27 जुलाई 2026
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बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक: कोर बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित, फॉरेंसिक जांच शुरू; NSE पर शेयर 0.91% गिरा

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बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक: कोर बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित, फॉरेंसिक जांच शुरू; NSE पर शेयर 0.91% गिरा

सारांश

बैंक ऑफ बड़ौदा का कथित तौर पर 1 टीबी संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर आया — लेकिन बैंक का कहना है कि सेंध एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट तक सीमित रही, कोर बैंकिंग सिस्टम अछूता रहा। फॉरेंसिक जांच जारी है और NSE पर शेयर 0.91% गिरा।

मुख्य बातें

बैंक ऑफ बड़ौदा ने 27 जुलाई 2026 को डेटा लीक पर आधिकारिक बयान जारी किया।
सेंध बैंक के एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट के कम्प्रोमाइज होने से हुई; कोर बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित बताई गई।
रिपोर्टों के अनुसार कथित हैकर के पास 1 टीबी संवेदनशील डेटा है जो डार्क वेब पर उपलब्ध बताया जा रहा है।
डेटा में सेविंग्स/करंट अकाउंट, लोन, नेटबैंकिंग, एनआरआई और कॉर्पोरेट बैंकिंग रिकॉर्ड शामिल होने का दावा।
अब तक किसी हैकर ने सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली ।
बैंक का शेयर NSE पर 0.91% गिरकर ₹244.20 पर बंद हुआ।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने 27 जुलाई 2026 को डेटा लीक की खबरों पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उसकी कोर बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और किसी अनधिकृत पक्ष की उस तक पहुँच नहीं बनाई गई। सरकारी बैंक ने बताया कि यह सेंध बैंक के एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट से हुई और मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है।

बैंक का आधिकारिक बयान

बैंक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा, 'बैंक में मजबूत इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू हैं। यह घटना बैंक के एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट के कम्प्रोमाइज होने के कारण हुई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुँच बनाई गई।' बैंक ने आगे कहा कि इस घटना की तुरंत पहचान कर ली गई थी और तत्काल आवश्यक सुरक्षा एवं नियंत्रण संबंधी कदम उठाए गए। बयान में जोड़ा गया, 'इसमें बैंक की कोर बैंकिंग प्रणालियों तक कोई पहुँच नहीं बनाई गई और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।'

फॉरेंसिक जांच और नियामकीय कदम

बैंक ने स्पष्ट किया कि घटना की विस्तृत फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है और वह लागू नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। बैंक ने कहा कि वह इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और अपने ग्राहकों व पक्षकारों का विश्वास कायम रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

डार्क वेब पर डेटा का दावा

रिपोर्टों के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा का कथित तौर पर करीब 1 टीबी संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर उपलब्ध बताया जा रहा है। कथित हैकर के दावे के मुताबिक इस डेटा में सेविंग्स और करंट अकाउंट के रिकॉर्ड, लोन का डेटा, नेटबैंकिंग यूजर की जानकारी, एनआरआई और कॉर्पोरेट बैंकिंग सर्विस के रिकॉर्ड, कस्टमर सपोर्ट से जुड़ी जानकारी तथा ब्रांच और एटीएम से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं। गौरतलब है कि अब तक किसी हैकर ने सार्वजनिक रूप से इस डेटा लीक की जिम्मेदारी नहीं ली है।

शेयर बाज़ार पर असर

इस डेटा लीक की खबर सामने आने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 0.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ ₹244.20 पर बंद हुआ। यह गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है, हालांकि बड़ी बिकवाली से बैंक का शेयर बचा रहा।

आगे क्या होगा

फॉरेंसिक जांच के नतीजे और नियामकों को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कितने ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारी ईमेल अकाउंट के ज़रिए सेंध एक बड़ी प्रणालीगत कमज़ोरी को उजागर करती है जिसे तत्काल संबोधित किए जाने की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आश्वस्त करने वाला लग सकता है — लेकिन यह उतना ही चिंताजनक है। एनआरआई खाते, कॉर्पोरेट बैंकिंग रिकॉर्ड और नेटबैंकिंग विवरण जैसे संवेदनशील डेटा का डार्क वेब पर पहुँचना यह दर्शाता है कि एक ईमेल अकाउंट की सुरक्षा में चूक कितने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा सकती है। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी अब केवल आईटी विभागों की नहीं, बोर्ड स्तर की प्राथमिकता बननी चाहिए — और फॉरेंसिक जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा का कथित तौर पर 1 टीबी संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर उपलब्ध बताया जा रहा है, जिसमें सेविंग्स/करंट अकाउंट, लोन, नेटबैंकिंग और कॉर्पोरेट बैंकिंग रिकॉर्ड शामिल होने का दावा है। बैंक ने स्वीकार किया कि एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट के कम्प्रोमाइज होने से कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुँच बनी।
क्या बैंक ऑफ बड़ौदा का कोर बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित है?
बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि कोर बैंकिंग प्रणालियों तक कोई अनधिकृत पहुँच नहीं बनाई गई और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। सेंध केवल एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट तक सीमित रही।
बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक की जिम्मेदारी किसने ली?
अब तक किसी हैकर या समूह ने सार्वजनिक रूप से इस डेटा लीक की जिम्मेदारी नहीं ली है। बैंक ने फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और नियामकीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
डेटा लीक के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर पर क्या असर पड़ा?
डेटा लीक की खबर के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर NSE पर 0.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹244.20 पर बंद हुआ। यह गिरावट सीमित रही, जो दर्शाती है कि बाज़ार ने बैंक के आश्वासन को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक से ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
बैंक ने अभी तक ग्राहकों को कोई विशेष निर्देश सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्राहक अपना नेटबैंकिंग पासवर्ड तुरंत बदलें, खाते की गतिविधि पर नज़र रखें और किसी संदिग्ध लेनदेन की सूचना बैंक को दें। फॉरेंसिक जांच के नतीजे आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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