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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: मुजफ्फरनगर की 6 सीटों का पूरा चुनावी गणित, 2022 में किसने मारी बाज़ी

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: मुजफ्फरनगर की 6 सीटों का पूरा चुनावी गणित, 2022 में किसने मारी बाज़ी

सारांश

2027 से पहले मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों पर गणित बदला हुआ है — 2022 में सपा के साथ लड़ी रालोद अब BJP के साथ है। जाट-मुस्लिम समीकरण, खतौली उपचुनाव की उलटफेर और रालोद का बढ़ा दबदबा 2027 की तस्वीर को पेचीदा बना रहे हैं।

मुख्य बातें

मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों पर यूपी चुनाव 2027 से पहले सियासी गतिविधियाँ तेज।
वर्तमान में रालोद के 3, BJP के 2 और सपा का 1 विधायक ; रालोद अब BJP गठबंधन में।
खतौली उपचुनाव में BJP से सीट छिनी — मदन भैया (रालोद) ने 97,139 वोट पाकर जीत दर्ज की।
जिले में 55.79% हिंदू, 41.39% मुस्लिम ; 8 चीनी मिलें और 40% से अधिक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था।
2022 में सबसे बड़ी जीत बुढ़ाना में रालोद की — 28,310 वोटों का अंतर; सबसे करीबी मुकाबला चरथावल में — 5,334 वोटों का अंतर।
पुरकाजी में तीन अलग-अलग चुनावों में तीन अलग पार्टियाँ जीतीं — 2012 बसपा, 2017 BJP, 2022 रालोद।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ मुजफ्फरनगर जिले की छह विधानसभा सीटों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुजफ्फरनगर सदर, बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी, खतौली और मीरापुर विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के नेता मतदाताओं तक पहुँच बनाने में जुट गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले इस जिले में 2022 के चुनावी नतीजों ने त्रिकोणीय समीकरण को नई दिशा दी थी।

मुजफ्फरनगर की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि

'शुगर बाउल ऑफ इंडिया' के नाम से जाने जाते इस जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, गन्ना, चीनी, कागज और इस्पात उद्योगों पर टिकी है। जिले में 8 चीनी मिलें हैं और 40 फीसदी से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है। मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा अनाज उत्पादक जनपद भी है।

जनसांख्यिकीय दृष्टि से जिले में 55.79 प्रतिशत हिंदू, 41.39 प्रतिशत मुस्लिम, 2 प्रतिशत जैन और 2 प्रतिशत अन्य धर्म के लोग निवास करते हैं। यह बहुलतावादी जनसंख्या संरचना ही यहाँ की राजनीतिक जटिलता का मूल आधार है। ऐतिहासिक रूप से रालोद का इस जिले पर मजबूत प्रभाव रहा है।

2022 का चुनावी नतीजा और वर्तमान विधायक स्थिति

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन और BJP ने यहाँ बराबर-बराबर सीटें जीती थीं। बाद में खतौली उपचुनाव में BJP को हार का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वर्तमान में रालोद के 3, BJP के 2 और सपा का 1 विधायक है। उल्लेखनीय यह है कि 2022 में सपा के साथ चुनाव लड़ने वाली रालोद अब BJP के साथ गठबंधन में है — यह राजनीतिक पुनर्संरेखण 2027 के समीकरणों को उलझाता है।

सीटवार 2022 चुनाव परिणाम

मुजफ्फरनगर सदर: BJP उम्मीदवार कपिल देव अग्रवाल ने 1,11,794 वोट पाकर रालोद के सौरभ स्वरूप बंसल (93,100 वोट) को 18,694 वोटों से हराया। बसपा के पुष्पंकर दीपक को 10,733 और एआईएमआईएम के इंतज़ार अंसारी को 3,750 वोट मिले। कुल 62.89 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।

बुढ़ाना: मुस्लिम-बहुल इस क्षेत्र से रालोद के राजपाल सिंह बलियान ने 1,31,093 वोट पाकर BJP के उमेश मलिक (1,02,783 वोट) को 28,310 वोटों के बड़े अंतर से हराया। बसपा के अनीस अल्वी को 10,397, एआईएमआईएम के भीम सिंह बलियान को 2,633 और कांग्रेस के देवेंद्र कश्यप को 2,452 वोट मिले। यहाँ 67.68 फीसदी मतदान हुआ।

चरथावल: सपा के पंकज कुमार मलिक ने 97,363 वोट पाकर BJP की सपना कश्यप (92,029 वोट) को 5,334 वोटों के करीबी अंतर से हराया। बसपा के सलमान सईद को 25,131 और एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन अंसारी को 3,234 वोट मिले। कुल 2,22,190 मतदाताओं (67.09 फीसदी) ने वोट डाला।

