30 अक्टूबर 2026
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इंडिया ब्लॉक के 'जन महाभियोग' पर भाजपा का पलटवार: 'लोकतंत्र का मज़ाक, राजनीतिक नौटंकी'

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इंडिया ब्लॉक के 'जन महाभियोग' पर भाजपा का पलटवार: 'लोकतंत्र का मज़ाक, राजनीतिक नौटंकी'

सारांश

इंडिया ब्लॉक का 'जन महाभियोग' संसद के बाहर विरोध की नई भाषा है — लेकिन भाजपा का पलटवार तीखा है। असली सवाल यह है कि जो दल संसद में बोलने से कतराता है, क्या वह 'नकली संसद' से जनमत बना सकता है?

मुख्य बातें

भाजपा ने 30 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित 'जन महाभियोग' को 'राजनीतिक नौटंकी' और 'लोकतंत्र का मज़ाक' करार दिया।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि विपक्ष संसद में 40 दिन बाधा डालता है, फिर बाहर 'मॉक पार्लियामेंट' आयोजित करता है।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम की कोई कानूनी वैधता नहीं है।
राम कदम ने बताया कि चार राज्यों में बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों की 28 में से कांग्रेस को केवल एक सीट मिली।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि 2 करोड़ 80 लाख प्रविष्टियाँ मृत व्यक्तियों की थीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित 'जन महाभियोग' (पीपल्स इम्पीचमेंट) कार्यक्रम पर तीखा हमला बोला, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित होना प्रस्तावित है। भाजपा नेताओं ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया का राजनीतिकरण, 'मॉक पार्लियामेंट' और लोकतंत्र का उपहास बताया।

भाजपा सांसद संजय जायसवाल का तीखा प्रहार

नई दिल्ली में भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'जब भी संसद का सत्र चलता है, तो ये लोग पूरे 40 दिन बाहर सड़कों पर बिताते हैं और संसद को चलने नहीं देते। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष, विपक्ष और राष्ट्रपति मिलकर संसद का निर्माण करते हैं।'

जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला और कहा कि वे संसद के अंदर मुद्दे उठाने के बजाय खड़गे के आवास को मंच बनाते हैं, क्योंकि लोकसभा में जवाबदेही होती है। उनके अनुसार, 'अगर आपका मुद्दा जायज है, तो उसे लोकसभा में उठाइए।'

जायसवाल ने आगे कहा कि संसद सत्र न चलने पर 'नकली संसद' (मॉक पार्लियामेंट) आयोजित करना यह दर्शाता है कि विपक्ष सत्ता पक्ष के सांसदों से मुद्दों पर सीधी चर्चा से कतराता है।

प्रवीण खंडेलवाल और राम कदम की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि 'मॉक पार्लियामेंट' की कोई कानूनी वैधता नहीं है और यह केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने की कोशिश है। मुंबई में भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि महाभियोग एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक तमाशा नहीं बनाया जा सकता।

कदम ने कहा, 'अगर आपको कोई आपत्ति है, तो न्यायपालिका के पास जाएं या चुनाव आयोग को सबूत सौंपें।' उन्होंने यह भी कहा कि चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली, जो ईवीएम-विरोधी तर्क को कमज़ोर करता है।

कदम ने 1984 का संदर्भ देते हुए कहा कि भाजपा ने तब केवल दो सीटें जीती थीं और अटल बिहारी वाजपेयी तक चुनाव हारे, लेकिन पार्टी ने चुनाव आयोग पर दोषारोपण नहीं किया।

पटना से गुरु प्रकाश पासवान का बयान

पटना में भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि विपक्ष 'झूठा, निराधार और बेबुनियाद प्रचार' चला रहा है। उन्होंने कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली का हवाला दिया, जिन्होंने कथित तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को उचित बताया।

पासवान ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार SIR को एक वैध संवैधानिक प्रक्रिया माना है। उन्होंने आँकड़े देते हुए बताया कि 13 करोड़ नाम काटे जाने के दावे गलत हैं — वास्तव में 2 करोड़ 80 लाख मृत व्यक्ति, 5 करोड़ से अधिक पते बदले हुए लोग और 2 करोड़ से अधिक 'गैर-भरोसेमंद' प्रविष्टियाँ पाई गईं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए जन-जागरण अभियान चला रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी विपक्ष ने सरकार के विरुद्ध संसद के बाहर बड़े प्रतीकात्मक आयोजन किए हैं। भाजपा का कहना है कि इस तरह के आयोजन संसदीय जवाबदेही के विकल्प नहीं बन सकते।

आलोचकों का कहना है कि इंडिया ब्लॉक का यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी संवैधानिक स्थिति शून्य है। जब तक दोनों पक्ष संसद के भीतर संवाद की इच्छाशक्ति नहीं दिखाते, यह विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बहस को और गहरा करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संसदीय पलायनवाद के रूप में परिभाषित कर रही है। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि विपक्ष का यह प्रतीकात्मक कदम तब आता है जब उसे संसद में सुनवाई न मिलने की शिकायत है। असली विरोधाभास यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संसदीय मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हैं, जबकि संसद की उत्पादकता लगातार घटती जा रही है। जन महाभियोग की संवैधानिक वैधता शून्य है, यह तथ्य है — परंतु यह भी विचारणीय है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की जो खाई बन रही है, उसे भरने की ज़िम्मेदारी किसी एक की नहीं, दोनों की है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक का 'जन महाभियोग' क्या है?
'जन महाभियोग' या पीपल्स इम्पीचमेंट, इंडिया ब्लॉक द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित किया जाने वाला एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है। इसकी कोई संवैधानिक या कानूनी वैधता नहीं है; यह एक जन-जागरण अभियान का हिस्सा है।
भाजपा ने 'जन महाभियोग' का विरोध क्यों किया?
भाजपा नेताओं ने इसे 'मॉक पार्लियामेंट' और संवैधानिक प्रक्रिया का राजनीतिकरण बताया। उनका तर्क है कि विपक्ष संसद में मुद्दे उठाने के बजाय बाहर नाटक करता है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
भाजपा ने बैलेट पेपर विवाद पर क्या कहा?
भाजपा नेता राम कदम ने बताया कि चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए और कांग्रेस को उनमें केवल एक सीट मिली। उनके अनुसार, चुनाव परिणाम ईवीएम या बैलेट पेपर पर नहीं, बल्कि जनादेश पर निर्भर करते हैं।
SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) विवाद क्या है?
इंडिया ब्लॉक ने आरोप लगाया था कि SIR प्रक्रिया में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए। भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि इनमें 2 करोड़ 80 लाख मृत व्यक्ति, 5 करोड़ से अधिक पते बदले हुए लोग और 2 करोड़ से अधिक गैर-भरोसेमंद प्रविष्टियाँ थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने SIR को संवैधानिक प्रक्रिया माना है।
इस विवाद का आगे क्या असर पड़ सकता है?
यह राजनीतिक तनाव संसद के अगले सत्र में विपक्ष की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों के बीच संसदीय संवाद की खाई यदि बनी रही, तो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर जनता का भरोसा और कमज़ोर होने का खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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