इंडिया ब्लॉक के 'जन महाभियोग' पर भाजपा का पलटवार: 'लोकतंत्र का मज़ाक, राजनीतिक नौटंकी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित 'जन महाभियोग' (पीपल्स इम्पीचमेंट) कार्यक्रम पर तीखा हमला बोला, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित होना प्रस्तावित है। भाजपा नेताओं ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया का राजनीतिकरण, 'मॉक पार्लियामेंट' और लोकतंत्र का उपहास बताया।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल का तीखा प्रहार
नई दिल्ली में भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'जब भी संसद का सत्र चलता है, तो ये लोग पूरे 40 दिन बाहर सड़कों पर बिताते हैं और संसद को चलने नहीं देते। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष, विपक्ष और राष्ट्रपति मिलकर संसद का निर्माण करते हैं।'
जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला और कहा कि वे संसद के अंदर मुद्दे उठाने के बजाय खड़गे के आवास को मंच बनाते हैं, क्योंकि लोकसभा में जवाबदेही होती है। उनके अनुसार, 'अगर आपका मुद्दा जायज है, तो उसे लोकसभा में उठाइए।'
जायसवाल ने आगे कहा कि संसद सत्र न चलने पर 'नकली संसद' (मॉक पार्लियामेंट) आयोजित करना यह दर्शाता है कि विपक्ष सत्ता पक्ष के सांसदों से मुद्दों पर सीधी चर्चा से कतराता है।
प्रवीण खंडेलवाल और राम कदम की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि 'मॉक पार्लियामेंट' की कोई कानूनी वैधता नहीं है और यह केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने की कोशिश है। मुंबई में भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि महाभियोग एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक तमाशा नहीं बनाया जा सकता।
कदम ने कहा, 'अगर आपको कोई आपत्ति है, तो न्यायपालिका के पास जाएं या चुनाव आयोग को सबूत सौंपें।' उन्होंने यह भी कहा कि चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली, जो ईवीएम-विरोधी तर्क को कमज़ोर करता है।
कदम ने 1984 का संदर्भ देते हुए कहा कि भाजपा ने तब केवल दो सीटें जीती थीं और अटल बिहारी वाजपेयी तक चुनाव हारे, लेकिन पार्टी ने चुनाव आयोग पर दोषारोपण नहीं किया।
पटना से गुरु प्रकाश पासवान का बयान
पटना में भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि विपक्ष 'झूठा, निराधार और बेबुनियाद प्रचार' चला रहा है। उन्होंने कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली का हवाला दिया, जिन्होंने कथित तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को उचित बताया।
पासवान ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार SIR को एक वैध संवैधानिक प्रक्रिया माना है। उन्होंने आँकड़े देते हुए बताया कि 13 करोड़ नाम काटे जाने के दावे गलत हैं — वास्तव में 2 करोड़ 80 लाख मृत व्यक्ति, 5 करोड़ से अधिक पते बदले हुए लोग और 2 करोड़ से अधिक 'गैर-भरोसेमंद' प्रविष्टियाँ पाई गईं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए जन-जागरण अभियान चला रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी विपक्ष ने सरकार के विरुद्ध संसद के बाहर बड़े प्रतीकात्मक आयोजन किए हैं। भाजपा का कहना है कि इस तरह के आयोजन संसदीय जवाबदेही के विकल्प नहीं बन सकते।
आलोचकों का कहना है कि इंडिया ब्लॉक का यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी संवैधानिक स्थिति शून्य है। जब तक दोनों पक्ष संसद के भीतर संवाद की इच्छाशक्ति नहीं दिखाते, यह विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बहस को और गहरा करता रहेगा।