी और 1973 में इज़रायल-अरब युद्ध के दौरान इसने वैश्विक तेल आपूर्ति में कटौती कर दुनिया भर में कीमतें बढ़ा दी थीं — यही इसकी सबसे बड़ी ताकत का प्रदर्शन था।
विविधीकरण की रणनीति
यूएई का यह कदम उसकी उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसमें वह अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल पर निर्भर नहीं रखना चाहता। डब्ल्यूएएम के अनुसार,