बैंक ऑफ बड़ौदा का Q1 मुनाफा 72% गिरकर ₹1,278 करोड़, ₹5,680 करोड़ के एकमुश्त घाटे की मार
सारांश
मुख्य बातें
बैंक ऑफ बड़ौदा का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में शुद्ध मुनाफा 71.9 प्रतिशत की तीखी गिरावट के साथ ₹1,278 करोड़ पर आ गया। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस गिरावट की प्रमुख वजह तिमाही में दर्ज किया गया ₹5,680 करोड़ का एकमुश्त घाटा (वन-टाइम लॉस) रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा ₹4,541 करोड़ था।
मुख्य वित्तीय प्रदर्शन
एकमुश्त घाटे के बावजूद बैंक का मूल परिचालन प्रदर्शन मज़बूत बना रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) सालाना आधार पर 9.5 प्रतिशत बढ़कर ₹12,525 करोड़ हो गई, जो एक वर्ष पूर्व की समान अवधि में ₹11,435 करोड़ थी। बैंक के अनुसार, कर्ज वितरण में निरंतर वृद्धि से एनआईआई को बल मिला।
बैंक की कुल ब्याज आय भी सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹33,211 करोड़ पर पहुँच गई, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह ₹31,091 करोड़ थी।
परिचालन मुनाफा और प्रोविजन
प्रोविजन और कर से पूर्व बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹8,127 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के ₹8,236 करोड़ की तुलना में मामूली कम है। उल्लेखनीय बात यह रही कि एकमुश्त घाटे के बावजूद प्रोविजन में महत्त्वपूर्ण कमी दर्ज की गई — पहली तिमाही में कुल प्रोविजन घटकर ₹643 करोड़ रह गया, जबकि पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में यह ₹3,150 करोड़ और एक वर्ष पूर्व की समान तिमाही में ₹1,967 करोड़ था।
बैंक का कहना है कि प्रोविजन में इस कमी से क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के संकेत मिलते हैं।
एसेट क्वालिटी में हल्की कमज़ोरी
तिमाही आधार पर बैंक की संपत्ति गुणवत्ता में मामूली गिरावट देखी गई। जून 2026 के अंत तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (जीएनपीए) बढ़कर 1.99 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2026 के अंत में 1.89 प्रतिशत था। इसी प्रकार नेट एनपीए (एनएनपीए) भी 0.45 प्रतिशत से बढ़कर 0.50 प्रतिशत पर आ गया।
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक समग्र रूप से अपनी एसेट क्वालिटी सुधारने में जुटे हैं। गौरतलब है कि एनपीए में यह वृद्धि मामूली है और बैंक का जीएनपीए अनुपात अभी भी उद्योग के उच्च स्तरों से काफी नीचे है।
आगे की राह
एकमुश्त घाटे का बोझ एक बार का असर माना जा रहा है, और बैंक का मूल परिचालन — एनआईआई वृद्धि, कम प्रोविजन और स्थिर ऑपरेटिंग प्रॉफिट — आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की बहाली का संकेत देता है। निवेशकों और विश्लेषकों की नज़र अब बैंक की एसेट क्वालिटी के रुझान और कर्ज वितरण की गति पर रहेगी।