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बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 मुनाफा 72% गिरकर ₹1,278 करोड़, ₹5,680 करोड़ के एकमुश्त घाटे की मार

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बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 मुनाफा 72% गिरकर ₹1,278 करोड़, ₹5,680 करोड़ के एकमुश्त घाटे की मार

सारांश

₹5,680 करोड़ के एकमुश्त घाटे ने बैंक ऑफ बड़ौदा के Q1 मुनाफे को 72% नीचे खींच लिया — लेकिन असली तस्वीर इससे बेहतर है। एनआईआई 9.5% बढ़ी, प्रोविजन तीन-चौथाई घटा, और ऑपरेटिंग प्रदर्शन स्थिर रहा। यह एकमुश्त झटका है, न कि संरचनात्मक कमज़ोरी।

मुख्य बातें

बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 FY27 शुद्ध मुनाफा 71.9% गिरकर ₹1,278 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष ₹4,541 करोड़ था।
गिरावट की वजह ₹5,680 करोड़ का एकमुश्त घाटा (वन-टाइम लॉस) रहा।
एनआईआई सालाना आधार पर 9.5% बढ़कर ₹12,525 करोड़ हुई; ब्याज आय 6.8% बढ़कर ₹33,211 करोड़ पहुँची।
प्रोविजन तिमाही आधार पर ₹3,150 करोड़ से घटकर ₹643 करोड़ पर आया।
जीएनपीए मार्च के 1.89% से बढ़कर जून में 1.99% ; एनएनपीए 0.45% से 0.50% हुआ।

बैंक ऑफ बड़ौदा का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में शुद्ध मुनाफा 71.9 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ ₹1,278 करोड़ पर आ गया। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस गिरावट की प्रमुख वजह तिमाही में दर्ज किया गया ₹5,680 करोड़ का एकमुश्त घाटा (वन-टाइम लॉस) रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा ₹4,541 करोड़ था।

मुख्य वित्तीय प्रदर्शन

एकमुश्त घाटे के बावजूद बैंक का मूल परिचालन प्रदर्शन मज़बूत बना रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर ₹12,525 करोड़ हो गई, जो एक वर्ष पूर्व की समान अवधि में ₹11,435 करोड़ थी। बैंक के अनुसार, कर्ज वितरण में निरंतर वृद्धि से एनआईआई को बल मिला।

बैंक की कुल ब्याज आय भी सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹33,211 करोड़ पर पहुँच गई, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह ₹31,091 करोड़ थी।

परिचालन मुनाफा और प्रोविजन

प्रोविजन और कर से पूर्व बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹8,127 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹8,236 करोड़ की तुलना में मामूली कम है। उल्लेखनीय बात यह रही कि एकमुश्त घाटे के बावजूद प्रोविजन में महत्त्वपूर्ण कमी दर्ज की गई — पहली तिमाही में कुल प्रोविजन घटकर ₹643 करोड़ रह गया, जबकि पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में यह ₹3,150 करोड़ और एक वर्ष पूर्व की समान तिमाही में ₹1,967 करोड़ था।

बैंक का कहना है कि प्रोविजन में इस कमी से क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के संकेत मिलते हैं।

एसेट क्वालिटी में हल्की कमज़ोरी

तिमाही आधार पर बैंक की संपत्ति गुणवत्ता में मामूली गिरावट देखी गई। जून 2026 के अंत तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (जीएनपीए) बढ़कर 1.99 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2026 के अंत में 1.89 प्रतिशत था। इसी प्रकार नेट एनपीए (एनएनपीए) भी 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 0.50 प्रतिशत पर आ गया।

यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक समग्र रूप से अपनी एसेट क्वालिटी सुधारने में जुटे हैं। गौरतलब है कि एनपीए में यह वृद्धि मामूली है और बैंक का जीएनपीए अनुपात अभी भी उद्योग के उच्च स्तरों से काफी नीचे है।

आगे की राह

एकमुश्त घाटे का बोझ एक बार का असर माना जा रहा है, और बैंक का मूल परिचालन — एनआईआई वृद्धि, कम प्रोविजन और स्थिर ऑपरेटिंग प्रॉफिट — आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की बहाली का संकेत देता है। निवेशकों और विश्लेषकों की नज़र अब बैंक की एसेट क्वालिटी के रुझान और कर्ज वितरण की गति पर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी यह है कि एकमुश्त घाटे को अलग करने पर बैंक का परिचालन ढाँचा ठोस दिखता है। एनआईआई की 9.5% वृद्धि और प्रोविजन में भारी कमी यह संकेत देती है कि क्रेडिट साइकिल बैंक के पक्ष में है। चिंता की असली वजह एनपीए में मामूली वृद्धि है — यह देखना होगा कि यह एकल तिमाही की विसंगति है या किसी उभरते दबाव का संकेत। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए एकमुश्त घाटे की पारदर्शिता सकारात्मक है, बशर्ते आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की बहाली स्पष्ट हो।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 FY27 मुनाफा इतना क्यों गिरा?
बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 FY27 शुद्ध मुनाफा ₹5,680 करोड़ के एकमुश्त घाटे (वन-टाइम लॉस) के कारण 71.9% गिरकर ₹1,278 करोड़ रह गया। इस असाधारण मद को हटाकर देखें तो बैंक का मूल परिचालन प्रदर्शन स्थिर बना रहा।
बैंक ऑफ बड़ौदा की एनआईआई इस तिमाही कितनी रही?
पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) सालाना आधार पर 9.5% बढ़कर ₹12,525 करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में ₹11,435 करोड़ थी। कर्ज वितरण में निरंतर वृद्धि इसकी प्रमुख वजह रही।
बैंक ऑफ बड़ौदा का एनपीए अनुपात जून 2026 में कितना है?
जून 2026 के अंत तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (जीएनपीए) 1.99% और नेट एनपीए (एनएनपीए) 0.50% रहा। मार्च 2026 में ये क्रमशः 1.89% और 0.45% थे, यानी तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि दर्ज हुई।
बैंक ऑफ बड़ौदा का प्रोविजन इस तिमाही कितना घटा?
Q1 FY27 में बैंक का कुल प्रोविजन घटकर ₹643 करोड़ रह गया, जबकि पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में यह ₹3,150 करोड़ था। बैंक के अनुसार यह क्रेडिट कॉस्ट में सुधार का संकेत है।
₹5,680 करोड़ का एकमुश्त घाटा क्या है और इसका असर क्या होगा?
यह एक असाधारण (वन-टाइम) मद है जो बैंक ने इस तिमाही में दर्ज किया और जिसने शुद्ध मुनाफे को सीधे प्रभावित किया। चूँकि यह एकबारगी घाटा है, आने वाली तिमाहियों में बैंक के मुनाफे की बहाली की उम्मीद जताई जा रही है, बशर्ते मूल परिचालन प्रदर्शन इसी तरह मज़बूत बना रहे।
राष्ट्र प्रेस
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