मुंबई समुद्र में 20 होर्डिंग की खबर भ्रामक: मंत्री नितेश राणे ने एक्स पर दिया स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने 30 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि मुंबई के समुद्र में 20 फ्लोटिंग होर्डिंग लगाए जाने की खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) के टेंडर को लेकर सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बाद राणे ने आधिकारिक स्थिति सामने रखी।
मंत्री का स्पष्टीकरण
राणे ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, 'प्रस्तावित चार होर्डिंग में से दो पहले से ही सी-लिंक के पास मौजूद हैं और केवल दो नए होर्डिंग लगाने का प्रस्ताव है।' उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में 20 होर्डिंग लगाने की बात 'पूरी तरह गलत और भ्रामक' है।
MMB के अध्यक्ष के रूप में राणे ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एक गर्वित मुंबईकर हैं और मुंबई के समुद्री पर्यावरण या तटवर्ती नज़ारों को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी पहल का समर्थन कभी नहीं करेंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब खबरें आईं कि MMB ने मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में जुहू बीच, बांद्रा-वर्ली सी लिंक, वर्ली जेटी, कार्टर रोड और मार्वे जेटी सहित करीब 15 से 20 स्थानों पर डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और मेंटेन (DBFOM) के आधार पर फ्लोटिंग होर्डिंग और विज्ञापन लाइसेंस के लिए टेंडर जारी किए हैं।
इन खबरों के सामने आते ही पर्यावरण संगठनों और नागरिकों में आक्रोश फैल गया। यह ऐसे समय में आया जब मुंबई के समुद्र तटों की सफाई और संरक्षण को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है।
राजनीतिकरण पर मंत्री की अपील
राणे ने इस मुद्दे के अनावश्यक राजनीतिकरण पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी और प्रगतिशील विकास — दोनों के लिए प्रतिबद्ध है।'
गौरतलब है कि राजनीतिक विरोधियों ने इस टेंडर को पर्यावरण-विरोधी करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा था। राणे ने स्पष्ट किया कि जो भी नागरिक या दल तथ्यों को जानना चाहते हैं, उनसे पारदर्शिता के साथ जानकारी साझा करने को सरकार तैयार है।
आम जनता और पर्यावरण पर असर
यदि वास्तव में केवल दो नए होर्डिंग ही प्रस्तावित हैं — जैसा राणे ने दावा किया है — तो तटीय पर्यावरण पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि टेंडर दस्तावेज़ में उल्लिखित स्थानों की संख्या और वास्तविक प्रस्ताव में स्पष्टता का अभाव भ्रम की जड़ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई की तटरेखा पहले से ही अतिक्रमण और प्रदूषण के दोहरे दबाव में है, इसलिए किसी भी नई व्यावसायिक गतिविधि के लिए विस्तृत सार्वजनिक परामर्श ज़रूरी है।
आगे की राह
मंत्री राणे ने संकेत दिया है कि सरकार इस विषय पर पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी उपलब्ध कराएगी। MMB की ओर से आधिकारिक टेंडर विवरण और स्थानों की सूची जल्द सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है, जिससे यह विवाद अंततः सुलझ सकेगा।