जन्मसिद्ध नागरिकता पर ट्रंप के विवादित पोस्ट से भड़के भारतीय-अमेरिकी संगठन, भारत पर टिप्पणी की कड़ी निंदा

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जन्मसिद्ध नागरिकता पर ट्रंप के विवादित पोस्ट से भड़के भारतीय-अमेरिकी संगठन, भारत पर टिप्पणी की कड़ी निंदा

सारांश

राष्ट्रपति ट्रंप के जन्मसिद्ध नागरिकता विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट ने अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को भड़का दिया है। भारत और चीन पर की गई टिप्पणियों को नस्लभेदी बताते हुए हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने पोस्ट हटाने की मांग की, जबकि नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कड़ी आपत्ति जताई।

Key Takeaways

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जन्मसिद्ध नागरिकता की आलोचना करते हुए भारत और चीन का नाम लेकर विवादित टिप्पणियां कीं।
  • हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने पोस्ट को नस्लभेदी बताते हुए इसे हटाने की मांग की और एशियाई-अमेरिकियों की सुरक्षा पर चिंता जताई।
  • ट्रंप ने ACLU को "गैंगस्टर आपराधिक संगठन" कहा और कैलिफोर्निया में गोरे लोगों को हाई-टेक नौकरियां न मिलने का विवादित दावा किया।
  • भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हडसन इंस्टीट्यूट कार्यक्रम में भारत को 'नरक' कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
  • अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार मिलता है, जिसे अदालतें पहले भी बरकरार रख चुकी हैं।
  • अमेरिका में 40 लाख से अधिक भारतीय मूल के नागरिक रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या हाई-टेक क्षेत्र में कार्यरत है।

वॉशिंगटन, 23 अप्रैल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विवादित पोस्ट ने अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच तीखी नाराजगी पैदा कर दी है। इस पोस्ट में ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) की आलोचना की, प्रवासियों को निशाना बनाया और भारतचीन के नाम लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं जिन्हें नस्लभेदी करार दिया जा रहा है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन सहित कई संगठनों और नेताओं ने इस पोस्ट की तत्काल और कड़ी निंदा की है।

ट्रंप के पोस्ट में क्या था?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा संदेश पोस्ट किया जिसमें उन्होंने अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत मिलने वाली जन्मसिद्ध नागरिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वकीलों के बजाय जनता के वोट से तय होना चाहिए।

पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या किसी अन्य देश से वहां बुला लेता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि कैलिफोर्निया में हाई-टेक कंपनियों में गोरे लोगों को नौकरी नहीं मिल रही।

ट्रंप ने प्रतिष्ठित नागरिक अधिकार संगठन अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (ACLU) को "गैंगस्टर आपराधिक संगठन" तक कह दिया और आरोप लगाया कि इसने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है।

भारतीय-अमेरिकी संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने एक बयान जारी कर कहा कि वह इस पोस्ट से "गहराई से परेशान" है। संगठन ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के नस्लभेदी और नफरत से भरे बयान भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को सीधे निशाना बनाते हैं।

संगठन ने चेतावनी दी कि "अमेरिका के राष्ट्रपति के मुंह से ऐसे शब्द समाज में नफरत को और गहरा करेंगे, खासकर ऐसे दौर में जब एशियाई-अमेरिकियों के खिलाफ नस्लवाद और विदेशी विरोधी भावना पहले से चरम पर है।" संगठन ने ट्रंप से पोस्ट हटाने और एशियाई-अमेरिकियों के योगदान को स्वीकार करने की अपील की।

प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया

भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मामले में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में जाते समय उन्होंने ट्रंप का यह पोस्ट देखा और वह स्तब्ध रह गईं।

उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को 'नरक' जैसे शब्दों से संबोधित करने और इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियों से बचा जाए।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

संविधान और कानूनी ढांचे पर ट्रंप के सवाल

ट्रंप ने अपने पोस्ट में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और कानूनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि "अमेरिकी संविधान उस युग में लिखा गया था जब न हवाई यात्रा थी और न इंटरनेट था, इसलिए आज के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।"

कानूनी विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस तर्क को खारिज किया है। अधिकांश संवैधानिक विशेषज्ञ मानते हैं कि 14वें संशोधन के तहत अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा — चाहे उसके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो — नागरिकता का हकदार है।

व्यापक संदर्भ और भविष्य पर असर

गौरतलब है कि ट्रंप पहले कार्यकाल से ही जन्मसिद्ध नागरिकता समाप्त करने की बात करते रहे हैं। जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने इस विषय पर कार्यकारी आदेश जारी करने की कोशिश की थी, जिसे अदालतों ने रोक दिया था। यह पोस्ट उसी नीतिगत एजेंडे की कड़ी मानी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के ऐसे बयान एक तरफ उनके राजनीतिक आधार को मजबूत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंधों और वहां बसे लाखों भारतीय-अमेरिकियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते हैं। अमेरिका में 40 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या उच्च-तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं, और क्या अमेरिकी अदालतें जन्मसिद्ध नागरिकता से संबंधित किसी नए कार्यकारी आदेश को रोकने में सफल रहती हैं।

Point of View

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश है जो उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को नस्लीय रंग देता है। विडंबना यह है कि जिस हाई-टेक उद्योग को ट्रंप प्रशासन भारत के साथ साझेदारी में मजबूत करना चाहता है, उसी की रीढ़ भारतीय मूल के पेशेवर हैं। भारत सरकार की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है — क्या कूटनीतिक मजबूरियां अपने नागरिकों के सम्मान से बड़ी हो गई हैं? यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका में बढ़ता नस्लवाद अब केवल हाशिए का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रपति स्तर से पोषित होता दिख रहा है।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर क्या कहा?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जन्मसिद्ध नागरिकता को गलत बताया और कहा कि इस पर वकीलों की बजाय जनता को वोट से फैसला करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में जन्मा बच्चा नागरिक बनकर अपने पूरे परिवार को भारत या चीन से बुला लेता है।
भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने ट्रंप के पोस्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस पोस्ट को 'नस्लभेदी और नफरत भरा' बताते हुए इसे हटाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसे बयान एशियाई-अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा और नफरत को बढ़ावा दे सकते हैं।
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का कानूनी आधार क्या है?
अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो। अधिकांश संवैधानिक विशेषज्ञ इस अधिकार को मौलिक मानते हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप के पोस्ट पर क्या कहा?
भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत को 'नरक' जैसे शब्दों से संबोधित करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में यह बात कही और ऐसे बयानों की निंदा की।
क्या ट्रंप पहले भी जन्मसिद्ध नागरिकता समाप्त करने की कोशिश कर चुके हैं?
हां, जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी अदालतों ने इसे रोक दिया था।
Nation Press