पुरकाजी: इस सीट पर क्रमशः 2012 में बसपा, 2017 में BJP और 2022 में सपा-रालोद गठबंधन जीता। 2022 में रालोद के अनिल कुमार ने 92,672 वोट पाकर BJP के प्रमोद उत्वाल (86,140 वोट) को हराया। बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह को 27,778 वोट मिले। 2,15,085 मतदाताओं (65.35 फीसदी) ने वोट डाला।

खतौली: 2022 के चुनाव में BJP के विक्रम सिंह को 1,00,651 वोट, रालोद के राजपाल सिंह को 84,306 और बसपा के करतार सिंह को 31,412 वोट मिले थे। 2,21,969 मतदाताओं (69.79 फीसदी) ने मतदान किया। बाद में मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद विक्रम सिंह सैनी की सदस्यता रद्द हुई। उपचुनाव में रालोद के मदन भैया ने 97,139 वोट पाकर BJP के राज कुमार सैनी (74,996 वोट) को हराया।

मीरापुर: 2008 में अस्तित्व में आई इस सीट पर रालोद का लगातार दूसरी बार कब्जा है। 2022 में रालोद के चंदन चौहान ने 1,07,421 वोट पाकर BJP के प्रशांत चौधरी (80,041 वोट) को 27,380 वोटों से हराया। बसपा के सलीम कुरैशी को 23,797 वोट मिले। यहाँ 68.88 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।

2027 के लिए राजनीतिक समीकरण

रालोद का BJP के साथ नया गठबंधन और सपा का अकेले या नए साझीदारों के साथ मैदान में उतरने का इरादा मुजफ्फरनगर की चुनावी तस्वीर को 2022 से बिल्कुल अलग बना देता है। जाट-मुस्लिम ध्रुवीकरण और गन्ना किसानों की नाराज़गी इस बार भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। सभी छह सीटों पर उम्मीदवारों के चेहरे और गठबंधन का अंतिम स्वरूप 2027 की तस्वीर को स्पष्ट करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रालोद का वैचारिक पलटाव है — 2022 में जो पार्टी मुस्लिम-बहुल बुढ़ाना से सपा के साथ जीती, वही अब BJP की सहयोगी है। जाट मतदाता, जो कभी रालोद-सपा गठजोड़ की धुरी था, अब BJP-रालोद खेमे में है — यह बदलाव पश्चिमी यूपी की राजनीतिक भाषा को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। गन्ना किसानों के बकाया और कृषि संकट पर सपा का आक्रामक प्रचार एकमात्र ऐसा कारक है जो इस नए ध्रुवीकरण को चुनौती दे सकता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुजफ्फरनगर में 2022 विधानसभा चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
2022 के चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन और BJP ने बराबर-बराबर सीटें जीती थीं। बाद में खतौली उपचुनाव में BJP की सीट रालोद ने जीत ली, जिससे अब रालोद के 3, BJP के 2 और सपा का 1 विधायक है।
खतौली सीट BJP से क्यों छिनी और उपचुनाव में क्या हुआ?
मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद BJP विधायक विक्रम सिंह सैनी की सदस्यता रद्द हो गई। उपचुनाव में रालोद के मदन भैया ने 97,139 वोट पाकर BJP के राज कुमार सैनी (74,996 वोट) को हराया।
2027 के चुनाव में मुजफ्फरनगर का गठबंधन समीकरण क्या होगा?
2022 में सपा के साथ चुनाव लड़ने वाली रालोद अब BJP के साथ गठबंधन में है। सपा के 2027 में अकेले या नए साझीदारों के साथ उतरने की संभावना है, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है।
मुजफ्फरनगर जिले की जनसांख्यिकी और आर्थिक स्थिति कैसी है?
जिले में 55.79% हिंदू और 41.39% मुस्लिम आबादी है। अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, गन्ना, चीनी (8 मिलें), कागज और इस्पात उद्योग पर आधारित है तथा 40% से अधिक आबादी खेती से जुड़ी है।
2022 में मुजफ्फरनगर की किस सीट पर सबसे बड़े और सबसे छोटे अंतर से जीत हुई?
सबसे बड़ी जीत बुढ़ाना में रालोद के राजपाल सिंह बलियान की रही — 28,310 वोटों का अंतर। सबसे करीबी मुकाबला चरथावल में हुआ, जहाँ सपा के पंकज कुमार मलिक केवल 5,334 वोटों से जीते।
राष्ट्र प्रेस
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