एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संभावित डेटा लीक की जाँच शुरू, स्कार्लेट ग्रुप हैकर के दावे के बाद शेयर 2% टूटा
सारांश
मुख्य बातें
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि वह एक संभावित डेटा लीक की जाँच कर रहा है, जो कथित तौर पर सेल्सफोर्स द्वारा होस्ट और प्रबंधित एक सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। यह मामला उस समय सामने आया जब हैकर समूह स्कार्लेट ग्रुप ने बैंक की प्रणालियों में कथित सेंधमारी की जिम्मेदारी लेते हुए संवेदनशील ग्राहक और आंतरिक कॉर्पोरेट डेटा तक पहुँच का दावा किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर बैंक का शेयर इस खबर के बाद करीब 2 प्रतिशत गिरकर ₹860.45 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
बैंक का आधिकारिक बयान
बैंक ने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि संभावित लीक केवल उसके वाहन ऋण (व्हीकल लोन) ग्राहकों से जुड़े सीमित डेटा तक ही सीमित हो सकता है, जो सेल्सफोर्स-आधारित प्लेटफॉर्म पर संग्रहीत था। बैंक ने कहा, 'बैंक की अपनी मुख्य बैंकिंग प्रणालियाँ इस घटना से प्रभावित नहीं हुई हैं और सभी बैंकिंग सेवाएँ सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।' बैंक ने यह भी कहा कि जाँच जारी है और जल्द ही अधिक जानकारी साझा की जाएगी।
हैकर समूह के दावे और कथित लीक डेटा
रिपोर्टों के अनुसार, स्कार्लेट ग्रुप ने दावा किया है कि उसे बैंक के ग्राहकों और आंतरिक कॉर्पोरेट डेटा दोनों तक पहुँच मिली है। कथित तौर पर लीक हुए डेटा में केवाईसी (KYC) रिकॉर्ड, व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज़, पैन और आधार विवरण, क्रेडिट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, ऋण आवेदन पत्र, हस्ताक्षरित समझौते, बीमा रिकॉर्ड, CRM डेटा, कर्मचारियों की जानकारी, लॉगिन हिस्ट्री और ऑडिट लॉग जैसी अत्यंत संवेदनशील सूचनाएँ शामिल हो सकती हैं। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
शेयर बाज़ार पर असर
इस घटनाक्रम का असर BSE पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर पर तत्काल दिखाई दिया। शुक्रवार को शेयर करीब 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹860.45 पर कारोबार करता रहा। एक्सचेंज के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह में शेयर का उच्चतम स्तर ₹1,144.65 और न्यूनतम स्तर ₹832 रहा है, जो यह दर्शाता है कि शेयर पहले से ही अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे है।
व्यापक संदर्भ: भारतीय बैंकिंग में साइबर खतरे
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंकिंग क्षेत्र पर साइबर हमलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि इसी महीने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़ा एक अलग डेटा ब्रीच मामला भी सामने आया था, जिसमें 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड डार्क वेब पर पाए जाने की सूचना मिली थी। उस मामले में बैंक को उसके थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और CERT-In की ओर से संभावित डेटा एक्सपोज़र को लेकर अलर्ट प्राप्त हुआ था। यह दूसरी बड़ी घटना महज़ कुछ हफ्तों के भीतर सामने आना इस बात का संकेत है कि भारतीय वित्तीय संस्थान तृतीय-पक्ष SaaS प्लेटफॉर्म से जुड़ी सुरक्षा कमज़ोरियों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
आगे क्या होगा
बैंक ने संकेत दिया है कि वह जाँच में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है और नियामकीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि KYC और आधार जैसे दस्तावेज़ वास्तव में उजागर हुए हैं, तो प्रभावित ग्राहकों को पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़े हुए जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। CERT-In और संबंधित नियामक निकायों की भूमिका इस जाँच में निर्णायक होगी।